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एशियन बीच गेम्स: सान्या की रेत पर भारतीय कबड्डी टीमों का जोश और जज्बा

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एशियन बीच गेम्स: सान्या की रेत पर भारतीय कबड्डी टीमों का जोश और जज्बा

सारांश

छठवें एशियन बीच गेम्स में सान्या की रेत पर भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमें देश के लिए पदक जीतने के संकल्प के साथ मैदान में हैं। कोच राकेश कुमार और तेजस्विनी बाई की अगुवाई में टीमें फिटनेस, रणनीति और मानसिक मजबूती के दम पर ईरान, पाकिस्तान जैसी टीमों को चुनौती देने को तैयार हैं।

मुख्य बातें

छठे एशियन बीच गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमें सान्या, चीन में प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
पुरुष टीम के कोच राकेश कुमार ने बताया कि रेत पर संतुलन, ताकत और रणनीति तीनों एक साथ जरूरी हैं।
महिला टीम की कोच तेजस्विनी बाई की रणनीति तेज गति और टीमवर्क पर केंद्रित है।
ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं जो लगातार मजबूत हो रहे हैं।
खिलाड़ी निकिता चौहान ने कहा कि वे उन लड़कियों के लिए भी खेलती हैं जो उन्हें देखकर सपने देखती हैं।
दोनों टीमों का एकमात्र लक्ष्य भारत के लिए पदक जीतना और देश का नाम रोशन करना है।

सान्या (चीन), 25 अप्रैल। छठवें एशियन बीच गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमें सान्या के समुद्री तटों पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रेत पर खेली जाने वाली इस विशेष प्रतियोगिता में भारतीय खिलाड़ियों ने न केवल अपनी फिटनेस और रणनीति को धार दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का परचम लहराने का संकल्प भी दोहराया है। खिलाड़ियों से हुई बातचीत में खेल, संस्कृति और देशप्रेम का अनूठा संगम देखने को मिला।

रेत पर कबड्डी: पारंपरिक खेल की नई चुनौती

भारतीय पुरुष टीम के कोच राकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि बीच कबड्डी और पारंपरिक कबड्डी में मूलभूत अंतर है। यहां खिलाड़ियों को कठोर जमीन की बजाय रेत पर संतुलन, शारीरिक बल और सामरिक सूझबूझ का एक साथ प्रदर्शन करना होता है।

खिलाड़ी जितेंद्र यादव ने बताया कि रेत पर हर कदम धंसता है और हर दौड़ में सामान्य से अधिक ऊर्जा खर्च होती है। उनके अनुसार, रेड के दौरान संतुलन बनाए रखना एक अलग ही कौशल की मांग करता है जो मैदानी कबड्डी से बिल्कुल अलग है।

एक अन्य खिलाड़ी भानु प्रताप तोमर ने कहा कि सान्या के तट पर लहरों की गूंज, हल्की समुद्री नमी और मुलायम रेत मिलकर खेल को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना देते हैं, लेकिन यही माहौल उन्हें एक अलग ऊर्जा भी देता है।

खिलाड़ियों की रणनीति और मानसिक मजबूती

टीम के रेडर यथार्थ देशवाल ने जोर देकर कहा कि बीच कबड्डी में केवल शारीरिक ताकत से काम नहीं चलता — यहां मानसिक धैर्य और त्वरित निर्णय क्षमता उतनी ही जरूरी है। उनके मुताबिक रेत पर हर सेकंड खिलाड़ी की परीक्षा लेता है।

अनुभवी खिलाड़ी ब्रिजेंद्र चौधरी ने बताया कि एशियाई स्तर पर प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक कठिन हो गई है। ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश की टीमें लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रही हैं, लेकिन भारतीय दल का आत्मविश्वास और तैयारी उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है।

कोच राकेश कुमार ने बताया कि टीम की तैयारी में खिलाड़ियों की फिटनेस, सामरिक योजना और मनोवैज्ञानिक मजबूती — तीनों पहलुओं पर समान रूप से ध्यान दिया गया है। खिलाड़ी नीरज नरवाल ने मुस्कुराते हुए कहा कि रेत में धंसते कदम उन्हें और मजबूत बनाते हैं और सान्या का वातावरण उनके हौसले को दोगुना करता है।

महिला टीम: पदक से परे एक बड़ा सपना

भारतीय महिला कबड्डी टीम की ऊर्जा और जुनून इस पूरे आयोजन को एक अलग आयाम देता है। इन खिलाड़ियों की आंखों में सिर्फ स्वर्ण पदक का नहीं, बल्कि लाखों युवा लड़कियों को प्रेरित करने का सपना भी झलकता है।

खिलाड़ी निकिता चौहान ने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि वे सिर्फ मेडल के लिए नहीं, बल्कि उन तमाम लड़कियों के लिए भी मैदान में उतरती हैं जो उन्हें देखकर अपने सपने बुनती हैं।

