11 जुलाई 2026
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क्या जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित तीन सदस्यीय पैनल में ये जज और वरिष्ठ अधिवक्ता हैं?

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क्या जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ गठित तीन सदस्यीय पैनल में ये जज और वरिष्ठ अधिवक्ता हैं?

सारांश

जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव के तहत गठित तीन सदस्यीय पैनल में कौन-कौन से जज और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं? जानिए इस पैनल की संरचना और जजों की भूमिका के बारे में। यह मामला भारतीय न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को प्रभावित कर सकता है।

मुख्य बातें

जस्टिस यशवंत वर्मा पर महाभियोग का प्रस्ताव पारित किया गया है।
तीन सदस्यीय पैनल मामले की जांच करेगा।
पैनल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति और वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हैं।
जांच का उद्देश्य न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बनाए रखना है।
यह मामला भारतीय न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण है।

नई दिल्ली, 12 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। 'कैश कांड' में संलिप्त जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद ने महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए इस पैनल की घोषणा की।

14 मार्च को यशवंत वर्मा के आवास पर आग लगी थी, जिसके दौरान भारी मात्रा में कैश की बरामदगी हुई। उस समय वे दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे। महाभियोग प्रस्ताव पर सत्तापक्ष और विपक्ष के कुल 146 लोकसभा सदस्यों ने हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने तीन सदस्यीय पैनल का गठन किया। इस पैनल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन, और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल हैं।

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार को फरवरी 2023 में सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था। इससे पहले, वे 2009 में कर्नाटक उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश बने और 2012 में स्थायी न्यायाधीश बने। 2021 से फरवरी 2023 तक, वे गुजरात उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत रहे। बेंगलुरु में अपनी शिक्षा पूरी करने वाले न्यायाधीश अरविंद कुमार ने 1987 में वकालत शुरू की और 1990 में कर्नाटक उच्च न्यायालय में स्थानांतरित हुए।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव जुलाई में मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने 1987 में वकालत शुरू की और जनवरी 2005 में वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त हुए। दिसंबर 2009 में उन्हें छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। फिर वे 2021 में राजस्थान उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बने।

वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य 2019 से अंतर्राष्ट्रीय न्यायविद आयोग के कर्नाटक खंड के अध्यक्ष हैं। उडुपी के बेलपु गांव में जन्मे बी.वी. आचार्य ने 1957 में अधिवक्ता के रूप में नामांकन कराया और मंगलुरु में वकालत शुरू की। 1972 में वे कर्नाटक उच्च न्यायालय चले गए और 1989 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त किया गया। बी.वी. आचार्य 1989 से 2012 के बीच 5 बार कर्नाटक के महाधिवक्ता रहे।

2005 में, वे तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विशेष लोक अभियोजक थे और उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की पैरवी की थी। मैंगलोर विश्वविद्यालय ने उन्हें 2009 में डॉक्टरेट की मानद उपाधि से सम्मानित किया। वे भारत के 19वें विधि आयोग (2010-2012) में कार्यरत रहे और 2017 में उन्हें लॉयर्स ऑफ इंडिया डे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि यह मामला भारतीय न्यायपालिका की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। हमें उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जस्टिस यशवंत वर्मा पर आरोप क्या हैं?
जस्टिस यशवंत वर्मा पर 'कैश कांड' में संलिप्त होने का आरोप है, जिससे उनकी न्यायपालिका की छवि प्रभावित हो रही है।
तीन सदस्यीय पैनल में कौन-कौन शामिल हैं?
इस पैनल में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार, मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश मनिंदर मोहन, और वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल हैं।
महाभियोग प्रस्ताव का क्या महत्व है?
महाभियोग प्रस्ताव न्यायपालिका की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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