महाराष्ट्र: FMGE के फर्जी स्कोरकार्ड बनाने वाले मास्टरमाइंड सहित तीन गिरफ्तार, 15-20 डॉक्टरों को दिए नकली दस्तावेज़
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने 6 अक्टूबर 2026 को एक बड़े अंतरराज्यीय फर्जीवाड़े का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया, जो विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई कर लौटे छात्रों के लिए फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) के नकली स्कोरकार्ड और मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट तैयार करते थे। इस रैकेट का मकसद था कि अयोग्य उम्मीदवार अनिवार्य स्क्रीनिंग टेस्ट को दरकिनार कर भारत में डॉक्टर के रूप में पंजीकरण हासिल कर सकें।
मामला कैसे उजागर हुआ
महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) को पंजीकरण आवेदनों की नियमित जाँच के दौरान संदेह हुआ कि कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों के पास वैध मेडिकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मौजूद हैं, जबकि उन्होंने अनिवार्य FMGE स्क्रीनिंग टेस्ट उत्तीर्ण नहीं किया था। इस संदेह के आधार पर MMC ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद नोडल साइबर पुलिस स्टेशन, महाराष्ट्र साइबर, मुंबई में एफआईआर दर्ज की गई।
गौरतलब है कि FMGE वह अनिवार्य परीक्षा है जो विदेशी विश्वविद्यालयों से एमबीबीएस करने के बाद भारत में चिकित्सा पेशे में प्रवेश के लिए पास करनी होती है। इसे बायपास करना न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा भी है।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने तकनीकी विश्लेषण, डिजिटल रिकॉर्ड और सिस्टम लॉग्स की गहन जाँच के बाद तीन आरोपियों को पकड़ा।
पहले दो आरोपी — वरुण प्रतापराव आखाडे (आयु 28 वर्ष) और संकेत प्रभाकर उनहाले (आयु 26 वर्ष) — दोनों बुलढाणा के निवासी हैं। जाँच में सामने आया है कि ये दोनों स्वयं FMGE में अनुत्तीर्ण हो चुके थे, फिर भी फर्जी सर्टिफिकेट के सहारे डॉक्टर के रूप में प्रैक्टिस करने की कोशिश में थे।
तीसरा और सबसे प्रमुख आरोपी राहुल गोपाल पाटील (आयु 35 वर्ष), निवासी नासिक, को इस पूरे अंतरराज्यीय गैंग का मास्टरमाइंड और मुख्य संचालक बताया जा रहा है। जाँच के अनुसार, पाटील ने पैसों के बदले लगभग 15 से 20 आवेदकों के लिए फर्जी स्कोरकार्ड, सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज़ तैयार किए।
जाँच का दायरा और डिजिटल साक्ष्य
महाराष्ट्र साइबर विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ अभी जारी है। फर्जी दस्तावेज बनाने, उन्हें डिजिटल माध्यम से भेजने और इस्तेमाल करने वाले पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए वित्तीय लेनदेन, डिजिटल उपकरणों और संचार रिकॉर्ड की भी जाँच की जा रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में फर्जी डॉक्टरों के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और स्वास्थ्य नियामक संस्थाएँ पंजीकरण प्रक्रिया को डिजिटल रूप से सुरक्षित बनाने पर ज़ोर दे रही हैं।
विदेशी मेडिकल स्नातकों को चेतावनी
महाराष्ट्र साइबर विभाग ने सभी विदेशी मेडिकल स्नातकों को कड़ी चेतावनी दी है कि वे किसी भी दलाल के झाँसे में न आएँ और FMGE जैसी अनिवार्य परीक्षाओं को दरकिनार करने के लिए नकली दस्तावेज़ों का सहारा न लें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आगे की जाँच में इस रैकेट से जुड़े और संदिग्धों की पहचान होने की संभावना है, और विभाग अन्य राज्यों की साइबर इकाइयों के साथ समन्वय कर रहा है।