जाजपुर में रेवेन्यू असिस्टेंट रंगे हाथों गिरफ्तार, ₹40,000 रिश्वत लेते पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा विजिलेंस ने 25 सितंबर 2026 को जाजपुर में एक जूनियर रेवेन्यू असिस्टेंट को जमीन खरीद की मंजूरी फाइल प्रोसेस करने के बदले ₹40,000 नकद रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों दबोच लिया। आरोपी सरकारी कर्मचारी की पहचान प्रसन्ना कुमार साहनी के रूप में हुई है, जो जाजपुर सब-कलेक्टर कार्यालय में कार्यरत हैं।
मामले का पूरा घटनाक्रम
मामले की शुरुआत 29 नवंबर 2025 से हुई, जब शिकायतकर्ता ने अपनी माँ के नाम पर एक अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के भूमि-स्वामी से 16 डेसिमल जमीन खरीदने के लिए कानूनी अनुमति हेतु आवेदन दिया था। राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति (SC/ST) समुदायों की भूमि की खरीद-बिक्री से पहले संबंधित राजस्व अधिकारी से अनिवार्य अनुमति लेना जरूरी है।
आरोप है कि साहनी ने बिना किसी ठोस कारण के फाइल को लंबे समय तक लटकाए रखा। बार-बार संपर्क करने और पीछा करने पर उन्होंने शिकायतकर्ता से जमीन के प्रत्येक डेसिमल के लिए ₹3,000 की दर से कुल ₹48,000 की रिश्वत माँगी। जब आवेदक ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जाहिर की, तो साहनी ने यह माँग घटाकर ₹40,000 कर दी।
विजिलेंस का जाल और गिरफ्तारी
लगातार बनाए जा रहे दबाव से तंग आकर शिकायतकर्ता ने राज्य की भ्रष्टाचार-रोधी एजेंसी के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने पर ओडिशा विजिलेंस ने 25 सितंबर को एक सुनियोजित जाल तैयार किया। साहनी को उनके कार्यालय कक्ष में ₹40,000 नकद माँगते और स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।
अधिकारियों ने बताया कि स्वतंत्र गवाहों की उपस्थिति में रिश्वत की पूरी राशि बरामद कर जब्त कर ली गई। इसके अलावा, साहनी का केमिकल हैंड-वॉश परीक्षण भी पॉजिटिव पाया गया, जो इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि उन्होंने नकदी अपने हाथों से संभाली।
तलाशी अभियान
ट्रैप के बाद विजिलेंस टीमों ने एक साथ दो स्थानों पर छापेमारी की — साहनी के जाजपुर सब-कलेक्टर कार्यालय के कक्ष में और जाजपुर सदर पुलिस क्षेत्र के गोबिंदापुर स्थित उनके आवास पर।
कानूनी कार्रवाई
कटक विजिलेंस पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला संख्या 37/26 दर्ज किया गया है। गौरतलब है कि यह प्रावधान लोक सेवकों द्वारा रिश्वत लेने पर कड़ी सजा का प्रावधान करता है।
आम जनता पर असर
यह घटना उस व्यापक समस्या को उजागर करती है जिसमें SC/ST भूमि अधिकार संरक्षण कानूनों की आड़ लेकर निचले स्तर के राजस्व अधिकारी सामान्य नागरिकों को उत्पीड़ित करते हैं। जमीन संबंधी कागजी कार्रवाई के लिए पहले से ही कमजोर वर्ग के नागरिकों को अवैध वसूली का शिकार बनाया जाता है। ओडिशा विजिलेंस द्वारा इस तरह के ऑपरेशन इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाने का प्रयास हैं।
इस प्रकरण में आगे की जाँच जारी है और अभी यह देखना बाकी है कि तलाशी अभियान में और क्या साक्ष्य सामने आते हैं।