18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जेएनयू में आरएसएस का पथ संचलन: भाजपा ने बताया 'ऐतिहासिक', कांग्रेस-AAP ने जताई तीखी आपत्ति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जेएनयू में आरएसएस का पथ संचलन: भाजपा ने बताया 'ऐतिहासिक', कांग्रेस-AAP ने जताई तीखी आपत्ति

सारांश

जेएनयू परिसर में RSS का विजयादशमी पथ संचलन राजनीतिक तूफान लेकर आया है। भाजपा सांसद प्रकाश पाल ने इसे 'बदलते भारत का संकेत' बताया, तो AAP के संजय सिंह और कांग्रेस के वी. हनुमंत राव ने शिक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई। यह पहली बार है जब RSS ने JNU परिसर में औपचारिक पथ संचलन किया।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने 18 अक्टूबर 2026 को जेएनयू परिसर में विजयादशमी उत्सव पर पहली बार पथ संचलन आयोजित किया।
भाजपा राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने इसे 'सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत' बताया।
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा — 'सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही।' कांग्रेस नेता वी.
हनुमंत राव ने आयोजन को 'खतरनाक' बताया और शिक्षा व्यवस्था बिगड़ने की चेतावनी दी।
यह आयोजन 2016 के जेएनयू देशद्रोह विवाद के बाद से चली आ रही वैचारिक खींचतान का नया अध्याय है।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा 18 अक्टूबर 2026 को पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने देशभर में राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे राष्ट्रवाद की मजबूती का प्रतीक बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे शैक्षणिक परिसर की स्वायत्तता के लिए खतरा मान रहे हैं।

भाजपा की प्रतिक्रिया: 'बदलते जेएनयू का संकेत'

लखनऊ में भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने इस पथ संचलन का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे 'सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत' करार दिया।

पाल ने कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रवादी संगठनों ने पहली बार ऐसी जगह पर पथ संचलन किया है, जहां कभी 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह-इंशाल्लाह' जैसे देश-विरोधी नारे लगाए जाते थे। जेएनयू की वही ज़मीन, जहाँ से कभी देश को तोड़ने की बातें उठती थीं, आज वहाँ राष्ट्रवाद का संचलन हो रहा है। यह बदलते भारत और बदलते जेएनयू का संकेत है।'

आप की प्रतिक्रिया: 'सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही'

दिल्ली से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस आयोजन पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार और पुलिस का संरक्षण मिलने पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।

संजय सिंह ने कहा, 'जब सरकार सुरक्षा देती है, तो हर तरह के कार्यक्रम होते हैं। उन्हें हर जगह पुलिस और सरकार की सुरक्षा मिली हुई है। इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही।'

कांग्रेस की चेतावनी: 'शिक्षा व्यवस्था पर खतरा'

हैदराबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने RSS के इस पथ संचलन को 'खतरनाक' बताया। उनका कहना है कि पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से काम होता था, अब सीधे RSS की उपस्थिति बढ़ रही है।

हनुमंत राव ने आगे कहा, 'इससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होगी। जेएनयू में इसकी शुरुआत हो रही है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खराब हो जाएगी और छात्र कभी भी कैंपस में हंगामा कर सकते हैं।'

व्यापक परिप्रेक्ष्य

गौरतलब है कि जेएनयू दशकों से वैचारिक बहस का केंद्र रहा है। 2016 में परिसर में देशद्रोह के कथित नारों को लेकर हुए विवाद के बाद से यह विश्वविद्यालय राजनीतिक संघर्ष का अखाड़ा बनता रहा है। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और परिसर की स्वायत्तता को लेकर बहस तेज हो रही है।

यह पहली बार है जब RSS ने JNU परिसर के भीतर औपचारिक रूप से पथ संचलन आयोजित किया है — एक कदम जिसे समर्थक ऐतिहासिक मानते हैं और आलोचक एक सुनियोजित रणनीति।

आगे क्या होगा

इस घटनाक्रम के बाद जेएनयू छात्र संघ और विभिन्न राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आने वाले दिनों में परिसर के भीतर तनाव और राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसकी काट में विपक्ष 'शिक्षा के भगवाकरण' का आख्यान खड़ा कर रहा है — और दोनों पक्ष तथ्य से ज़्यादा प्रतीकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। असली सवाल यह है कि क्या किसी भी संगठन — चाहे वह RSS हो या कोई अन्य — को विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक गतिविधि के लिए प्रशासनिक संरक्षण मिलना चाहिए, और यह निर्णय किस आधार पर होता है। मुख्यधारा की कवरेज पक्ष-विपक्ष के बयानों तक सिमट जाती है; जो अनुत्तरित रहता है वह है विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका और परिसर के भीतर छात्रों पर इसका वास्तविक असर।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेएनयू में RSS का पथ संचलन क्या है और यह कब हुआ?
18 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में पथ संचलन आयोजित किया। यह पहली बार बताया जा रहा है जब RSS ने JNU के भीतर इस तरह का औपचारिक आयोजन किया।
भाजपा ने जेएनयू पथ संचलन पर क्या कहा?
भाजपा राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने इसे 'सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत' बताया। उन्होंने कहा कि यह बदलते भारत और बदलते जेएनयू का प्रतीक है, जहाँ कभी देश-विरोधी नारे लगते थे, अब वहाँ राष्ट्रवाद का संचलन हो रहा है।
AAP और कांग्रेस ने इस आयोजन का विरोध क्यों किया?
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह आयोजन सरकार और पुलिस के संरक्षण की वजह से संभव हुआ। कांग्रेस नेता वी. हनुमंत राव ने इसे 'खतरनाक' बताते हुए शिक्षा व्यवस्था बिगड़ने और कानून-व्यवस्था की समस्या की चेतावनी दी।
जेएनयू पहले से विवादों में क्यों रहा है?
2016 में JNU परिसर में कथित देशद्रोही नारों को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद हुआ था, जिसने वामपंथी छात्र राजनीति और सरकार के बीच टकराव को उजागर किया था। तब से यह विश्वविद्यालय वैचारिक और राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है।
इस आयोजन का जेएनयू की शिक्षा व्यवस्था पर क्या असर पड़ सकता है?
विपक्षी नेताओं के अनुसार, RSS जैसे संगठनों की सीधी उपस्थिति परिसर में वैचारिक तनाव बढ़ा सकती है। हालाँकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन करना अभी शेष है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 घंटे पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 9 महीने पहले