जया किशोरी बोलीं — जीत-हार खेल का हिस्सा, भारतीय महिला क्रिकेट टीम हमेशा मेरे दिल में विनर
सारांश
मुख्य बातें
आध्यात्मिक वक्ता और कथावाचक जया किशोरी ने 29 जून 2026 को मुंबई में कहा कि महिला टी20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया से मिली हार के बावजूद भारतीय महिला क्रिकेट टीम उनके लिए सदा विजेता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीत और हार खेल की स्वाभाविक प्रक्रिया है और टीम के प्रति समर्थन परिणाम पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
टीम के साथ हर हाल में
जया किशोरी ने कहा, 'भारतीय क्रिकेट टीम चाहे जीतें, चाहे हारें, हम तो अपनी टीम के साथ हैं। टीम चाहे पुरुष की हो या महिला की, भारत की टीम है और भारत की टीम के साथ मैं हमेशा हूं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग हार के तुरंत बाद निराशा या गुस्से में आ जाते हैं, उनके साथ मैच देखना उन्हें पसंद नहीं।
उनके अनुसार खेल का वास्तविक आनंद इसी में निहित है कि दोनों टीमें पूरी मेहनत और लगन से मैदान में उतरती हैं — परिणाम किसी एक के पक्ष में जाता है, परंतु प्रयास दोनों ओर से समान होते हैं। इसीलिए हर मैच के नतीजे को संतुलित दृष्टि से देखना आवश्यक है।
पिता की सीख और जीवन-दर्शन
जया किशोरी ने अपने पिता की शिक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में हर व्यक्ति को सब कुछ नहीं मिल सकता। उनका मानना है कि दूसरों की सफलता में प्रसन्न रहना और अपनी टीम के प्रयासों की सराहना करना ही परिपक्व सोच की निशानी है।
उन्होंने खिलाड़ियों की तुलना शेरनी से करते हुए कहा कि 'शेरनी तो शेरनी रहती है — कभी शांत, कभी दहाड़ती हैं, लेकिन उनकी पहचान नहीं बदलती।' उनके अनुसार यदि देश खिलाड़ियों के साथ खड़ा रहे तो वे जल्द ही आत्मविश्वास पुनः प्राप्त कर लेते हैं।
डिवाइन कॉन्सर्ट और युवाओं से जुड़ाव
जया किशोरी ने मुंबई में आयोजित अपने पहले डिवाइन कॉन्सर्ट के बारे में बताया कि इसमें सर्वाधिक संख्या 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग की रही। उन्होंने इसे संतोषजनक बताते हुए कहा कि यही वह पीढ़ी है जो समाज की दिशा तय करती है और जिसे सकारात्मक परिवर्तन की सबसे अधिक आवश्यकता है।
यह कॉन्सर्ट श्रृंखला आगे दिल्ली, जयपुर, हैदराबाद, लखनऊ और कोलकाता में भी आयोजित की जाएगी। भविष्य में इसे विदेशों तक ले जाने की भी योजना है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य युवाओं को आध्यात्मिकता से जोड़ना है और यह सिद्ध करना है कि आनंद के लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती।
भक्ति का अर्थ और सामाजिक भूमिका
जया किशोरी ने भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि इसका असली अर्थ बाहरी दिखावे में नहीं, बल्कि आंतरिक जुड़ाव में है। उनके अनुसार सच्ची भक्ति वह है जिसमें व्यक्ति के भीतर ईश्वर के प्रति विश्वास और नैतिकता का भाव जाग्रत हो, जिससे वह स्वयं ही अनुचित कार्यों से दूर रहे।
वे कथा, कॉन्सर्ट, लेखन और मोटिवेशनल सत्रों के माध्यम से समाज तक पहुँचने का प्रयास करती हैं। उन्होंने विनम्रतापूर्वक कहा कि वे स्वयं को ज्ञानी नहीं मानतीं — जो पढ़ती हैं, वही साझा करती हैं।
राम मंदिर चंदा विवाद पर संयमित रुख
जया किशोरी ने राम मंदिर चंदा विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा कि इस मामले में जाँच जारी है और अंतिम निर्णय आने के बाद ही कुछ कहना उचित होगा। उन्होंने कहा कि यह विषय धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है, इसलिए सावधानी और धैर्य आवश्यक है।
जया किशोरी का यह संदेश — कि समाज का सकारात्मक समर्थन किसी भी हार के प्रभाव को अल्पकालिक बना देता है — खेल और जीवन दोनों पर समान रूप से लागू होता है।