जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में 9 दिन पहले भर्ती मरीज का शव मिला, परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया
सारांश
Key Takeaways
- जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल में मरीज का शव मिला।
- परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है।
- पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
- अस्पताल में सुरक्षा के लिए नए नियम लागू किए गए हैं।
- परिजनों ने मदद के लिए अस्पताल और पुलिस से गुहार लगाई थी।
जमशेदपुर, २४ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड के जमशेदपुर में स्थित सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में सोमवार की रात को उस समय हड़कंप मच गया, जब वहाँ इलाज के लिए ९ दिन पहले भर्ती हुए ५० वर्षीय मरीज सुनील यादव का शव अस्पताल परिसर में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला।
शहर के बागबेड़ा क्षेत्र के निवासी सुनील यादव अस्पताल में भर्ती होने के बाद अपने वार्ड से लापता हो गए थे। उनका सड़ा-गला शव लैब की बाउंड्री वॉल के पास कचरे के ढेर में पाया गया। मृतक के हाथ में अब भी इलाज के दौरान लगा 'कैनुला' मौजूद था, जो यह दर्शाता है कि वे अस्पताल की कस्टडी से गायब हुए थे।
इस घटना के बाद उत्तेजित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और प्रबंधन पर हत्या का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। परिवार के अनुसार, सुनील यादव को कमजोरी की शिकायत के बाद १३ मार्च को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। १४ मार्च की रात तक वे वार्ड में थे, लेकिन १५ मार्च की सुबह अचानक अपने बेड से गायब पाए गए। मृतक के बेटे अभय यादव के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में उनके पिता १४ मार्च की रात करीब ११ बजे अस्पताल के मुख्य गेट की ओर जाते हुए दिखाई दे रहे थे, जिसके बाद उनका कोई पता नहीं चला।
परिजनों का आरोप है कि पिछले ९ दिन से वे अस्पताल प्रबंधन और पुलिस से मदद मांग रहे थे, लेकिन किसी ने मदद नहीं की। सोमवार रात जब अस्पताल के एक कोने से तेज दुर्गंध आने लगी, तब जाकर इस घटना का खुलासा हुआ। शव की स्थिति को देखकर ग्रामीणों और परिजनों का मानना है कि यह ६-७ दिन पुराना है और इसे जानबूझकर वहाँ फेंका गया है। घटना की सूचना मिलते ही एमजीएम थाना पुलिस मौके पर पहुंची और उत्तेजित परिजनों को समझा-बुझाकर शांत कराया।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चलेगा, हालांकि पुलिस हत्या और लापरवाही दोनों पहलुओं पर जांच कर रही है। इस बड़ी चूक के बाद अस्पताल प्रबंधन बैकफुट पर है और तत्काल सुरक्षा के नए नियम लागू कर दिए गए हैं। अब वार्ड की खिड़कियों में ग्रिल लगाने, स्लाइडर दरवाजों में लॉक की व्यवस्था करने और रात ९ बजे के बाद मरीजों के बाहर निकलने पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
अस्पताल प्रशासन ने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि बिना परिजन वाले मरीजों को नर्स या अटेंडेंट की निगरानी में ही वॉशरूम भेजा जाएगा।