इटली के बुर्का-नकाब बैन प्रस्ताव पर हरिद्वार के संतों का समर्थन, भारत में भी लागू करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
हरिद्वार के साधु-संतों ने 23 सितंबर 2026 को इटली में बुर्का और नकाब पर प्रतिबंध के प्रस्ताव का खुलकर स्वागत किया और माँग की कि इस तरह का नियम भारत में भी लागू किया जाए। संतों का कहना है कि यह कदम महिलाओं के हित और सार्वजनिक सुरक्षा — दोनों के लिहाज़ से ज़रूरी है।
संतों की प्रतिक्रिया
संत करौली शंकर ने बुधवार को कहा कि इटली की प्रधानमंत्री ने एक महिला होने के नाते महिलाओं के हित में बेहद सराहनीय निर्णय लिया है। उन्होंने कहा, 'इस तरह का कानून सभी जगह होना चाहिए और भारत में भी इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।'
संत करौली शंकर ने यह भी कहा कि देश 21वीं सदी में आगे बढ़ रहा है और आज की युवा पीढ़ी अपनी पहचान एवं अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि चेहरा छिपाने की परंपरा का कोई औचित्य नहीं है — 'कौन सा अपराध किया है जो चेहरा छिपाना पड़े।'
सुरक्षा का पहलू
संत करौली शंकर ने सुरक्षा चिंताओं की भी बात की। उन्होंने कहा कि कई बार अपराधी बुर्का पहनकर घटना को अंजाम देकर फरार हो जाते हैं और लोग उन्हें महिला समझते रहते हैं। उनके अनुसार, अपराधों पर रोक लगाने और महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए इस पहनावे पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
हालाँकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जहाँ सुरक्षा का प्रश्न है, वहाँ हर तरह के पहनावे को सुरक्षा मानकों से गुज़रना होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग अपनी मर्ज़ी से पहनावा तय करते हैं, उनमें किसी को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।
स्कूलों में एकसमान ड्रेस कोड की वकालत
संत करौली शंकर ने विशेष रूप से स्कूली बच्चों का उदाहरण दिया। उनका कहना था कि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को बुर्का या नकाब पहनकर नहीं आना चाहिए — स्कूल में केवल स्कूल यूनिफ़ॉर्म ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर अलग-अलग पहनावा समाज में अलगाव और भ्रम की भावना पैदा करता है।
उनके अनुसार, जब तक बच्चे स्कूल में हैं, तब तक वे स्कूल की निर्धारित यूनिफ़ॉर्म में ही आएँ। स्कूल के बाहर या विवाह के बाद वयस्क महिलाएँ क्या पहनती हैं, इस पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि यूरोप के कई देशों में धार्मिक परिधान और चेहरा ढकने पर बहस वर्षों से चल रही है। फ्रांस ने 2011 में सार्वजनिक स्थलों पर चेहरा ढकने पर प्रतिबंध लगाया था। इटली का ताज़ा प्रस्ताव इसी श्रृंखला में नवीनतम कड़ी है। भारत में यह बहस स्थानीय स्तर पर समय-समय पर उठती रही है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक नीति नहीं बनाई है।
आने वाले दिनों में यह विमर्श राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर और गहरा होने की संभावना है।