जयपुर: जेडीए के बुलडोजर से न्यू सांगानेर रोड पर दुकानें ध्वस्त, पट्टाधारी व्यापारियों में भारी आक्रोश
सारांश
मुख्य बातें
जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने 5 अक्टूबर 2026 को न्यू सांगानेर रोड पर सोडाला तिराहे से गुर्जर की थड़ी तक सड़क चौड़ीकरण के नाम पर बुलडोजर चलाया, जिससे दर्जनों दुकानें और निर्माण ध्वस्त हो गए। प्रभावित व्यापारियों का आरोप है कि उनके पास वैध पट्टे और सभी कागजात मौजूद हैं, फिर भी उनकी संपत्ति को अतिक्रमण बताकर तोड़ा गया।
मुख्य घटनाक्रम
जेडीए की यह कार्रवाई न्यू सांगानेर रोड पर अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत की गई। सोडाला तिराहे से लेकर गुर्जर की थड़ी तक के पूरे खंड में कई दुकानें और ढाँचे बुलडोजर की चपेट में आए। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि जेडीए ने कार्रवाई से पहले उन्हें न तो पर्याप्त नोटिस दिया और न ही स्पष्ट माप-सीमा बताई।
व्यापारियों के अनुसार, अधिकारियों ने पहले कहा था कि केवल 7 फीट तक निर्माण हटाया जाएगा, जिसके बाद कुछ दुकानदारों ने खुद अपनी दुकानों का हिस्सा तोड़ लिया। लेकिन बाद में यह भी कहा गया कि फुटपाथ भी तोड़ा जाएगा, जिससे भ्रम और क्षोभ और बढ़ गया।
व्यापारियों की आपबीती
सोडाला क्षेत्र के दुकानदार रमेश ने बताया कि उनकी जगह अधिकृत है और उनके पास सोसाइटी का विधिवत पट्टा मौजूद है। उन्होंने कहा, 'हमारी माँग सिर्फ इतनी है कि अगर जेडीए यह कह रहा है कि हमारा निर्माण अतिक्रमण है, तो वह इसका प्रमाण दे। हमें बताया जाए कि अतिक्रमण कैसे हुआ? हमारे पास जगह के सभी कागजात और पट्टा है।'
रमेश ने यह भी तर्क दिया कि अतिक्रमण तब माना जाता है जब कोई अवैध कब्जा हो, जबकि उनके पास सभी दस्तावेज़ उपलब्ध हैं। उन्होंने जेडीए से लिखित प्रमाण माँगने की बात कही।
महिला दुकानदारों की पीड़ा
कार्रवाई से प्रभावित एक महिला दुकानदार ने रोते हुए बताया कि इस तोड़फोड़ के कारण उनका बच्चा बेरोजगार हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने सही तरीके से निशान भी नहीं लगाए और पूरी प्रक्रिया मनमाने ढंग से अपनाई गई। उनके शब्दों में, 'अभी बोलेंगे तब भी टूटेगी, नहीं बोलेंगे तब भी टूटेगी। पहले ही हमारा इतना नुकसान हो चुका है। बच्चे बेरोजगार हो गए हैं।'
एक अन्य पीड़ित महिला ने कहा कि यदि पहले से स्पष्ट जानकारी मिलती तो वे तैयारी कर लेतीं। उन्होंने बताया, 'पहले बोला गया कि 7 फीट निर्माण हटेगा, इसलिए हमने खुद ही बिल्डिंग तोड़ दी। सही नाप लेकर पूरी जानकारी देनी चाहिए थी। अब हमारा लाखों रुपये का नुकसान हो गया।'
आम जनता पर असर
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब राजस्थान में शहरी विकास परियोजनाओं के नाम पर छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी का मुद्दा लगातार उठता रहा है। गौरतलब है कि जेडीए जैसी संस्थाओं पर पारदर्शिता और उचित मुआवजे की माँग पहले भी उठती रही है।
प्रभावित व्यापारियों का कहना है कि लाखों रुपये का नुकसान हुआ है और आजीविका पर सीधा संकट आ गया है। उनकी माँग है कि यदि तोड़ना ही है तो एक बार में स्पष्ट माप के साथ तोड़ा जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।
क्या होगा आगे
व्यापारियों ने संकेत दिया है कि वे अपने पट्टे और दस्तावेज़ों के आधार पर कानूनी राहत लेने पर विचार कर रहे हैं। जेडीए की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों से इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की जा रही है।