झारखंड में 7 लाख अनधिकृत भवनों के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च, जानें शुल्क और पात्रता

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
झारखंड में 7 लाख अनधिकृत भवनों के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च, जानें शुल्क और पात्रता

सारांश

झारखंड सरकार ने 25 साल की कोशिशों के बाद इस बार 'लिबरल पॉलिसी' के साथ अनधिकृत भवन नियमितीकरण का ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। करीब 7 लाख लोगों को राहत मिल सकती है — बशर्ते इस बार क्रियान्वयन पिछली योजनाओं से बेहतर साबित हो।

मुख्य बातें

नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने 14 मई 2026 को 'झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली-2026' का ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया।
राज्य के करीब 7 लाख लोग इस पोर्टल के ज़रिए अपने अनियमित भवनों को वैध कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
300 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल और 10 मीटर तक ऊँचाई वाले भवन, तथा जी प्लस 2 तक के आवासीय भवन पात्र होंगे।
आवासीय भवनों के लिए न्यूनतम शुल्क ₹10,000 और व्यावसायिक भवनों के लिए ₹20,000 ; राशि तीन किस्तों में जमा होगी।
नियमावली को झारखंड कैबिनेट ने 15 अप्रैल 2026 को मंजूरी दी थी।
सरकारी ज़मीन, जल निकाय, पार्किंग स्पेस और CNT-SPT अधिनियम उल्लंघन वाले भवन इस योजना से बाहर रहेंगे।

झारखंड सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित भवनों को वैध दर्जा दिलाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने गुरुवार, 14 मई 2026 को रांची में 'झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली-2026' के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य के करीब 7 लाख लोग अपने अनियमित भवनों को वैध कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।

योजना की पात्रता और दायरा

नियमावली के अंतर्गत 300 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल और 10 मीटर तक ऊँचाई वाले भवन नियमितीकरण के योग्य होंगे। इसके अलावा, जी प्लस 2 श्रेणी तक के आवासीय भवन भी इस योजना के दायरे में आएंगे। हालाँकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि, जल निकायों (टैंक बेड), पार्किंग स्पेस और CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन कर बनाई गई इमारतें किसी भी स्थिति में वैध नहीं की जाएंगी। न्यायालय में लंबित विवादित संपत्तियाँ भी इस राहत से बाहर रखी गई हैं।

शुल्क और भुगतान प्रक्रिया

नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने बताया कि आवासीय भवनों के नियमितीकरण के लिए न्यूनतम ₹10,000 और व्यावसायिक भवनों के लिए ₹20,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। यह राशि तीन किस्तों में जमा की जा सकती है, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को भी इसका लाभ उठाने में सुविधा होगी। ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।

सरकार की मंशा और पृष्ठभूमि

नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि पिछले 25-26 वर्षों में अनियमित भवनों के नियमितीकरण के कई प्रयास किए गए, लेकिन जनभागीदारी सीमित रही। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार एक 'लिबरल पॉलिसी' लेकर आई है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। गौरतलब है कि झारखंड कैबिनेट ने 15 अप्रैल 2026 को इस नियमावली को औपचारिक मंजूरी दी थी।

शहरी विकास पर असर

यह योजना ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में व्यवस्थित विकास और भवन अभिलेखों को दुरुस्त करने पर विशेष ज़ोर दे रही है। नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने स्वीकार किया कि पहले भी इस तरह की योजनाएँ लाई गई थीं, लेकिन वे अपेक्षित सफलता नहीं पा सकीं। आलोचकों का कहना है कि इस बार भी क्रियान्वयन की चुनौती बनी रहेगी, जब तक जागरूकता अभियान और ज़मीनी स्तर पर सहयोग सुनिश्चित नहीं किया जाता। सरकार ने नागरिकों से पोर्टल पर आवेदन कर अपने भवनों को नियमित कराने की अपील की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 25 वर्षों की विफलताओं की पृष्ठभूमि में इसे केवल 'लिबरल पॉलिसी' कहना पर्याप्त नहीं है — असली सवाल यह है कि इस बार जनभागीदारी क्यों बढ़ेगी। ऑनलाइन पोर्टल एक सकारात्मक कदम है, पर शहरी झारखंड में डिजिटल साक्षरता और इंटरनेट पहुँच की सीमाएँ आवेदन प्रक्रिया को जटिल बना सकती हैं। CNT-SPT और सरकारी ज़मीन पर बने भवनों को बाहर रखना ज़रूरी है, लेकिन इससे उन वंचित परिवारों की बड़ी संख्या प्रभावित होगी जो इन्हीं श्रेणियों में आते हैं। बिना व्यापक जागरूकता अभियान और ज़मीनी सहायता के, यह पोर्टल भी पिछली योजनाओं की तरह काग़ज़ी सफलता बनकर रह सकता है।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड अनधिकृत भवन नियमितीकरण पोर्टल क्या है?
यह झारखंड सरकार द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन पोर्टल है, जिसके ज़रिए राज्य के शहरी क्षेत्रों में बिना स्वीकृत नक्शे के बने भवनों को वैध दर्जा दिलाया जा सकता है। 'झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली-2026' के तहत करीब 7 लाख लोग इसका लाभ उठा सकते हैं।
इस योजना के तहत कौन से भवन नियमित हो सकते हैं?
300 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल, 10 मीटर तक ऊँचाई और जी प्लस 2 तक के आवासीय भवन इस योजना के पात्र हैं। सरकारी ज़मीन, जल निकाय, पार्किंग स्पेस, CNT-SPT अधिनियम उल्लंघन वाले और न्यायालय में लंबित विवादित भवन इस योजना से बाहर रखे गए हैं।
नियमितीकरण के लिए कितना शुल्क देना होगा?
आवासीय भवनों के लिए न्यूनतम ₹10,000 और व्यावसायिक भवनों के लिए ₹20,000 शुल्क निर्धारित है। यह राशि तीन किस्तों में जमा की जा सकती है।
झारखंड कैबिनेट ने इस नियमावली को कब मंजूरी दी?
झारखंड कैबिनेट ने 15 अप्रैल 2026 को 'झारखंड रेगुलराइजेशन ऑफ अनऑथराइज्ड कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग रूल, 2026' को औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके बाद 14 मई 2026 को ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया गया।
पिछली नियमितीकरण योजनाएँ क्यों विफल रहीं और इस बार क्या अलग है?
नगर विकास सचिव सुनील कुमार के अनुसार, पहले की योजनाएँ अपेक्षित सफलता नहीं पा सकीं क्योंकि जनभागीदारी सीमित रही। इस बार ऑनलाइन पोर्टल, किस्तों में शुल्क भुगतान और 'लिबरल पॉलिसी' के ज़रिए अधिक लोगों तक पहुँचने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 4 सप्ताह पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले