27 जुलाई 2026
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हरिद्वार: 'असली-नकली देवी-देवता' विवाद में स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उत्तराखंड सरकार से निष्पक्ष जांच की माँग की

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हरिद्वार: 'असली-नकली देवी-देवता' विवाद में स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उत्तराखंड सरकार से निष्पक्ष जांच की माँग की

सारांश

हरिद्वार में 'असली और नकली देवी-देवताओं' का विवाद अब सरकारी जांच की दहलीज़ तक पहुँच गया है। आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उत्तराखंड सरकार से हस्तक्षेप की माँग की है, ताकि सनातन धर्म की गरिमा और समाज में स्पष्टता बनी रहे।

मुख्य बातें

स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने 27 मई 2026 को हरिद्वार में 'असली-नकली देवी-देवता' विवाद की निष्पक्ष जांच की माँग की।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ.
रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि पंजाब के संतों का दावा है कि असली देवता उनके पास हैं।
उदासीन नया अखाड़ा (पंजाब) के साधु-संत और प्रबंध समिति के प्रतिनिधि हरिद्वार बैठक में शामिल हुए।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने उत्तराखंड सरकार से भी स्वतंत्र जांच कराने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि देवी-देवताओं पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी या अभद्र व्यवहार अस्वीकार्य है।

आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने 27 मई 2026 को हरिद्वार में पत्रकारों से बातचीत में 'असली और नकली देवी-देवताओं' को लेकर उठे विवाद की निष्पक्ष एवं विधिवत जांच की माँग की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म की गरिमा और समाज में स्पष्टता बनाए रखने के लिए तथ्यों के आधार पर सच्चाई सामने आनी चाहिए।

विवाद की पृष्ठभूमि

हरिद्वार में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (दूसरे गुट) की एक महत्त्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें पंजाब से आए उदासीन नया अखाड़ा के साधु-संत और अखाड़े की प्रबंध समिति के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि पंजाब से आए संतों का दावा है कि असली देवता उनके पास हैं, जबकि हरिद्वार स्थित अखाड़े में कथित तौर पर नकली देवताओं का स्नान कराया जा रहा है।

स्वामी कैलाशानंद गिरी का पक्ष

स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि नया अखाड़ा उदासीन के कई सदस्य उनके समक्ष उपस्थित हुए और पूरे मामले को उनके संज्ञान में लाया गया। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि यह जांच का विषय है — एक तरफ ये लोग दावा कर रहे हैं कि उनके पास असली देवता हैं।' उन्होंने यह भी बताया कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने भी जांच की माँग की है।

सरकार से जांच की अपील

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने इस विवाद को केवल धार्मिक संस्थाओं तक सीमित न रखते हुए उत्तराखंड सरकार से भी स्वतंत्र जांच कराने की अपील की। उन्होंने कहा कि 'फिलहाल मामले की जांच जारी है, लेकिन हम चाहते हैं कि सरकार की ओर से भी इसकी जांच की जाए, ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके।' उनके अनुसार जो लोग पूरी सत्यता और निष्ठा के साथ काम कर रहे हैं, उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का कुठाराघात नहीं होना चाहिए।

सनातन धर्म की गरिमा का प्रश्न

स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने इस पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि यह विवाद सड़क पर आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि 'देवता किसी भी सूरत में नकली नहीं होते — वे हमेशा असली होते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि भगवती और देवी-देवताओं पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी या अभद्र व्यवहार स्वीकार्य नहीं है।

आगे की राह

इस विवाद में अब धार्मिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर जांच की माँग उठ चुकी है। उत्तराखंड सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। धार्मिक जगत में इस मामले की गूँज को देखते हुए आने वाले दिनों में इस पर स्पष्टता आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो श्रद्धालुओं का भरोसा सबसे पहले डगमगाता है। स्वामी कैलाशानंद गिरी का सरकारी जांच की माँग करना यह भी संकेत देता है कि धार्मिक संस्थाएँ इस विवाद को अपने स्तर पर सुलझाने में असमर्थ महसूस कर रही हैं। सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करने की स्थिति में है, और क्या ऐसा हस्तक्षेप धर्मनिरपेक्षता के ढाँचे के भीतर उचित होगा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'असली और नकली देवी-देवता' विवाद क्या है?
यह विवाद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और पंजाब के उदासीन नया अखाड़ा के बीच उस दावे को लेकर है कि हरिद्वार स्थित अखाड़े में कथित तौर पर नकली देवताओं का स्नान कराया जा रहा है, जबकि पंजाब के संतों का कहना है कि असली देवता उनके पास हैं। यह मामला 27 मई 2026 को हरिद्वार में हुई बैठक के बाद सार्वजनिक हुआ।
स्वामी कैलाशानंद गिरी ने किससे जांच की माँग की है?
स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की आंतरिक जांच के साथ-साथ उत्तराखंड सरकार से भी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि सरकारी जांच से पूरी सच्चाई सामने आएगी।
इस विवाद में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद की क्या भूमिका है?
परिषद के अध्यक्ष डॉ. रवींद्र पुरी महाराज ने हरिद्वार में बैठक आयोजित की और पंजाब के संतों का पक्ष सुना। उन्होंने स्वयं भी इस मामले की जांच की माँग की है। परिषद फिलहाल मामले की आंतरिक जांच कर रही है।
इस विवाद का सनातन धर्म पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
स्वामी कैलाशानंद गिरी के अनुसार, इस विवाद से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देवी-देवताओं पर किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक टिप्पणी सनातन धर्म की गरिमा के विरुद्ध है और इसे रोकने के लिए विधिवत जांच ज़रूरी है।
उत्तराखंड सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
अभी तक उत्तराखंड सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान या जांच का आदेश सामने नहीं आया है। स्वामी कैलाशानंद गिरी और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने सरकार से हस्तक्षेप की माँग की है, लेकिन प्रशासनिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।
राष्ट्र प्रेस
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