झारखंड में 7 लाख अनधिकृत भवनों के नियमितीकरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च, जानें शुल्क और पात्रता
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित भवनों को वैध दर्जा दिलाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने गुरुवार, 14 मई 2026 को रांची में 'झारखंड अनाधिकृत निर्मित भवन नियमितीकरण नियमावली-2026' के ऑनलाइन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से राज्य के करीब 7 लाख लोग अपने अनियमित भवनों को वैध कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
योजना की पात्रता और दायरा
नियमावली के अंतर्गत 300 वर्गमीटर तक क्षेत्रफल और 10 मीटर तक ऊँचाई वाले भवन नियमितीकरण के योग्य होंगे। इसके अलावा, जी प्लस 2 श्रेणी तक के आवासीय भवन भी इस योजना के दायरे में आएंगे। हालाँकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि, जल निकायों (टैंक बेड), पार्किंग स्पेस और CNT-SPT अधिनियम का उल्लंघन कर बनाई गई इमारतें किसी भी स्थिति में वैध नहीं की जाएंगी। न्यायालय में लंबित विवादित संपत्तियाँ भी इस राहत से बाहर रखी गई हैं।
शुल्क और भुगतान प्रक्रिया
नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने बताया कि आवासीय भवनों के नियमितीकरण के लिए न्यूनतम ₹10,000 और व्यावसायिक भवनों के लिए ₹20,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। यह राशि तीन किस्तों में जमा की जा सकती है, जिससे आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को भी इसका लाभ उठाने में सुविधा होगी। ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
सरकार की मंशा और पृष्ठभूमि
नगर विकास मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि पिछले 25-26 वर्षों में अनियमित भवनों के नियमितीकरण के कई प्रयास किए गए, लेकिन जनभागीदारी सीमित रही। उन्होंने कहा कि इस बार सरकार एक 'लिबरल पॉलिसी' लेकर आई है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। गौरतलब है कि झारखंड कैबिनेट ने 15 अप्रैल 2026 को इस नियमावली को औपचारिक मंजूरी दी थी।
शहरी विकास पर असर
यह योजना ऐसे समय में आई है जब राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में व्यवस्थित विकास और भवन अभिलेखों को दुरुस्त करने पर विशेष ज़ोर दे रही है। नगर विकास सचिव सुनील कुमार ने स्वीकार किया कि पहले भी इस तरह की योजनाएँ लाई गई थीं, लेकिन वे अपेक्षित सफलता नहीं पा सकीं। आलोचकों का कहना है कि इस बार भी क्रियान्वयन की चुनौती बनी रहेगी, जब तक जागरूकता अभियान और ज़मीनी स्तर पर सहयोग सुनिश्चित नहीं किया जाता। सरकार ने नागरिकों से पोर्टल पर आवेदन कर अपने भवनों को नियमित कराने की अपील की है।