इंद्रेश कुमार का बयान: देवी-देवताओं की तस्वीरों का दुरुपयोग पाप और अपराध, विपक्ष को बचना चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मीडिया से बातचीत में पोस्टरों में विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में चित्रित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'अधार्मिक, पापपूर्ण और आपराधिक' कृत्य बताया। उन्होंने साथ ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में RSS के पथ संचलन को राष्ट्रीयता की दिशा में एक 'अच्छी शुरुआत' करार दिया।
देवी-देवताओं की तस्वीरों पर इंद्रेश कुमार का कड़ा रुख
इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देवी-देवताओं की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करना अधार्मिक, पापपूर्ण और एक अपराध है। इसलिए, विपक्षी नेताओं को ऐसे अधार्मिक, पापपूर्ण और आपराधिक कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए।' उनकी यह टिप्पणी उन पोस्टरों के संदर्भ में आई, जिनमें कतिपय विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के स्वरूप में दर्शाया गया था।
JNU में RSS पथ संचलन पर प्रतिक्रिया
जेएनयू में पहली बार आयोजित RSS के पथ संचलन पर इंद्रेश कुमार ने कहा, 'भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर लोग अराजकता छोड़कर लोकतंत्र को अपनाते हैं, तो JNU के अंदर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन होना कोई हैरानी की बात नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि अराजक तत्वों को वह रास्ता अपनाना चाहिए जो संविधान को सुदृढ़ करे, न कि उसे कमज़ोर करे।
विजयादशमी पर JNU में पथ संचलन
गौरतलब है कि RSS की JNU इकाई ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर शनिवार, 17 अक्टूबर को परिसर में पथ संचलन आयोजित किया। स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया और अनुशासन, संगठन एवं सामूहिकता का प्रदर्शन किया। यह JNU परिसर में RSS का पहला ऐसा आयोजन बताया जा रहा है, जो परंपरागत रूप से वामपंथी छात्र राजनीति का केंद्र रहा है।
सामाजिक सौहार्द पर इंद्रेश कुमार का पुराना बयान
यह ऐसे समय में आया है जब 9 अक्टूबर को इंद्रेश कुमार ने सर्वधर्म सद्भाव पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि खुदा, अल्लाह, ईश्वर, परमेश्वर और गॉड को मानने वाले सभी लोगों का मूल सत्य एक है — वे इंसान हैं। उनके अनुसार, भारत के 99 प्रतिशत से अधिक मुसलमान न तो विदेशी हैं और न ही पराए, बल्कि वे इसी देश के अभिन्न अंग हैं।
उन्होंने यह भी कहा था कि हर व्यक्ति को अपने तरीके से उपासना करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और आपसी सहयोग व सद्भाव से 'दंगा-मुक्त भारत' का निर्माण किया जा सकता है। इंद्रेश कुमार की यह टिप्पणी RSS के उस व्यापक एजेंडे की झलक देती है जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को सामाजिक एकता के साथ जोड़ने की कोशिश करता है।
आगे क्या
विपक्ष की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। JNU में RSS के पथ संचलन और इंद्रेश कुमार के इन बयानों से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, विशेष रूप से आगामी चुनावी मौसम को देखते हुए।