जुड़ शीतल: परंपरा का अद्भुत मिलन, प्रकृति और आशीर्वाद का त्योहार

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जुड़ शीतल: परंपरा का अद्भुत मिलन, प्रकृति और आशीर्वाद का त्योहार

सारांश

जुड़ शीतल का त्योहार मिथिला में मनाया जाने वाला एक अनूठा पर्व है, जो प्रकृति के साथ-साथ घर की सुख-समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन बासी पानी का छिड़काव करके आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। जानें इस त्योहार का महत्व और इसके अनोखे रिवाज।

Key Takeaways

  • जुड़ शीतल त्योहार परंपरा और प्रकृति का संगम है।
  • इस दिन बासी पानी का छिड़काव किया जाता है।
  • यह त्योहार घर की सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
  • तुलसी के पौधे को विशेष सम्मान दिया जाता है।
  • 14 अप्रैल का खगोलीय महत्व भी है।

मुंबई, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आज पूरे देश में मेष संक्रांति, बैसाखी और विभिन्न राज्यों में नववर्ष के त्योहार का उत्सव मनाया जा रहा है।

बिहार में 14 अप्रैल को 'सतुआन' का पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है, जिसमें मौसमी आम का सेवन महत्वपूर्ण होता है। इस दिन किए गए दान का फल दोगुना मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सतुआन के एक दिन बाद बिहार के मिथिला क्षेत्र में 'जुड़ शीतल' का त्योहार मनाया जाता है? यह त्योहार प्रकृति में आए परिवर्तनों और घर की सुख-समृद्धि से संबंधित है।

मिथिला में जुड़ शीतल को नववर्ष की शुरुआत माना जाता है। इस दिन बासी पानी को बच्चों के सिर पर छिड़का जाता है, जो माता-पिता के आशीर्वाद के साथ गर्मी से बचने का उपाय भी है। यह त्योहार शांति, ठंडक की कामना और संतुलन का प्रतीक है। जुड़ शीतल प्रकृति से जुड़ने का भी पर्व है, जो पानी के संरक्षण और प्रकृति को सम्मानित करने की शिक्षा देता है।

इस दिन, घर की महिलाएं सुबह उठकर सभी सदस्यों पर पानी छिड़कती हैं और बच्चों को "जुरल रहू, जुराल रहू" का आशीर्वाद देती हैं। इसके साथ ही, घर में लगे पेड़ों पर भी ठंडा पानी छिड़का जाता है। खास बात यह है कि हिंदू धर्म में पवित्र माने जाने वाले तुलसी के पौधे पर मटका बांधकर ठंडा जल अर्पित किया जाता है। मटके के तले पर एक छेद किया जाता है, जिससे थोड़ा-थोड़ा पानी लगातार टपकता रहता है। इसे प्रकृति के प्रति प्रेम के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।

आपको बता दें कि 14 अप्रैल को सूर्य मीन राशि से मेष राशि में स्थानांतरित होता है। इस दिन से दिन बड़े होने लगते हैं और गर्मी अपनी तीव्रता दिखाना शुरू कर देती है। इसी दिन से वैशाख स्नान की शुरुआत होती है और हरिद्वार में कल्पवास का भी शुभारंभ होता है। यह खगोलीय घटना 14 अप्रैल को धार्मिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Point of View

बल्कि यह हमें प्रकृति के प्रति जागरूक भी करता है। परिवार और समाज के साथ मिलकर मनाया जाने वाला यह पर्व, हमारे जीवन में संतुलन और शांति लाने का कार्य करता है।
NationPress
14/04/2026

Frequently Asked Questions

जुड़ शीतल का त्योहार कब मनाया जाता है?
जुड़ शीतल का त्योहार हर साल 14 अप्रैल को मनाया जाता है।
जुड़ शीतल का क्या महत्व है?
यह त्योहार प्रकृति के प्रति प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि का प्रतीक है।
इस दिन क्या किया जाता है?
इस दिन बासी पानी का छिड़काव किया जाता है और तुलसी के पौधे पर ठंडा जल अर्पित किया जाता है।
क्या जुड़ शीतल को नववर्ष कहा जाता है?
हाँ, मिथिला में जुड़ शीतल को नववर्ष की शुरुआत माना जाता है।
इस दिन का खगोलीय महत्व क्या है?
14 अप्रैल को सूर्य का मीन राशि से मेष राशि में स्थानांतरण होता है, जिससे दिन बड़े होने लगते हैं।
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