महिला टीम की कोच तेजस्विनी बाई ने बताया कि उनकी रणनीति तेज गति और बेहतरीन टीमवर्क पर केंद्रित है। खिलाड़ियों की फुर्ती और आपसी तालमेल उन्हें किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए कठिन चुनौती बनाता है।

खिलाड़ी मनप्रीत कौर ने कहा कि सान्या में खेलते हुए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने के साथ-साथ एक नई संस्कृति को नजदीक से जानने का अवसर भी मिल रहा है। सिमरन कम्बोज ने कहा कि यह अनुभव मेडल से परे जाकर उनके जीवन का स्थायी हिस्सा बन जाएगा।

सान्या का आतिथ्य और आयोजन की सराहना

खिलाड़ी जय भगवान ने सान्या के बारे में बात करते हुए वहां के लोगों की मित्रवत प्रकृति और आयोजन की उच्चस्तरीय व्यवस्थाओं की खुलकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों का सहयोगी व्यवहार खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ाता है।

खिलाड़ी रितु श्योराण ने कहा कि यहां का माहौल इतना सुकूनदेह है कि घर जैसा महसूस होता है। सुव्यवस्थित सुविधाएं खिलाड़ियों को अपने खेल पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद कर रही हैं।

भारतीय कबड्डी का ऐतिहासिक संदर्भ और आगे की राह

गौरतलब है कि भारत कबड्डी का जन्मदाता देश है और एशियाई खेलों में इस खेल में भारत का वर्चस्व दशकों पुराना है। हालांकि बीच कबड्डी एक अपेक्षाकृत नया प्रारूप है जो पारंपरिक खेल को एक नई पहचान दे रहा है। एशियन बीच गेम्स जैसे मंच पर इस खेल की उपस्थिति इसे वैश्विक स्तर पर और अधिक लोकप्रिय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दोनों टीमों ने एकमत से कहा कि उनका लक्ष्य भारत के लिए पदक जीतना है। उनकी आवाज में गर्व और आंखों में वह दृढ़ संकल्प साफ दिखा जो किसी भी बड़े लक्ष्य की नींव होती है। आने वाले मैचों में भारतीय कबड्डी टीमों का प्रदर्शन न केवल पदक तालिका में देश की स्थिति तय करेगा, बल्कि बीच कबड्डी को भारत में एक नई पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

(साभार: चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने का अवसर है। जब ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसी टीमें तेजी से मजबूत हो रही हैं, तो यह सवाल उठता है कि क्या भारत अपने खुद के आविष्कार किए खेल में अपना वर्चस्व बनाए रख पाएगा। महिला टीम की भागीदारी एक और महत्वपूर्ण संकेत है — यह दर्शाता है कि भारतीय महिला खिलाड़ी अब मेडल से परे प्रेरणा का प्रतीक बन रही हैं। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि बीच कबड्डी को ओलंपिक में शामिल कराने की दिशा में ये एशियाई प्रदर्शन बेहद निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एशियन बीच गेम्स में भारतीय कबड्डी टीम कैसा प्रदर्शन कर रही है?
छठे एशियन बीच गेम्स में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी टीमें सान्या (चीन) में पदक जीतने के मजबूत इरादे के साथ खेल रही हैं। कोच राकेश कुमार और तेजस्विनी बाई की अगुवाई में टीमों ने फिटनेस, रणनीति और मानसिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया है।
बीच कबड्डी और पारंपरिक कबड्डी में क्या अंतर है?
बीच कबड्डी रेत पर खेली जाती है जहां हर कदम धंसता है और सामान्य से अधिक शारीरिक बल की जरूरत होती है। पारंपरिक कबड्डी के मुकाबले यहां संतुलन बनाए रखना और रेत पर तेज दौड़ना अतिरिक्त कौशल की मांग करता है।
एशियन बीच गेम्स कबड्डी में भारत के प्रतिद्वंद्वी कौन हैं?
इस प्रतियोगिता में ईरान, पाकिस्तान और बांग्लादेश भारत के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं। अनुभवी खिलाड़ी ब्रिजेंद्र चौधरी के अनुसार ये टीमें लगातार मजबूत हो रही हैं, लेकिन भारतीय दल का आत्मविश्वास और तैयारी उन्हें बढ़त देती है।
भारतीय महिला कबड्डी टीम की कोच कौन हैं?
भारतीय महिला कबड्डी टीम की कोच तेजस्विनी बाई हैं। उनकी रणनीति तेज गति और बेहतरीन टीमवर्क पर आधारित है जो टीम को एक मजबूत दावेदार बनाती है।
छठे एशियन बीच गेम्स का आयोजन कहां हो रहा है?
छठे एशियन बीच गेम्स का आयोजन चीन के सान्या शहर में हो रहा है। यह प्रतियोगिता अप्रैल 2025 में आयोजित की जा रही है जिसमें एशिया के कई देश भाग ले रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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