5 अक्टूबर 2026
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जयपुर: जेडीए के बुलडोजर से न्यू सांगानेर रोड पर दुकानें ध्वस्त, पट्टाधारी व्यापारियों में भारी आक्रोश

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जयपुर: जेडीए के बुलडोजर से न्यू सांगानेर रोड पर दुकानें ध्वस्त, पट्टाधारी व्यापारियों में भारी आक्रोश

सारांश

जयपुर में जेडीए के बुलडोजर ने न्यू सांगानेर रोड पर दर्जनों दुकानें ध्वस्त कर दीं — लेकिन पीड़ित व्यापारियों के पास वैध पट्टे हैं। अनिश्चित माप, अधूरी जानकारी और लाखों के नुकसान के बीच सवाल उठता है कि क्या विकास की यह कीमत सिर्फ छोटे कारोबारी ही चुकाते हैं।

मुख्य बातें

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 5 अक्टूबर 2026 को न्यू सांगानेर रोड पर सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक बुलडोजर चलाया।
कई दुकानदारों के पास वैध पट्टे और दस्तावेज़ होने के बावजूद उनके निर्माण ध्वस्त किए गए।
अधिकारियों ने पहले 7 फीट तोड़ने की बात कही, बाद में फुटपाथ तोड़ने की बात उठी — जिससे व्यापारियों में भ्रम और नुकसान दोनों बढ़े।
प्रभावित व्यापारियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ और परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई।
व्यापारियों ने जेडीए से कानूनी प्रमाण की माँग की है और कानूनी राहत लेने पर विचार कर रहे हैं।

जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 5 अक्टूबर 2026 को न्यू सांगानेर रोड पर सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाया, जिससे दर्जनों दुकानें और निर्माण ध्वस्त हो गए। प्रभावित व्यापारियों का आरोप है कि उनके पास वैध पट्टे और सभी कागजात मौजूद हैं, फिर भी उनकी संपत्ति को अतिक्रमण बताकर तोड़ा गया।

मुख्य घटनाक्रम

जेडीए की यह कार्रवाई न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गई। सोडाला तिराहे से लेकर गुर्जर की थड़ी तक के पूरे खंड में कई दुकानें और ढाँचे बुलडोजर की चपेट में आए। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जेडीए ने कार्रवाई से पहले उन्हें न तो पर्याप्त नोटिस दिया और न ही स्पष्ट माप-सीमा बताई।

व्यापारियों के अनुसार, अधिकारियों ने पहले कहा था कि केवल 7 फीट तक निर्माण हटाया जाएगा, जिसके बाद कुछ दुकानदारों ने खुद अपनी दुकानों का हिस्सा तोड़ लिया। लेकिन बाद में यह भी कहा गया कि फुटपाथ भी तोड़ा जाएगा, जिससे भ्रम और क्षोभ और बढ़ गया।

व्यापारियों की आपबीती

सोडाला क्षेत्र के दुकानदार रमेश ने बताया कि उनकी जगह अधिकृत है और उनके पास सोसाइटी का विधिवत पट्टा मौजूद है। उन्होंने कहा, 'हमारी माँग सिर्फ इतनी है कि अगर जेडीए यह कह रहा है कि हमारा निर्माण अतिक्रमण है, तो वह इसका प्रमाण दे। हमें बताया जाए कि अतिक्रमण कैसे हुआ? हमारे पास जगह के सभी कागजात और पट्टा है।'

रमेश ने यह भी तर्क दिया कि अतिक्रमण तब माना जाता है जब कोई अवैध कब्जा हो, जबकि उनके पास सभी दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने जेडीए से लिखित प्रमाण माँगने की बात कही।

महिला दुकानदारों की पीड़ा

कार्रवाई से प्रभावित एक महिला दुकानदार ने रोते हुए बताया कि इस तोड़फोड़ के कारण उनका बच्चा बेरोजगार हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सही तरीके से निशान भी नहीं लगाए और पूरी प्रक्रिया मनमाने ढंग से अपनाई गई। उनके शब्दों में, 'अभी बोलेंगे तब भी टूटेगी, नहीं बोलेंगे तब भी टूटेगी। पहले ही हमारा इतना नुकसान हो चुका है। बच्चे बेरोजगार हो गए हैं।'

एक अन्य पीड़ित महिला ने कहा कि यदि पहले से स्पष्ट जानकारी मिलती तो वे तैयारी कर लेतीं। उन्होंने बताया, 'पहले बोला गया कि 7 फीट निर्माण हटेगा, इसलिए हमने खुद ही बिल्डिंग तोड़ दी। सही नाप लेकर पूरी जानकारी देनी चाहिए थी। अब हमारा लाखों रुपये का नुकसान हो गया।'

आम जनता पर असर

यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब राजस्थान में शहरी विकास परियोजनाओं के नाम पर छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी का मुद्दा लगातार उठता रहा है। गौरतलब है कि जेडीए जैसी संस्थाओं पर पारदर्शिता और उचित मुआवजे की माँग पहले भी उठती रही है।

प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और आजीविका पर सीधा संकट आ गया है। उनकी माँग है कि यदि तोड़ना ही है तो एक बार में स्पष्ट माप के साथ तोड़ा जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।

क्या होगा आगे

व्यापारियों ने संकेत दिया है कि वे अपने पट्टे और दस्तावेज़ों के आधार पर कानूनी राहत लेने पर विचार कर रहे हैं। जेडीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह प्रक्रियागत पारदर्शिता के सिद्धांत की भी खुली अवहेलना है। माप की अनिश्चितता और पूर्व सूचना का अभाव बताता है कि योजना या तो कमज़ोर थी या क्रियान्वयन में जानबूझकर लापरवाही बरती गई। मुख्यधारा की कवरेज इसे महज 'अतिक्रमण कार्रवाई' बताकर आगे बढ़ जाती है — असली खबर यह है कि जब तंत्र गलत हो तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेडीए ने जयपुर में बुलडोजर कार्रवाई क्यों की?
जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने न्यू सांगानेर रोड पर सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाने का हवाला देते हुए यह कार्रवाई की। जेडीए का कहना है कि यह अभियान सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक के खंड में चलाया गया।
क्या तोड़ी गई दुकानों के पास वैध दस्तावेज़ थे?
प्रभावित व्यापारियों का दावा है कि उनके पास सोसाइटी के विधिवत पट्टे और सभी आवश्यक कागजात मौजूद हैं। उन्होंने जेडीए से लिखित प्रमाण माँगा है कि उनका निर्माण किस आधार पर अतिक्रमण माना गया।
व्यापारियों को कितना नुकसान हुआ है?
प्रभावित दुकानदारों के अनुसार उन्हें लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। कुछ परिवारों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हुई है और परिवार के सदस्य बेरोजगार हो गए हैं।
माप को लेकर क्या विवाद है?
व्यापारियों का कहना है कि अधिकारियों ने पहले कहा था कि केवल 7 फीट तक निर्माण हटाया जाएगा, जिसके बाद कुछ दुकानदारों ने खुद अपना हिस्सा तोड़ लिया। बाद में फुटपाथ तोड़ने की बात भी उठी, जिससे पर्याप्त पूर्व सूचना न मिलने पर सवाल उठे हैं।
व्यापारियों का आगे क्या इरादा है?
प्रभावित व्यापारी अपने पट्टों और दस्तावेज़ों के आधार पर कानूनी राहत लेने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी हस्तक्षेप की माँग की है और जेडीए से एकमुश्त स्पष्ट कार्रवाई की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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