10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र में 'नो योर डॉक्टर' QR सिस्टम लॉन्च: स्कैन करें और जानें डॉक्टर असली है या नकली

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र में 'नो योर डॉक्टर' QR सिस्टम लॉन्च: स्कैन करें और जानें डॉक्टर असली है या नकली

सारांश

महाराष्ट्र में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम कसने के लिए 'नो योर डॉक्टर' QR सिस्टम लॉन्च हुआ है — एक स्कैन में पंजीकरण की सच्चाई सामने आएगी। राज्य में 1.40 लाख पंजीकृत डॉक्टर हैं, फिर भी 2015 से 89 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने 'नो योर डॉक्टर' QR कोड प्रणाली लॉन्च की, जिससे नागरिक किसी भी डॉक्टर की पंजीकरण स्थिति तुरंत जाँच सकते हैं।
राज्य में वर्तमान में 1.40 लाख पंजीकृत डॉक्टर और प्रतिवर्ष 12,824 नए एमबीबीएस स्नातक।
2015 से 2026 के बीच अवैध चिकित्सकों के खिलाफ 89 आपराधिक मामले दर्ज।
अवैध प्रैक्टिस पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के तहत ₹50 लाख जुर्माना या 1 वर्ष जेल; बार-बार अपराध पर 10 वर्ष कठोर कारावास।
निगरानी समितियों का शीघ्र पुनर्गठन होगा और स्थानीय जनप्रतिनिधि भी शामिल किए जाएँगे।
सरकार पीसी-पीएनडीटी एक्ट में संशोधन के पक्ष में।

महाराष्ट्र सरकार ने 24 जून 2026 को राज्य में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम कसने के लिए एक अहम तकनीकी पहल शुरू की है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान जानकारी दी कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने 'नो योर डॉक्टर' नाम से एक QR कोड आधारित प्रणाली लागू की है, जिसके ज़रिये नागरिक मिनटों में किसी भी डॉक्टर की पंजीकरण स्थिति की जाँच कर सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में आई है जब 2015 से 2026 के बीच राज्य में अवैध चिकित्सकों के खिलाफ 89 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।

क्या है 'नो योर डॉक्टर' प्रणाली

इस प्रणाली के तहत प्रत्येक पंजीकृत डॉक्टर को एक विशिष्ट QR कोड जारी किया जाएगा। कोई भी नागरिक अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करके तुरंत यह सत्यापित कर सकता है कि संबंधित चिकित्सक महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में कानूनी रूप से पंजीकृत है या नहीं। मंत्री मुश्रीफ ने यह जानकारी विधायक विजय देशमुख के उस प्रश्न के उत्तर में दी, जो सोलापुर जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित था।

महाराष्ट्र की चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति

मंत्री ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 1.40 लाख पंजीकृत डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाएँ दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष लगभग 12,824 नए एमबीबीएस स्नातक राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में जुड़ते हैं। 'फर्जी डॉक्टर' की परिभाषा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एमबीबीएस, स्नातकोत्तर, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी तथा दंत चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में बिना वैध पंजीकरण के प्रैक्टिस करने वाले सभी लोग शामिल हैं।

निगरानी तंत्र और समितियाँ

अवैध चिकित्सकों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में और तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में निगरानी समितियाँ गठित की हैं। मंत्री ने घोषणा की कि इन समितियों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाएगा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इनमें शामिल किया जाएगा, ताकि ज़मीनी स्तर पर निगरानी और प्रभावी हो सके।

कानूनी प्रावधान और दंड

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों के तहत अवैध प्रैक्टिस पर एक वर्ष तक की जेल या ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट के अनुसार पहली बार अपराध करने पर दो वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है, जबकि बार-बार अपराध दोहराने वालों को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा मिल सकती है। इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि सरकार पीसी-पीएनडीटी एक्ट में आवश्यक संशोधन के पक्ष में है, ताकि लोगों की जान को खतरे में डालने वालों को और कड़ी सजा दी जा सके।

आगे क्या होगा

निगरानी समितियों के पुनर्गठन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह उम्मीद जताई जा रही है कि फर्जी डॉक्टरों की पहचान और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी। 'नो योर डॉक्टर' QR प्रणाली राज्य की स्वास्थ्य सेवा में जवाबदेही का एक नया अध्याय शुरू कर सकती है — बशर्ते इसका क्रियान्वयन व्यापक और सुलभ हो।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके ज़मीनी क्रियान्वयन में है — ख़ासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में जहाँ स्मार्टफोन पहुँच सीमित है। 2015 से 2026 के बीच केवल 89 मामले दर्ज होना यह भी दर्शाता है कि निगरानी तंत्र अब तक पर्याप्त सक्रिय नहीं रहा। निगरानी समितियों में जनप्रतिनिधियों को शामिल करना जवाबदेही बढ़ा सकता है, लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप का जोखिम भी उतना ही वास्तविक है। जब तक QR डेटाबेस का नियमित अद्यतन और स्वतंत्र ऑडिट सुनिश्चित नहीं होता, यह प्रणाली कागज़ पर अच्छी और ज़मीन पर अधूरी रह सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'नो योर डॉक्टर' QR सिस्टम क्या है?
यह महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा शुरू की गई एक QR कोड आधारित प्रणाली है, जिसे स्कैन करके नागरिक किसी भी डॉक्टर की कानूनी पंजीकरण स्थिति तुरंत जाँच सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी डॉक्टरों की पहचान करना और उन पर रोक लगाना है।
महाराष्ट्र में फर्जी डॉक्टर कौन माने जाते हैं?
जो व्यक्ति एमबीबीएस, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी या दंत चिकित्सा जैसे किसी भी चिकित्सा क्षेत्र में वैध पंजीकरण के बिना प्रैक्टिस करते हैं, वे 'फर्जी डॉक्टर' की श्रेणी में आते हैं। राज्य में 2015 से 2026 के बीच ऐसे 89 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
फर्जी डॉक्टरों के लिए क्या सजा का प्रावधान है?
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों के तहत एक वर्ष तक की जेल या ₹50 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट के अनुसार पहली बार अपराध पर दो वर्ष और बार-बार अपराध पर 10 वर्ष तक का कठोर कारावास संभव है।
महाराष्ट्र में निगरानी समितियाँ कैसे काम करती हैं?
जिला स्तर पर जिला कलेक्टर और तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में निगरानी समितियाँ कार्यरत हैं। सरकार ने इनके शीघ्र पुनर्गठन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल करने की घोषणा की है।
इस QR प्रणाली से आम नागरिक को क्या फायदा होगा?
आम नागरिक किसी भी डॉक्टर के क्लिनिक या अस्पताल में QR कोड स्कैन करके मिनटों में यह जान सकेगा कि वह डॉक्टर कानूनी रूप से पंजीकृत है या नहीं। इससे अनजाने में फर्जी चिकित्सकों से इलाज कराने का जोखिम कम होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 4 दिन पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले