'चांदी के गांधी' ने जगन्नाथपुरी से कोलकाता तक पैदल यात्रा की, बोले — बंगाल में BJP की जीत से विकास को मिलेगी गति
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के जगन्नाथपुरी से पैदल चलकर कोलकाता पहुँचे एक शख्स ने 4 मई को पश्चिम बंगाल में चर्चा का केंद्र बन गए। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की वेशभूषा में चाँदी (सिल्वर) रंग से रंगे इस व्यक्ति को सड़क पर देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को पश्चिम बंगाल में मिली बढ़त पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि राज्य में अब विकास की रफ्तार तेज होगी।
पैदल यात्रा का मकसद
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने महात्मा गांधी की वेशभूषा क्यों अपनाई, तो उन्होंने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस को बताया, "मैं स्वच्छ भारत मिशन का प्रचारक हूँ। पैदल यात्रा करके मैं इस अभियान का प्रसार कर रहा हूँ।" उन्होंने 4 मई को कोलकाता पहुँचने को एक विशेष अवसर बताते हुए कहा कि आज का दिन उनके लिए "विजय का दिन" है।
BJP की बढ़त पर प्रतिक्रिया
इस शख्स ने कहा कि वे पश्चिम बंगाल में BJP की सरकार बनने की संभावना से उत्साहित हैं। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को उनकी कुशल रणनीति के लिए धन्यवाद दिया और राज्य की जनता का भी आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, "पश्चिम बंगाल के लोगों ने बदलाव का मन बनाते हुए BJP को मौका दिया है और उन्हें विश्वास है कि इससे प्रदेश में विकास की गति तेज होगी।"
BJP नेता शिशिर बाजोरिया का बयान
BJP नेता शिशिर बाजोरिया ने भी पार्टी को मिली बढ़त पर खुशी व्यक्त की। उन्होंने कहा, "श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमि पर उनके दल ने इस बार इतिहास रचने का काम किया है।" बाजोरिया ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता से बाहर करने का मन बना लिया था और आज यह तस्वीर साफ नजर आ रही है।
क्रिकेट के अंदाज में राजनीतिक टिप्पणी
बाजोरिया ने क्रिकेट की भाषा में पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि BJP "डबल सेंचुरी" की ओर बढ़ रही है, जबकि निकटतम प्रतिद्वंद्वी दो अंकों तक ही सिमट गए। उन्होंने कहा, "हम कहाँ तक जाएंगे, यह आगे देखिए।" यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में मतगणना के रुझान तेजी से बदल रहे हैं और राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है।
आगे क्या
पश्चिम बंगाल में BJP की बढ़त को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएँ जारी हैं। गौरतलब है कि यह राज्य दशकों से वामपंथी और TMC के वर्चस्व का गढ़ रहा है। अब जैसे-जैसे अंतिम परिणाम सामने आएंगे, यह स्पष्ट होगा कि बंगाल में सत्ता का समीकरण किस दिशा में जाता है।