विदेश मंत्री जयशंकर ने यूएन साइबर अपराध कन्वेंशन पर किए हस्ताक्षर, 93 देश पहले से शामिल
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 25 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के साइबर अपराध कन्वेंशन पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए। यह ऐतिहासिक वैश्विक संधि साइबर अपराधों से निपटने के लिए देशों की कानूनी और तकनीकी क्षमता बढ़ाने तथा सीमा-पार सहयोग को मज़बूत करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। भारत के इस संधि पर हस्ताक्षर को डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कन्वेंशन की पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इस संधि को वर्ष 2024 में अपनाया था। 40 सदस्य देशों के हस्ताक्षर का आवश्यक आँकड़ा पूरा होने के बाद यह पिछले वर्ष लागू हो गई। पिछले वर्ष के अंत तक 93 देश इस कन्वेंशन पर हस्ताक्षर कर चुके थे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, यह साइबर अपराध पर पहली व्यापक वैश्विक संधि है।
गौरतलब है कि यह कन्वेंशन ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में साइबर हमलों की संख्या और जटिलता तेज़ी से बढ़ रही है, और राष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने वाले साइबर अपराधियों से निपटने के लिए किसी एक देश का तंत्र अपर्याप्त साबित होता रहा है।
संधि में क्या है
यह संधि सदस्य देशों को साइबर अपराधों की रोकथाम और उनसे मुकाबले के लिए एक साझा कानूनी और तकनीकी ढाँचा प्रदान करती है। इसके तहत गंभीर अपराधों से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आदान-प्रदान में अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रावधान है। इसके अलावा, साइबर अपराध से अर्जित अवैध आय की बरामदगी और सीमा-पार जाँच में सहयोग के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है।
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह कन्वेंशन सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के बदलते स्वरूप के अनुरूप पारंपरिक आपराधिक जाँच पद्धतियों को आधुनिक बनाने में मदद करेगा। इसका उद्देश्य उन चुनौतियों से निपटना है जहाँ साइबर अपराधी कानूनी और भौगोलिक सीमाओं से परे काम करते हैं, जबकि कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ विभिन्न देशों के अधिकार क्षेत्र की सीमाओं में बँधी होती हैं।
जयशंकर की प्रतिक्रिया
विदेश मंत्री जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'यह कन्वेंशन सुरक्षित डिजिटल भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मज़बूत करता है।' उनकी यह टिप्पणी भारत की उस नीतिगत प्राथमिकता को रेखांकित करती है, जो डिजिटल शासन में वैश्विक साझेदारी पर जोर देती है।
भारत और वैश्विक डिजिटल सुरक्षा पर असर
भारत के इस संधि पर हस्ताक्षर से देश की साइबर जाँच एजेंसियों को सदस्य देशों के समकक्षों के साथ सीधे सहयोग करने का कानूनी आधार मिलेगा। यह ऐसे समय में विशेष रूप से प्रासंगिक है जब भारत में वित्तीय साइबर धोखाधड़ी, रैनसमवेयर हमले और डेटा चोरी की घटनाएँ बढ़ती रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस कन्वेंशन से भारत को उन देशों से साइबर अपराधियों की जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है जहाँ अभी तक द्विपक्षीय संधियाँ सीमित थीं।
आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि भारत इस कन्वेंशन को अपने घरेलू कानूनी ढाँचे — विशेष रूप से सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम — के साथ कैसे एकीकृत करता है।