क्या आप जानते हैं जयपुर का ऐतिहासिक मोती डूंगरी गणेश मंदिर?

सारांश
Key Takeaways
- मोती डूंगरी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व है।
- यहाँ हर बुधवार सैंकड़ों भक्त पूजा करने आते हैं।
- मंदिर का निर्माण 1761 में हुआ था।
- यह स्थान धार्मिक आस्था का प्रतीक है।
- गणेश उत्सव के दौरान यहाँ खास रौनक होती है।
जयपुर, 26 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में गणेशोत्सव की धूम मची हुई है और विभिन्न राज्यों में भगवान गणेश के ऐसे कई मंदिर हैं, जहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इनमें से एक प्रमुख स्थान है मोती डूंगरी मंदिर, जो जयपुर में स्थित है। यह मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है और पूरे देश में इसकी प्रसिद्धि है।
हर बुधवार को, सैंकड़ों श्रद्धालु यहाँ पूजा-अर्चना के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहां आने वाले भक्तों की इच्छाएँ पूर्ण होती हैं। भक्तों की भीड़ इस मंदिर की लोकप्रियता को दर्शाती है।
यह मंदिर एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है, जो दूर से देखने पर छोटी सी लगती है, इसलिए इसे मोती डूंगरी कहा जाता है। यहां पहले सवाई मान सिंह द्वितीय का निवास स्थान था।
बाद में, यह राजमाता गायत्री देवी और उनके पुत्र जगत सिंह का निवास बना। वर्तमान में, यह राजपरिवार की निजी संपत्ति है और यहाँ भगवान गणेश का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। यह जगह एक प्रमुख पर्यटन स्थल भी है।
जानकारों के अनुसार, जब मावली के राजा एक लंबी यात्रा से लौट रहे थे, तो उन्होंने भगवान गणेश की विशाल मूर्ति बैलगाड़ी में लाने का निश्चय किया। उनका इरादा था कि वे अपने महल के पास मंदिर बनवाएं। एक स्थान पर बैलगाड़ी रुक गई, जिसे उन्होंने ईश्वर का संकेत माना और वहीं पर मंदिर का निर्माण कराने का निर्णय लिया। इस मंदिर का निर्माण सेठ जयराम पालीवाल ने किया और यह 1761 में बनकर तैयार हुआ।
मंदिर में भगवान गणेश की मूर्ति बैठने की स्थिति में है और इसे सिंदूर से सजाया गया है। इसके निकट ही बिरला मंदिर है। हर साल गणेश उत्सव के दौरान यहाँ भक्तों का तांता लग जाता है। यह मंदिर अपनी भव्य वास्तुकला, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक आस्था का प्रतीक है और विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहाँ लोग अपनी श्रद्धा और प्रसाद अर्पित करने के लिए आते हैं।