31 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

उज्बेकिस्तान का सम्मान इतिहास की गलतियों की क्षमायाचना: भाजपा नेता सरिता अग्रवाल का ओवैसी पर पलटवार

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
उज्बेकिस्तान का सम्मान इतिहास की गलतियों की क्षमायाचना: भाजपा नेता सरिता अग्रवाल का ओवैसी पर पलटवार

सारांश

भाजपा नेता सरिता अग्रवाल ने उज्बेकिस्तान के सम्मान को बाबर से जोड़ने वाली ओवैसी की टिप्पणी को तर्कहीन बताया और कहा कि यह सम्मान इतिहास की गलतियों की क्षमायाचना है। साथ ही उन्होंने कर्नाटक मंत्री के कथित धर्म-श्रेष्ठता बयान को संवैधानिक पद की मर्यादा के विरुद्ध करार दिया।

मुख्य बातें

भाजपा नेता सरिता अग्रवाल ने 31 अगस्त को हैदराबाद में ओवैसी की उज्बेकिस्तान सम्मान पर की गई टिप्पणी को निराधार बताया।
अग्रवाल के अनुसार, उज्बेकिस्तान का यह सम्मान इतिहास की गलतियों की क्षमायाचना और दोनों देशों की मैत्री का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि बाबर जैसे ऐतिहासिक शासकों के कृत्यों को आज के राजनयिक सम्मान से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
कर्नाटक मंत्री बसवराज रायरेड्डी के कथित बयान — जिसमें इस्लाम को अन्य धर्मों से बेहतर बताया गया — की भी अग्रवाल ने आलोचना की।
अग्रवाल ने कहा कि संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को सभी धर्मों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना चाहिए।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता सरिता अग्रवाल ने 31 अगस्त को हैदराबाद में कहा कि उज्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया सर्वोच्च नागरिक सम्मान दोनों देशों की मैत्री का प्रतीक है और इसे ऐतिहासिक गलतियों की क्षमायाचना के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख एवं हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी की उस टिप्पणी पर कड़ा एतराज़ जताया, जिसमें उन्होंने इस सम्मान को बाबर के मूल देश से जोड़ा था।

ओवैसी की टिप्पणी पर सवाल

सरिता अग्रवाल ने कहा कि उज्बेकिस्तान के सम्मान को बाबर के मूल देश से जोड़कर प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना करना न तर्कसंगत है, न उचित। उनके अनुसार, बाबर को इतिहास में एक अत्याचारी शासक के रूप में देखा जाता है और उसके शासनकाल में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। उन्होंने सवाल किया कि सदियों पुराने शासकों के कृत्यों को आज के राजनयिक सम्मान से जोड़ने का क्या औचित्य है।

अग्रवाल ने कहा, 'ओवैसी ने किस तथ्य या तर्क के आधार पर ऐसी टिप्पणी की, यह समझ से परे है।' उनके अनुसार मृत अतीत को बार-बार उठाकर प्रधानमंत्री के सम्मान को विवादित बनाने की कोशिश निरर्थक है।

सम्मान का अर्थ और भारत-उज्बेकिस्तान संबंध

अग्रवाल ने कहा कि उज्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को यह सर्वोच्च नागरिक सम्मान देना दोनों देशों के बीच वर्तमान मित्रता और सहयोग का प्रतिबिंब है। उनके अनुसार, इस सम्मान के ज़रिए उज्बेकिस्तान ने इतिहास की गलतियों के लिए एक तरह से क्षमायाचना का संदेश दिया है।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने यह सम्मान स्वीकार कर यह स्पष्ट कर दिया है कि बाबर जैसे निरंकुश शासक आज के युग में आदर्श नहीं हो सकते। उनके अनुसार, भारत और उज्बेकिस्तान अब भविष्य के संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में साथ आगे बढ़ रहे हैं।

कर्नाटक मंत्री के कथित बयान पर आपत्ति

अग्रवाल ने कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री बसवराज रायरेड्डी के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर इस्लाम को अन्य धर्मों से बेहतर बताया था। उन्होंने कहा कि प्रत्येक धर्म की अपनी मान्यताएँ, मूल्य और जीवन-पद्धति होती है, और किसी को भी अपनी आस्था के अनुसार जीने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

हालाँकि, अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री से सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण की अपेक्षा की जाती है। उनके अनुसार, किसी एक धर्म को दूसरे से श्रेष्ठ बताने वाला बयान मंत्री की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है और तुष्टीकरण की राजनीति का संकेत देता है।

सार्वजनिक पद और धार्मिक तटस्थता

अग्रवाल ने कहा कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं की ज़िम्मेदारी है कि वे सभी नागरिकों और सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखें। व्यक्तिगत धार्मिक आस्था और सरकारी पद की भूमिका में स्पष्ट अंतर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियाँ संकीर्ण सोच और विशेष समुदाय को खुश करने की मानसिकता को दर्शाती हैं।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत-उज्बेकिस्तान के बीच राजनयिक संबंधों को नई ऊँचाई मिली है और घरेलू राजनीति में धर्म-आधारित बयानबाज़ी पर बहस तेज़ हो रही है। आने वाले दिनों में इन बयानों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या BJP नेता स्वयं सभी धर्मों के मामलों में यही मानक एकसमान लागू करते हैं। असली बहस यह है कि राजनयिक सम्मानों को घरेलू इतिहास-राजनीति के औज़ार के रूप में इस्तेमाल करना — चाहे कोई भी दल करे — कूटनीतिक परिपक्वता के लिए हानिकारक है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरिता अग्रवाल ने ओवैसी की किस टिप्पणी पर एतराज़ जताया?
ओवैसी ने उज्बेकिस्तान द्वारा प्रधानमंत्री मोदी को दिए गए सर्वोच्च नागरिक सम्मान को बाबर के मूल देश से जोड़कर टिप्पणी की थी। सरिता अग्रवाल ने इसे तर्कहीन बताते हुए कहा कि सदियों पुराने शासकों के कृत्यों को आज के राजनयिक सम्मान से जोड़ना उचित नहीं है।
उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री मोदी को कौन सा सम्मान दिया?
उज्बेकिस्तान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान प्रदान किया। भाजपा नेता सरिता अग्रवाल ने इसे भारत और उज्बेकिस्तान के बीच मौजूदा मैत्री और सहयोग का प्रतीक बताया।
बसवराज रायरेड्डी के किस बयान की आलोचना हुई?
कर्नाटक के कांग्रेस मंत्री बसवराज रायरेड्डी ने कथित तौर पर इस्लाम को अन्य धर्मों से बेहतर बताया था। सरिता अग्रवाल ने इस कथित बयान को संवैधानिक पद की मर्यादा के विरुद्ध और तुष्टीकरण की राजनीति का संकेत बताया।
सरिता अग्रवाल के अनुसार मंत्री की ज़िम्मेदारी क्या होनी चाहिए?
उनके अनुसार, संवैधानिक पद पर बैठे मंत्री को सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण रखना चाहिए। किसी एक धर्म को दूसरे से श्रेष्ठ बताना पद की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करता है।
क्या यह विवाद भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को प्रभावित करेगा?
फिलहाल यह विवाद घरेलू राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित है। भारत और उज्बेकिस्तान के राजनयिक संबंध सकारात्मक दिशा में हैं और इस सम्मान को दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग की पुष्टि के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 7 घंटे पहले
  3. 8 घंटे पहले
  4. कल
  5. कल
  6. कल
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 1 साल पहले