क्या अखिलेश यादव और विपक्ष मणिकर्णिका घाट के नाम पर राजनीति कर रहे हैं? : कपिल देव अग्रवाल
सारांश
Key Takeaways
- मणिकर्णिका घाट पर राजनीतिक विवाद बढ़ा है।
- कपिल देव अग्रवाल ने समाजवादी पार्टी के आरोपों को खारिज किया।
- अखिलेश यादव ने भाजपा पर पौराणिक मंदिरों को तोड़ने का आरोप लगाया।
- विपक्ष के नेताओं का आरोप है कि वे भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं।
लखनऊ, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। वाराणसी के मणिकर्णिका घाट मंदिर को लेकर राजनीति में उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि भाजपा के शासन में जितने पौराणिक मंदिरों को तोड़ा गया, उतना इतिहास में कभी नहीं हुआ। इस पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि विपक्ष गलत बयानों से लोगों को गुमराह कर रहा है।
कपिल देव अग्रवाल ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "समाजवादी पार्टी जो आरोप लगा रही है, उसमें कोई तथ्य नहीं है। उनके बयान और उनके आधार पर उठाए गए सवाल सभी संदेह के घेरे में हैं। भारतीय जनता पार्टी मंदिरों के निर्माण के लिए पूरी ताकत से काम कर रही है। राम मंदिर, जिसका नींव रखने का समारोह हमने देखा, वह हमारे सामने साकार हो रहा है। इसे अत्यंत सुंदर और दिव्य तरीके से बनाया जा रहा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेता मणिकर्णिका घाट के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। भाजपा सरकार हमेशा जनता के हित में कार्य करती है। यह बात जनता को भली-भांति पता है, इसीलिए वे इनके प्रपंचों में नहीं आने वाले हैं।
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य के अधिकारियों के साथ झड़प के संदर्भ में मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा, "आज गड़बड़ी पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं। इन पर नजर रखी जा रही है और निपटने के लिए उचित इंतजाम किए गए हैं। चाहे वे कितने भी सम्मानित बुजुर्ग हों, सभी के साथ समान व्यवहार किया जाएगा। जो लोग नियमों के खिलाफ जाएंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।"
मंत्री अनिल राजभर ने मणिकर्णिका घाट की 'फर्जी' तस्वीरें शेयर करने के आरोप में सांसद संजय सिंह और सांसद पप्पू यादव समेत 8 लोगों के खिलाफ दर्ज केस पर कहा, "पहले मैं समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और बिहार के नेताओं से पूछता हूं कि क्या वे कभी मणिकर्णिका घाट गए हैं? क्या उन्होंने उसे सच में देखा है? क्या उन्हें पता है कि महाश्मशान कैसा दिखता है? शायद वे वहां गए ही नहीं।"
संगम घाट पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य की अधिकारियों के साथ हुई झड़प पर मंत्री अनिल राजभर ने कहा, "प्रशासन ने पहले ही समझा दिया था। आप सभी ने कल के दृश्य देखे और आज प्रिंट मीडिया में तस्वीरें छपी हैं। उस समय लाखों लोग उपस्थित थे और स्नान की रस्में चल रही थीं। प्रशासन ने सिर्फ अनुरोध किया था कि या तो वे थोड़ा इंतजार करें ताकि भीड़ कम होने पर उनकी गरिमा के अनुसार स्नान की व्यवस्था की जा सके या अगर तुरंत जाना चाहते हैं तो पालकी से यात्रा करना कठिन होगा।"