महाराष्ट्र में 'नो योर डॉक्टर' QR सिस्टम लॉन्च: स्कैन करें और जानें डॉक्टर असली है या नकली
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 24 जून 2026 को राज्य में फर्जी डॉक्टरों पर लगाम कसने के लिए एक अहम तकनीकी पहल शुरू की है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने बुधवार को महाराष्ट्र विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान जानकारी दी कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने 'नो योर डॉक्टर' नाम से एक QR कोड आधारित प्रणाली लागू की है, जिसके ज़रिये नागरिक मिनटों में किसी भी डॉक्टर की पंजीकरण स्थिति की जाँच कर सकते हैं। यह पहल ऐसे समय में आई है जब 2015 से 2026 के बीच राज्य में अवैध चिकित्सकों के खिलाफ 89 आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं।
क्या है 'नो योर डॉक्टर' प्रणाली
इस प्रणाली के तहत प्रत्येक पंजीकृत डॉक्टर को एक विशिष्ट QR कोड जारी किया जाएगा। कोई भी नागरिक अपने स्मार्टफोन से इस कोड को स्कैन करके तुरंत यह सत्यापित कर सकता है कि संबंधित चिकित्सक महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में कानूनी रूप से पंजीकृत है या नहीं। मंत्री मुश्रीफ ने यह जानकारी विधायक विजय देशमुख के उस प्रश्न के उत्तर में दी, जो सोलापुर जिले में फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ की गई कार्रवाई से संबंधित था।
महाराष्ट्र की चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति
मंत्री ने बताया कि राज्य में वर्तमान में लगभग 1.40 लाख पंजीकृत डॉक्टर स्वास्थ्य सेवाएँ दे रहे हैं। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक वर्ष लगभग 12,824 नए एमबीबीएस स्नातक राज्य की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में जुड़ते हैं। 'फर्जी डॉक्टर' की परिभाषा स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इसमें एमबीबीएस, स्नातकोत्तर, आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी तथा दंत चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में बिना वैध पंजीकरण के प्रैक्टिस करने वाले सभी लोग शामिल हैं।
निगरानी तंत्र और समितियाँ
अवैध चिकित्सकों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने जिला स्तर पर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में और तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में निगरानी समितियाँ गठित की हैं। मंत्री ने घोषणा की कि इन समितियों का शीघ्र पुनर्गठन किया जाएगा और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी इनमें शामिल किया जाएगा, ताकि ज़मीनी स्तर पर निगरानी और प्रभावी हो सके।
कानूनी प्रावधान और दंड
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के दिशानिर्देशों के तहत अवैध प्रैक्टिस पर एक वर्ष तक की जेल या ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। महाराष्ट्र मेडिकल प्रैक्टिशनर्स एक्ट के अनुसार पहली बार अपराध करने पर दो वर्ष तक की जेल या जुर्माना हो सकता है, जबकि बार-बार अपराध दोहराने वालों को 10 वर्ष तक के कठोर कारावास की सजा मिल सकती है। इसके अलावा, मंत्री ने कहा कि सरकार पीसी-पीएनडीटी एक्ट में आवश्यक संशोधन के पक्ष में है, ताकि लोगों की जान को खतरे में डालने वालों को और कड़ी सजा दी जा सके।
आगे क्या होगा
निगरानी समितियों के पुनर्गठन और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से यह उम्मीद जताई जा रही है कि फर्जी डॉक्टरों की पहचान और कार्रवाई की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और त्वरित होगी। 'नो योर डॉक्टर' QR प्रणाली राज्य की स्वास्थ्य सेवा में जवाबदेही का एक नया अध्याय शुरू कर सकती है — बशर्ते इसका क्रियान्वयन व्यापक और सुलभ हो।