जेएनयू में आरएसएस का पथ संचलन: भाजपा ने बताया 'ऐतिहासिक', कांग्रेस-AAP ने जताई तीखी आपत्ति
सारांश
मुख्य बातें
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा 18 अक्टूबर 2026 को पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन ने देशभर में राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है — भारतीय जनता पार्टी (BJP) इसे राष्ट्रवाद की मजबूती का प्रतीक बता रही है, जबकि विपक्षी दल इसे शैक्षणिक परिसर की स्वायत्तता के लिए खतरा मान रहे हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया: 'बदलते जेएनयू का संकेत'
लखनऊ में भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने इस पथ संचलन का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे 'सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत' करार दिया।
पाल ने कहा, 'यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रवादी संगठनों ने पहली बार ऐसी जगह पर पथ संचलन किया है, जहां कभी 'भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह-इंशाल्लाह' जैसे देश-विरोधी नारे लगाए जाते थे। जेएनयू की वही ज़मीन, जहाँ से कभी देश को तोड़ने की बातें उठती थीं, आज वहाँ राष्ट्रवाद का संचलन हो रहा है। यह बदलते भारत और बदलते जेएनयू का संकेत है।'
आप की प्रतिक्रिया: 'सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही'
दिल्ली से आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने इस आयोजन पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार और पुलिस का संरक्षण मिलने पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित किया जा सकता है।
संजय सिंह ने कहा, 'जब सरकार सुरक्षा देती है, तो हर तरह के कार्यक्रम होते हैं। उन्हें हर जगह पुलिस और सरकार की सुरक्षा मिली हुई है। इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है। सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही।'
कांग्रेस की चेतावनी: 'शिक्षा व्यवस्था पर खतरा'
हैदराबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने RSS के इस पथ संचलन को 'खतरनाक' बताया। उनका कहना है कि पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से काम होता था, अब सीधे RSS की उपस्थिति बढ़ रही है।
हनुमंत राव ने आगे कहा, 'इससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होगी। जेएनयू में इसकी शुरुआत हो रही है। इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खराब हो जाएगी और छात्र कभी भी कैंपस में हंगामा कर सकते हैं।'
व्यापक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि जेएनयू दशकों से वैचारिक बहस का केंद्र रहा है। 2016 में परिसर में देशद्रोह के कथित नारों को लेकर हुए विवाद के बाद से यह विश्वविद्यालय राजनीतिक संघर्ष का अखाड़ा बनता रहा है। यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब देशभर के विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति और परिसर की स्वायत्तता को लेकर बहस तेज हो रही है।
यह पहली बार है जब RSS ने JNU परिसर के भीतर औपचारिक रूप से पथ संचलन आयोजित किया है — एक कदम जिसे समर्थक ऐतिहासिक मानते हैं और आलोचक एक सुनियोजित रणनीति।
आगे क्या होगा
इस घटनाक्रम के बाद जेएनयू छात्र संघ और विभिन्न राजनीतिक संगठनों की प्रतिक्रियाएँ सामने आने की संभावना है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। आने वाले दिनों में परिसर के भीतर तनाव और राजनीतिक गतिविधियों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।