जितेंद्र सिंह का जन्मदिन: डोडा के सुदूर गांव से मोदी मंत्रिमंडल तक, गुलाम नबी आजाद को पहले चुनाव में 60 हजार वोटों से हराया
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का राजनीतिक सफर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी ज़िले डोडा के एक सुदूर गांव 'कलोटा' से शुरू होकर नई दिल्ली के सत्ता-केंद्र तक पहुँचा है — एक ऐसा सफर जो चिकित्सा विज्ञान से राष्ट्रीय राजनीति तक फैला है। 6 नवंबर 1956 को जन्मे जितेंद्र सिंह ने 26 मई 2014 को केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में शपथ ली और तब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीनों कार्यकालों में मंत्रिमंडल का हिस्सा बने हुए हैं।
राजनीतिक उदय और पहली बड़ी जीत
2014 के लोकसभा चुनाव में जितेंद्र सिंह जम्मू-कश्मीर की उधमपुर सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे। उनके सामने थे तत्कालीन वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद — एक बड़ा और अनुभवी नाम। जितेंद्र सिंह ने इस मुकाबले में 60 हजार से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज कर राजनीतिक जगत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। तब से वे उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र का लगातार प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
गौरतलब है कि इस जीत में एक दिलचस्प मोड़ भी है — इससे पहले तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के रूप में गुलाम नबी आजाद ने ही जितेंद्र सिंह को चिकित्सा क्षेत्र में योगदान के लिए जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (JIPMER) का स्वर्ण पदक प्रदान किया था। वही आजाद जितेंद्र सिंह के पहले चुनावी प्रतिद्वंद्वी बने और परास्त हुए।
मोदी सरकार में भूमिका और विभाग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता संभालने के बाद जितेंद्र सिंह को न केवल मंत्रिमंडल में स्थान दिया, बल्कि जम्मू-कश्मीर में विकास कार्यों को नई दिशा देने का दायित्व भी सौंपा। एक दशक से अधिक की यह निरंतरता मोदी और जितेंद्र सिंह के बीच की राजनीतिक विश्वसनीयता को दर्शाती है।
वर्तमान में जितेंद्र सिंह विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त वे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में भी राज्यमंत्री की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
चिकित्सा से राजनीति तक: शैक्षणिक पृष्ठभूमि
जितेंद्र सिंह ने 1978 में यूनिवर्सिटी ऑफ मद्रास (चेन्नई) से MBBS की डिग्री हासिल की और 1984 में जम्मू के सरकारी मेडिकल कॉलेज से MD की उपाधि प्राप्त की। वे मधुमेह (डायबिटीज) और एंडोक्रिनोलॉजी के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञ हैं। उन्होंने मधुमेह रोगियों के लिए कई पुस्तकें लिखीं, जिनमें से 'डायबिटीज मेड ईजी' विशेष रूप से चर्चित रही। 2002 के दिल्ली पुस्तक मेले में इस पुस्तक ने बिक्री के रिकॉर्ड तोड़े।
वे कई प्रमुख राष्ट्रीय और दक्षिण एशियाई मधुमेह सम्मेलनों में आमंत्रित विशेषज्ञ के रूप में शामिल होते रहे हैं। JIPMER का स्वर्ण पदक उनके चिकित्सा क्षेत्र में योगदान की एक बड़ी पहचान रही है।
विज्ञान, अंतरिक्ष और प्रशासनिक सुधारों में योगदान
केंद्रीय मंत्री के रूप में जितेंद्र सिंह ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान कार्यक्रमों, वैज्ञानिक संस्थानों और लोक प्रशासन में सुधारों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई है। जम्मू-कश्मीर और देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास के लिए उनके प्रयासों को भी व्यापक सम्मान मिला है।
यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब उधमपुर सीट पर भाजपा की पकड़ को जम्मू-कश्मीर की बदलती राजनीति में एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है। आने वाले वर्षों में उनकी भूमिका और नीतिगत प्रभाव पर सभी की नजर बनी रहेगी।