18 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इंद्रेश कुमार का बयान: देवी-देवताओं की तस्वीरों का दुरुपयोग पाप और अपराध, विपक्ष को बचना चाहिए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इंद्रेश कुमार का बयान: देवी-देवताओं की तस्वीरों का दुरुपयोग पाप और अपराध, विपक्ष को बचना चाहिए

सारांश

RSS की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में चित्रित करने को 'पाप और अपराध' बताया। साथ ही JNU में पहली बार हुए RSS पथ संचलन को 'राष्ट्रीयता की नींव' करार दिया। यह बयान राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों मोर्चों पर बहस छेड़ सकता है।

मुख्य बातें

RSS की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में दिखाने को 'अधार्मिक, पापपूर्ण और आपराधिक' करार दिया।
JNU में विजयादशमी के अवसर पर RSS का पहला पथ संचलन आयोजित हुआ; इंद्रेश कुमार ने इसे 'अच्छी शुरुआत' बताया।
इंद्रेश कुमार ने अराजक तत्वों से संविधान-सम्मत लोकतंत्र का रास्ता अपनाने का आह्वान किया।
9 अक्टूबर को उन्होंने कहा था कि भारत के 99 प्रतिशत से अधिक मुसलमान देश के अभिन्न हिस्से हैं; सर्वधर्म सद्भाव पर जोर दिया।
विपक्ष की ओर से इस बयान पर अभी कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने 18 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में मीडिया से बातचीत में पोस्टरों में विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में चित्रित किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे 'अधार्मिक, पापपूर्ण और आपराधिक' कृत्य बताया। उन्होंने साथ ही जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में RSS के पथ संचलन को राष्ट्रीयता की दिशा में एक 'अच्छी शुरुआत' करार दिया।

देवी-देवताओं की तस्वीरों पर इंद्रेश कुमार का कड़ा रुख

इंद्रेश कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'देवी-देवताओं की तस्वीरों का गलत इस्तेमाल करना अधार्मिक, पापपूर्ण और एक अपराध है। इसलिए, विपक्षी नेताओं को ऐसे अधार्मिक, पापपूर्ण और आपराधिक कार्यों में शामिल नहीं होना चाहिए।' उनकी यह टिप्पणी उन पोस्टरों के संदर्भ में आई, जिनमें कतिपय विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के स्वरूप में दर्शाया गया था।

JNU में RSS पथ संचलन पर प्रतिक्रिया

जेएनयू में पहली बार आयोजित RSS के पथ संचलन पर इंद्रेश कुमार ने कहा, 'भारत एक लोकतांत्रिक देश है। अगर लोग अराजकता छोड़कर लोकतंत्र को अपनाते हैं, तो JNU के अंदर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का पथ संचलन होना कोई हैरानी की बात नहीं है।' उन्होंने यह भी कहा कि अराजक तत्वों को वह रास्ता अपनाना चाहिए जो संविधान को सुदृढ़ करे, न कि उसे कमज़ोर करे।

विजयादशमी पर JNU में पथ संचलन

गौरतलब है कि RSS की JNU इकाई ने विजयादशमी उत्सव के अवसर पर शनिवार, 17 अक्टूबर को परिसर में पथ संचलन आयोजित किया। स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में भाग लिया और अनुशासन, संगठन एवं सामूहिकता का प्रदर्शन किया। यह JNU परिसर में RSS का पहला ऐसा आयोजन बताया जा रहा है, जो परंपरागत रूप से वामपंथी छात्र राजनीति का केंद्र रहा है।

सामाजिक सौहार्द पर इंद्रेश कुमार का पुराना बयान

यह ऐसे समय में आया है जब 9 अक्टूबर को इंद्रेश कुमार ने सर्वधर्म सद्भाव पर भी जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि खुदा, अल्लाह, ईश्वर, परमेश्वर और गॉड को मानने वाले सभी लोगों का मूल सत्य एक है — वे इंसान हैं। उनके अनुसार, भारत के 99 प्रतिशत से अधिक मुसलमान न तो विदेशी हैं और न ही पराए, बल्कि वे इसी देश के अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि हर व्यक्ति को अपने तरीके से उपासना करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और आपसी सहयोग व सद्भाव से 'दंगा-मुक्त भारत' का निर्माण किया जा सकता है। इंद्रेश कुमार की यह टिप्पणी RSS के उस व्यापक एजेंडे की झलक देती है जो सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को सामाजिक एकता के साथ जोड़ने की कोशिश करता है।

आगे क्या

विपक्ष की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। JNU में RSS के पथ संचलन और इंद्रेश कुमार के इन बयानों से राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है, विशेष रूप से आगामी चुनावी मौसम को देखते हुए।

संपादकीय दृष्टिकोण

और दूसरी तरफ JNU जैसे परंपरागत रूप से वामपंथी परिसर में RSS की उपस्थिति को 'सामान्य' बताने की कोशिश। असली सवाल यह है कि क्या यह बयान किसी विशेष दल की चुनावी रणनीति पर निशाना साधता है, जबकि 'देवी-देवताओं की तस्वीरों का दुरुपयोग' एक व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति है जो कई दलों में देखी जाती है। JNU में पथ संचलन को 'लोकतंत्र की जीत' बताना एक सोची-समझी फ्रेमिंग है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि परिसर में बाकी छात्र संगठनों की क्या प्रतिक्रिया रही।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंद्रेश कुमार ने विपक्षी नेताओं पर क्या आरोप लगाया?
इंद्रेश कुमार ने कहा कि पोस्टरों में विपक्षी नेताओं को देवी-देवताओं के रूप में दिखाना 'अधार्मिक, पापपूर्ण और एक अपराध' है। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे ऐसे कार्यों से दूर रहें।
JNU में RSS का पथ संचलन क्यों महत्वपूर्ण है?
JNU परिसर ऐतिहासिक रूप से वामपंथी छात्र राजनीति का गढ़ रहा है। विजयादशमी 2026 के अवसर पर पहली बार RSS ने यहाँ पथ संचलन आयोजित किया, जिसे इंद्रेश कुमार ने 'राष्ट्रीयता की नींव' बताया।
इंद्रेश कुमार कौन हैं?
इंद्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। वे संगठन में वरिष्ठ पदाधिकारी हैं और सामाजिक सद्भाव तथा राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दों पर नियमित रूप से बयान देते रहते हैं।
इंद्रेश कुमार ने मुस्लिम समुदाय पर क्या कहा?
9 अक्टूबर को इंद्रेश कुमार ने कहा था कि भारत के 99 प्रतिशत से अधिक मुसलमान देश के अभिन्न अंग हैं — न विदेशी, न पराए। उन्होंने सर्वधर्म सद्भाव और आपसी सहयोग से 'दंगा-मुक्त भारत' बनाने का आह्वान किया था।
RSS के JNU पथ संचलन पर विपक्ष की क्या प्रतिक्रिया रही?
अभी तक विपक्ष की ओर से इस विशेष आयोजन या इंद्रेश कुमार के बयानों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक हलकों में इस पर बहस जारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 12 महीने पहले
  8. 1 साल पहले