जयशंकर ने अबिदजान में कहा: अफ्रीका के साथ विकास साझेदारी भारत की विदेश नीति की धुरी
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 8 अक्टूबर 2026 को अबिदजान, कोटे डी आइवर में भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (आईटीईसी) कार्यक्रम के पूर्व प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि अफ्रीकी देशों के साथ विकास साझेदारी भारत की विदेश नीति का सबसे महत्त्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि भारत का सहयोग हमेशा अफ्रीकी साझेदार देशों की अपनी ज़रूरतों और प्राथमिकताओं के अनुरूप तय होता है, न कि एकतरफा एजेंडे से।
कंपाला सिद्धांत: रिश्तों की बुनियाद
जयशंकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ वर्ष पूर्व प्रतिपादित 'कंपाला सिद्धांतों' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा, "अफ्रीका के साथ हमारे जुड़ाव में विकास साझेदारी हमेशा से अहम रही है। हमारी सोच यह रही है कि भारत जो भी सहयोग करे, वह हमारे अफ्रीकी साझेदारों की जरूरतों और प्राथमिकताओं के हिसाब से होना चाहिए।" ये सिद्धांत अफ्रीका के साथ भारत के संबंधों की दिशा और दशा तय करने वाला प्रमुख दस्तावेज़ बन चुके हैं।
आईटीईसी के 62 वर्ष: एक मज़बूत विरासत
विदेश मंत्री ने बताया कि इस वर्ष आईटीईसी कार्यक्रम के 62 वर्ष पूरे हो रहे हैं। 1964 में स्थापित यह कार्यक्रम आज 160 से अधिक साझेदार देशों तक अपनी पहुँच बना चुका है। हर वर्ष विभिन्न क्षेत्रों में करीब 10,000 प्रतिभागियों को पूरी तरह वित्त पोषित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। जयशंकर ने इसे केवल ज्ञान साझाकरण का माध्यम नहीं, बल्कि दो तरफा सीखने की प्रक्रिया बताया — जिसमें भारत के संस्थान भी विदेशी प्रतिभागियों के अनुभव से लाभान्वित होते हैं।
आईटीईसी के क्षेत्र और विस्तार
जयशंकर ने बताया कि आज आईटीईसी के अंतर्गत आईसीटी व डिजिटल गवर्नेंस, लोक प्रशासन, बैंकिंग एवं वित्त, कृषि, ऊर्जा, कौशल विकास के साथ साथ रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद रोधी प्रशिक्षण भी शामिल है। उन्होंने कहा, "इसका मकसद एक ऐसा पूरा पैकेज तैयार करना है, जिससे हमारे साझेदार देशों की अलग अलग जरूरतों को पूरा किया जा सके।"
कोटे डी आइवर से विशेष प्रतिबद्धता
भारत और कोटे डी आइवर के दीर्घकालिक संबंधों का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में इस देश ने करीब 800 आईटीईसी स्लॉट का उपयोग किया है। आगे बढ़ते हुए रक्षा क्षेत्र में 123 स्लॉट और नागरिक क्षेत्रों में 100 स्लॉट देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। विदेश मंत्री ने कहा, "इन कोर्स के ज़रिए जो आपसी जुड़ाव, भावनाएं, अनुभव और यादें बनती हैं, वही किसी रिश्ते की असली ताकत होती हैं।"
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) में अपनी साझेदारी को नई ऊँचाई देने की कोशिश में है। गौरतलब है कि भारत ने हाल के वर्षों में अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार, स्वास्थ्य और डिजिटल अवसंरचना के क्षेत्र में कई बड़े समझौते किए हैं। आईटीईसी जैसे मानव केंद्रित कार्यक्रम इस कूटनीतिक रणनीति की नरम शक्ति (Soft Power) की धुरी बने हुए हैं। जयशंकर का यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।