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राजस्थान SOG ने जाली FMGE प्रमाणपत्र मामले में 4 और डॉक्टर गिरफ्तार, अब तक 33 गिरफ्तारियाँ

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राजस्थान SOG ने जाली FMGE प्रमाणपत्र मामले में 4 और डॉक्टर गिरफ्तार, अब तक 33 गिरफ्तारियाँ

सारांश

राजस्थान SOG के जाली FMGE प्रमाणपत्र मामले में 4 और डॉक्टर गिरफ्तार, अब तक 33 आरोपी पकड़े गए। आरोप है कि ₹27–30 लाख देकर जाली सर्टिफिकेट खरीदे और सरकारी-निजी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप की। 100 से अधिक संदिग्धों की जाँच जारी।

मुख्य बातें

राजस्थान SOG ने जाली FMGE प्रमाणपत्र मामले में 15 अक्टूबर 2026 को 4 और डॉक्टर गिरफ्तार किए।
गिरफ्तार आरोपी हैं: भरत भूषण शर्मा (किर्गिस्तान), सौरभ शर्मा (रूस), हिमांशु शर्मा (रूस), शिवम चौधरी (कजाकिस्तान)।
प्रत्येक आरोपी ने कथित तौर पर जाली प्रमाणपत्र के लिए ₹27 लाख से ₹30 लाख का भुगतान किया।
इंटर्नशिप दौसा, धौलपुर, जयपुर (महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज) और अलवर के मेडिकल कॉलेजों में पूरी की गई।
मामले में अब तक कुल 33 लोग गिरफ्तार; 100 से अधिक संदिग्धों की जाँच जारी।
मामला 4 फरवरी 2026 को दर्ज; पूर्व RMC रजिस्ट्रार डॉ.
राजेश शर्मा सहित कई अधिकारी पहले से गिरफ्तार।

राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने 15 अक्टूबर 2026 को जाली विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) प्रमाणपत्र मामले में चार और डॉक्टरों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि इन चारों ने FMGE उत्तीर्ण किए बिना राजस्थान के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल करने और राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में पंजीकरण के लिए आवेदन करने हेतु जाली प्रमाणपत्रों का उपयोग किया। इस मामले में अब तक कुल 33 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

चारों आरोपियों की पहचान

SOG के अनुसार गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों की पहचान भरत भूषण शर्मा (26), सौरभ शर्मा (29), हिमांशु शर्मा (26) और शिवम चौधरी (28) के रूप में हुई है। जाँचकर्ताओं के अनुसार, भरत भूषण ने किर्गिस्तान से, सौरभ और हिमांशु ने रूस से, तथा शिवम ने कजाकिस्तान से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की थी।

SOG ने यह भी बताया है कि सौरभ शर्मा और हिमांशु शर्मा आपस में रिश्तेदार हैं।

कितने पैसे में खरीदे गए जाली प्रमाणपत्र

जाँचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर जाली FMGE प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए प्रत्येक ने ₹27 लाख से ₹30 लाख तक का भुगतान किया। भरत भूषण ने कथित तौर पर ₹30 लाख देकर दौसा के सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी की।

सौरभ शर्मा ने कथित तौर पर ₹27 लाख देकर धौलपुर मेडिकल कॉलेज में, और हिमांशु शर्मा ने भी उतनी ही राशि में जयपुर के महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप की। शिवम चौधरी ने कथित तौर पर ₹30 लाख देकर अलवर मेडिकल कॉलेज में इंटर्नशिप पूरी की। इन चारों ने बाद में राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन किया था।

मामले का पृष्ठभूमि और दायरा

SOG के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) विशाल बंसल ने बताया कि धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के तहत SOG पुलिस स्टेशन में 4 फरवरी 2026 को यह मामला दर्ज किया गया था। FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) द्वारा आयोजित की जाती है, जो विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों के लिए अनिवार्य है।

गौरतलब है कि जाँच में 100 से अधिक ऐसे संदिग्धों की पहचान की गई है जिन्होंने विदेश से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की है और कथित प्रमाणपत्र धोखाधड़ी में शामिल होने का संदेह है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में विदेशी मेडिकल डिग्रीधारी डॉक्टरों की साख और स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर पहले से सवाल उठ रहे हैं।

पहले से गिरफ्तार प्रमुख आरोपी

इससे पहले गिरफ्तार किए गए लोगों में पूर्व RMC रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, अपर डिवीजन क्लर्क (UDC) अखिलेश माथुर, लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) फरहान हसन, कथित मुख्य आरोपी मनाराम माली, कई बिचौलिए और विदेश से मेडिकल डिग्री प्राप्त करने वाले अन्य डॉक्टर शामिल हैं।

आगे क्या होगा

SOG की जाँच अभी जारी है और 100 से अधिक संदिग्धों की जाँच की प्रक्रिया चल रही है। यह मामला न केवल स्वास्थ्य तंत्र में सेंध का उदाहरण है, बल्कि इसने RMC की पंजीकरण प्रक्रिया और मेडिकल कॉलेजों की इंटर्नशिप निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आगामी हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक संगठित नेटवर्क का काम है। असली सवाल यह है कि RMC और मेडिकल कॉलेजों की निगरानी प्रक्रिया इतने सालों तक इन जाली प्रमाणपत्रों को क्यों नहीं पकड़ पाई। पूर्व RMC रजिस्ट्रार की गिरफ्तारी बताती है कि फर्जीवाड़ा संस्थागत स्तर तक पहुँचा था — और इसीलिए जाँच का दायरा तंत्र-सुधार तक विस्तारित होना जरूरी है, न कि केवल अभियुक्तों की गिनती तक।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान SOG का जाली FMGE प्रमाणपत्र मामला क्या है?
यह मामला उन डॉक्टरों से जुड़ा है जिन्होंने विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेने के बाद अनिवार्य FMGE परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना जाली प्रमाणपत्रों के जरिए राजस्थान के मेडिकल कॉलेजों में इंटर्नशिप हासिल की और RMC में पंजीकरण के लिए आवेदन किया। SOG पुलिस स्टेशन में 4 फरवरी 2026 को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
SOG के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 तक इस मामले में कुल 33 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें पूर्व RMC रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, क्लर्क, बिचौलिए और विदेश से डिग्री प्राप्त करने वाले कई डॉक्टर शामिल हैं।
जाली FMGE प्रमाणपत्र के लिए कितने रुपए लिए जाते थे?
जाँचकर्ताओं के अनुसार, हाल में गिरफ्तार चारों आरोपियों ने कथित तौर पर जाली FMGE प्रमाणपत्र के लिए ₹27 लाख से ₹30 लाख तक का भुगतान किया। यह राशि एक संगठित नेटवर्क के जरिए ली जाती थी।
FMGE परीक्षा क्या होती है और यह क्यों अनिवार्य है?
FMGE (Foreign Medical Graduates Examination) एक स्क्रीनिंग परीक्षा है जो राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) द्वारा आयोजित की जाती है। विदेश से एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने से पहले यह परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होने की संभावना है?
SOG की जाँच जारी है और 100 से अधिक संदिग्धों की पड़ताल हो रही है, जिसके आधार पर आने वाले हफ्तों में और गिरफ्तारियाँ संभव हैं। साथ ही, RMC की पंजीकरण प्रक्रिया और मेडिकल कॉलेजों की इंटर्नशिप निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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