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महाराष्ट्र में अवैध IVF सेंटरों पर मकोका की तैयारी, PCPNDT उल्लंघनकर्ताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

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महाराष्ट्र में अवैध IVF सेंटरों पर मकोका की तैयारी, PCPNDT उल्लंघनकर्ताओं पर होगी सख्त कार्रवाई

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने अवैध IVF और सोनोग्राफी केंद्रों के खिलाफ मकोका लगाने की घोषणा की है — यह राज्य में अनैतिक प्रजनन चिकित्सा के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई है। बदलापुर-अंबरनाथ में गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं, चंद्रपुर के दो केंद्र बंद किए गए हैं।

मुख्य बातें

सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने 1 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र विधानसभा में अवैध IVF और सोनोग्राफी केंद्रों पर मकोका लगाने की घोषणा की।
PCPNDT अधिनियम के उल्लंघन में दोषी डॉक्टरों, प्रशासनिक स्टाफ और अस्पताल प्रबंधन — तीनों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।
बदलापुर और अंबरनाथ में गैरकानूनी गिरोह का भंडाफोड़; संलिप्त डॉक्टर गिरफ्तार, मेडिकल लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया शुरू।
चंद्रपुर के 'बेबीश्योर क्लिनिक' और 'इंदिरा IVF सेंटर' को ART लेवल-1 रजिस्ट्रेशन मिलने तक संचालन बंद करने का आदेश; मामला न्यायालय में।
IVF उपचार को 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' में शामिल करने पर विचार, ताकि गरीब वर्ग को लाभ मिल सके।

महाराष्ट्र सरकार ने 1 जुलाई 2026 को राज्यभर में बिना अनुमति के संचालित सोनोग्राफी और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) सेंटरों के खिलाफ व्यापक अभियान की घोषणा की। सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश अबितकर ने महाराष्ट्र विधानसभा में स्पष्ट किया कि अवैध लिंग जाँच और अनैतिक चिकित्सा प्रथाओं में संलिप्त पाए जाने वालों पर 'महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट' (मकोका) लगाया जाएगा।

विधानसभा में उठा मुद्दा

यह मामला सत्र के दौरान तब सामने आया जब विधायक अबू आजमी ने राज्य में नियामक ढाँचे से बाहर चल रहे IVF केंद्रों पर गंभीर चिंताएँ जताईं। विधायक हरीश पिंपल, अजय चौधरी, योगेश सागर और राहुल पाटिल ने भी अतिरिक्त प्रश्नों के माध्यम से चर्चा में भाग लिया। मंत्री अबितकर ने स्वीकार किया कि महाराष्ट्र में IVF उपचार और अनावश्यक सिजेरियन सेक्शन (सी-सेक्शन) डिलीवरी दोनों में चिंताजनक वृद्धि दर्ज की गई है।

क्या होगी कार्रवाई

मंत्री ने सदन को बताया, 'हम अनैतिक मेडिकल प्रैक्टिस के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति अपनाते हैं। IVF में गलत प्रैक्टिस और 'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स' (PCPNDT) एक्ट के उल्लंघन में शामिल लोगों को कड़ी सजा देने के लिए मकोका लागू करने सहित कड़े कानूनी प्रावधान लाए जाएंगे। यह दोषी पाए जाने वाले डॉक्टरों, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ और हॉस्पिटल मैनेजमेंट पर लागू होगा।' इसके साथ ही राज्य एक व्यापक नियामक ढाँचा तैयार करेगा, ताकि IVF उपचार केवल चिकित्सीय आवश्यकता के आधार पर ही दिया जाए।

बदलापुर-अंबरनाथ में हुई कार्रवाई

बदलापुर और अंबरनाथ में एक गैरकानूनी गिरोह का भंडाफोड़ होने के बाद संलिप्त डॉक्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने उनके मेडिकल लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके अलावा, एक क्षेत्रीय विशेषज्ञ समिति ने चंद्रपुर में 'बेबीश्योर क्लिनिक' और 'इंदिरा IVF सेंटर' का निरीक्षण किया। कई संरचनात्मक और परिचालन अनियमितताएँ पाए जाने पर दोनों केंद्रों को आधिकारिक 'लेवल-1 असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी' (ART) रजिस्ट्रेशन प्राप्त करने तक तत्काल संचालन बंद करने का आदेश दिया गया है। मंत्री ने बताया कि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है।

