जयपुर में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से प्रैक्टिस कर रहे 4 डॉक्टर गिरफ्तार, 100 से अधिक चिन्हित
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 15 अक्टूबर 2026 को जयपुर में फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने वाले 4 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन डॉक्टरों ने परीक्षा पास किए बिना ₹27 लाख से ₹30 लाख की रकम देकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किए और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होकर मेडिकल इंटर्नशिप तक करने लगे।
मुख्य घटनाक्रम
जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी डॉक्टर रूस और किर्गिस्तान से एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) की डिग्री लेकर भारत लौटे थे। भारत में विदेश से एमबीबीएस करने वाले चिकित्सकों के लिए FMGE परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, जो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित होती है। आरोपियों ने यह परीक्षा पास नहीं की, बल्कि मोटी रकम देकर फर्जी सर्टिफिकेट जुटाए।
इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया और राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप शुरू कर दी। SOG अधिकारियों के अनुसार अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियाँ
यह कार्रवाई इस मामले की पहली नहीं है। इससे पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सहित 33 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। गौरतलब है कि जाँच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, और SOG फर्जी मेडिकल डिग्री व सर्टिफिकेट के पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने की कोशिश में है। चिकित्सा जगत में इस खुलासे से व्यापक हड़कंप मचा हुआ है।
दिल्ली में भी समान फर्जीवाड़े का भंडाफोड़
यह ऐसे समय में सामने आया है जब 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ ने दिव्यांगों (PwD) के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। उस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद हुए थे।
कथित तौर पर यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के विभिन्न मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयों के कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) रिकॉर्ड में हेरफेर करता था और नकली मेडिकल रिपोर्ट तथा विकलांगता प्रमाण पत्र तैयार करता था। इन सर्टिफिकेट का उपयोग कथित तौर पर कॉलेजों और अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों पर प्रवेश लेने के लिए किया जाता था।
आम जनता पर असर
फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से लैस बिना योग्यता के डॉक्टरों का मेडिकल संस्थानों में सक्रिय रहना सीधे मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है जो चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता को खोखला कर रहा है।
क्या होगा आगे
SOG की जाँच अभी जारी है और एजेंसी इस रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल की पंजीयन प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकी जा सके।