15 अक्टूबर 2026
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जयपुर में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से प्रैक्टिस कर रहे 4 डॉक्टर गिरफ्तार, 100 से अधिक चिन्हित

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जयपुर में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से प्रैक्टिस कर रहे 4 डॉक्टर गिरफ्तार, 100 से अधिक चिन्हित

सारांश

राजस्थान SOG ने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के दम पर मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने वाले 4 डॉक्टरों को दबोचा। ₹27-30 लाख देकर बनवाए गए ये नकली दस्तावेज़ एक बड़े रैकेट की कड़ी हैं — अब तक 33 गिरफ्तार, 100 से अधिक संदिग्ध चिन्हित।

मुख्य बातें

राजस्थान SOG ने 15 अक्टूबर 2026 को जयपुर में फर्जी FMGE सर्टिफिकेट रखने वाले 4 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने ₹27 लाख से ₹30 लाख देकर फर्जी सर्टिफिकेट खरीदे और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया।
गिरफ्तार डॉक्टर रूस और किर्गिस्तान से एमबीबीएस करके लौटे थे, परंतु अनिवार्य FMGE परीक्षा पास नहीं की थी।
इस मामले में अब तक राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सहित 33 आरोपी गिरफ्तार; 100 से अधिक संदिग्ध चिन्हित।
8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने भी PwD फर्जी सर्टिफिकेट नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया और 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद किए।

राजस्थान की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 15 अक्टूबर 2026 को जयपुर में फर्जी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) सर्टिफिकेट के आधार पर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराने वाले 4 डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन डॉक्टरों ने परीक्षा पास किए बिना ₹27 लाख से ₹30 लाख की रकम देकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किए और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होकर मेडिकल इंटर्नशिप तक करने लगे।

मुख्य घटनाक्रम

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी डॉक्टर रूस और किर्गिस्तान से एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) की डिग्री लेकर भारत लौटे थे। भारत में विदेश से एमबीबीएस करने वाले चिकित्सकों के लिए FMGE परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है, जो नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित होती है। आरोपियों ने यह परीक्षा पास नहीं की, बल्कि मोटी रकम देकर फर्जी सर्टिफिकेट जुटाए।

इन दस्तावेजों के आधार पर उन्होंने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीयन कराया और राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप शुरू कर दी। SOG अधिकारियों के अनुसार अब तक इस नेटवर्क से जुड़े 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया जा चुका है।

पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियाँ

यह कार्रवाई इस मामले की पहली नहीं है। इससे पहले राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सहित 33 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। गौरतलब है कि जाँच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है, और SOG फर्जी मेडिकल डिग्री व सर्टिफिकेट के पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुँचने की कोशिश में है। चिकित्सा जगत में इस खुलासे से व्यापक हड़कंप मचा हुआ है।

दिल्ली में भी समान फर्जीवाड़े का भंडाफोड़

यह ऐसे समय में सामने आया है जब 8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट के स्पेशल स्टाफ ने दिव्यांगों (PwD) के लिए फर्जी सर्टिफिकेट बनाने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। उस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया और 27 नकली विकलांगता प्रमाण पत्र बरामद हुए थे।

कथित तौर पर यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश के विभिन्न मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालयों के कर्मचारियों की मिलीभगत से यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) रिकॉर्ड में हेरफेर करता था और नकली मेडिकल रिपोर्ट तथा विकलांगता प्रमाण पत्र तैयार करता था। इन सर्टिफिकेट का उपयोग कथित तौर पर कॉलेजों और अंडरग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में आरक्षित सीटों पर प्रवेश लेने के लिए किया जाता था।

आम जनता पर असर

फर्जी FMGE सर्टिफिकेट से लैस बिना योग्यता के डॉक्टरों का मेडिकल संस्थानों में सक्रिय रहना सीधे मरीजों की सुरक्षा के लिए खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क है जो चिकित्सा व्यवस्था की विश्वसनीयता को खोखला कर रहा है।

क्या होगा आगे

SOG की जाँच अभी जारी है और एजेंसी इस रैकेट से जुड़े अन्य संदिग्धों की तलाश कर रही है। आलोचकों का कहना है कि राजस्थान मेडिकल काउंसिल की पंजीयन प्रक्रिया में व्यापक सुधार की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी धोखाधड़ी रोकी जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ अयोग्य 'डॉक्टर' मरीजों का इलाज कर रहे थे। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार तक की संलिप्तता बताती है कि यह भ्रष्टाचार ऊपर तक फैला है। सवाल यह है कि जिन 100 से अधिक संदिग्धों को 'चिन्हित' किया गया है, वे अभी भी किन-किन अस्पतालों और कॉलेजों में सक्रिय हैं। NBE और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को राज्य-स्तरीय पंजीयन प्रक्रियाओं की केंद्रीकृत डिजिटल जाँच का ढाँचा तत्काल खड़ा करना होगा।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयपुर में गिरफ्तार डॉक्टरों पर क्या आरोप हैं?
गिरफ्तार 4 डॉक्टरों पर आरोप है कि उन्होंने FMGE परीक्षा पास किए बिना ₹27 लाख से ₹30 लाख देकर फर्जी सर्टिफिकेट हासिल किए और राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अवैध पंजीयन कराया। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वे राज्य के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप कर रहे थे।
FMGE परीक्षा क्या है और यह क्यों जरूरी है?
FMGE यानी फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन, नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा आयोजित वह अनिवार्य परीक्षा है जो विदेश से एमबीबीएस करने वाले डॉक्टरों को भारत में प्रैक्टिस की अनुमति से पहले उत्तीर्ण करनी होती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से पढ़े डॉक्टर भारतीय चिकित्सा मानकों पर खरे उतरें।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हो चुके हैं?
SOG की कार्रवाई में अब तक राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार सहित 33 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं, और ताज़ा कार्रवाई में 4 और डॉक्टर पकड़े गए हैं। जाँच एजेंसी ने इस नेटवर्क से जुड़े 100 से अधिक लोगों को चिन्हित किया है।
दिल्ली में हुए फर्जी सर्टिफिकेट मामले से यह कैसे जुड़ा है?
8 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस के नॉर्थ डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ ने दिव्यांगों (PwD) के लिए फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने वाले एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था, जिसमें 9 लोग गिरफ्तार हुए और 27 नकली प्रमाण पत्र बरामद हुए। यह दोनों मामले दर्शाते हैं कि फर्जी सर्टिफिकेट गिरोह अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं और सरकारी रिकॉर्ड में सेंध लगाने की क्षमता रखते हैं।
आगे की जाँच में क्या होगा?
SOG इस फर्जी मेडिकल डिग्री और सर्टिफिकेट नेटवर्क से जुड़े सभी संदिग्धों की पहचान कर गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी रखे हुए है। जाँच का मुख्य लक्ष्य उन सूत्रधारों तक पहुँचना है जो फर्जी दस्तावेज तैयार करने और बेचने का काम कर रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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