गरीबों के लिए IVF सुविधा का विस्तार

मंत्री अबितकर ने यह भी बताया कि राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को लाभ पहुँचाने के लिए IVF सुविधा को 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' के अंतर्गत शामिल करने पर विचार कर रही है। यह कदम, यदि लागू हुआ, तो निजी केंद्रों पर निर्भरता कम करने और सरकारी निगरानी के दायरे में IVF उपचार लाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। गौरतलब है कि भारत में ART (विनियमन) अधिनियम 2021 लागू होने के बाद भी अनेक राज्यों में अपंजीकृत केंद्रों की संख्या चिंता का विषय बनी हुई है — महाराष्ट्र की यह कार्रवाई उस दिशा में एक ठोस संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — ART अधिनियम 2021 लागू होने के बाद भी देशभर में अपंजीकृत केंद्रों की संख्या कम नहीं हुई। मकोका जैसे संगठित अपराध कानून को चिकित्सा उल्लंघनों पर लागू करना कानूनी जटिलताएँ पैदा कर सकता है, जिन्हें अदालतों में चुनौती दी जा सकती है। साथ ही, IVF को सरकारी स्वास्थ्य योजना में शामिल करने का प्रस्ताव सराहनीय है, किंतु बिना पर्याप्त सरकारी अवसंरचना के यह निजी केंद्रों पर निर्भरता और बढ़ा सकता है। नीति की असली सफलता तब मानी जाएगी जब राज्य में पंजीकृत ART केंद्रों की संख्या और उनकी नियमित ऑडिट का पारदर्शी रिकॉर्ड सार्वजनिक होगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र सरकार अवैध IVF सेंटरों पर मकोका क्यों लगाना चाहती है?
राज्य सरकार के अनुसार, अनेक IVF और सोनोग्राफी केंद्र बिना अनुमति के लिंग जाँच और अनैतिक चिकित्सा प्रथाओं में संलिप्त हैं। सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने कहा कि PCPNDT अधिनियम के उल्लंघनकर्ताओं को कड़ी सजा देने के लिए मकोका लागू किया जाएगा।
बदलापुर और अंबरनाथ में क्या कार्रवाई हुई?
बदलापुर और अंबरनाथ में एक गैरकानूनी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ, जिसके बाद संलिप्त डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने उनके मेडिकल लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चंद्रपुर के IVF सेंटरों को बंद क्यों किया गया?
एक क्षेत्रीय विशेषज्ञ समिति के निरीक्षण में 'बेबीश्योर क्लिनिक' और 'इंदिरा IVF सेंटर' में कई संरचनात्मक और परिचालन अनियमितताएँ पाई गईं। दोनों केंद्रों को आधिकारिक ART लेवल-1 रजिस्ट्रेशन मिलने तक संचालन बंद करने का आदेश दिया गया है और मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
क्या गरीब मरीजों को भी IVF की सुविधा मिलेगी?
राज्य सरकार IVF उपचार को 'महात्मा ज्योतिबा फुले जन आरोग्य योजना' के अंतर्गत शामिल करने पर विचार कर रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को यह सुविधा सुलभ हो सके। अभी यह प्रस्ताव विचाराधीन है।
PCPNDT अधिनियम क्या है और यह IVF से कैसे जुड़ा है?
'प्री-कन्सेप्शन एंड प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्नीक्स' (PCPNDT) अधिनियम भारत में लिंग-चयन परीक्षणों पर रोक लगाता है। IVF प्रक्रिया में भ्रूण के लिंग की जाँच इस कानून के दायरे में आती है, और बिना पंजीकरण के ऐसे परीक्षण करना अपराध है।
राष्ट्र प्रेस
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