कैलाश खेर का 'क्रिएटिव फ्रीडम' पर बड़ा बयान: कलाकार में संवेदनशीलता, शालीनता और संस्कृति ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
मशहूर गायक कैलाश खेर ने 20 सितंबर 2026 को एक विशेष बातचीत में रचनात्मक आज़ादी (क्रिएटिव फ्रीडम) पर चल रही राष्ट्रीय बहस में अपना स्पष्ट पक्ष रखा। उनका कहना है कि संवेदनशीलता, शालीनता और संस्कृति किसी भी सच्चे कलाकार के अनिवार्य गुण हैं, और इनके अभाव में कोई व्यक्ति कलाकार नहीं, बल्कि निंदक मात्र रह जाता है।
कलाकार की परिभाषा पर खेर का नज़रिया
खेर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'कलाकार वही होता है जो संवेदनशील हो। अगर कोई संवेदनशील नहीं है और फिर भी खुद को कलाकार कहता है, तो वह कलाकार नहीं है, वह तो बदनाम करने वाला है। मंच लोगों का दिल जीतने के लिए होता है।' उनके अनुसार, एक सच्चे कलाकार का उद्देश्य लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाना और दूसरों के दर्द को महसूस करने की क्षमता रखना है।
रचनात्मकता और संदर्भ की समझ
जब उनसे पूछा गया कि क्या संवेदनशील मुद्दों पर बात करते समय संदर्भ को समझना उतना ही ज़रूरी है जितना कि रचनात्मक आज़ादी की रक्षा करना, तो खेर ने बिना किसी हिचकिचाहट के हाँ कहा। उनका मत है कि बेमतलब की बातें करना या बिना किसी संवेदनशीलता के मनोरंजन की कोशिश करना — ये किसी निंदक की पहचान है, किसी कलाकार की नहीं।
व्यंग्य और आलोचना पर संतुलित दृष्टिकोण
खेर ने यह भी माना कि व्यंग्य और आलोचना को कला के एक रूप के तौर पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा, 'हर किसी की अपनी सोच होती है। लेकिन हमारी सोच पवित्रता की ओर होनी चाहिए।' उनके अनुसार, मन में पवित्रता, साफ-सफाई, शिष्टाचार और सांस्कृतिक समझ — ये गुण किसी भी कलाकार के लिए अपरिहार्य हैं।
कैलाश खेर का सफर और पहचान
गौरतलब है कि कैलाश खेर ने 2003 में फिल्म 'वैसा भी होता है पार्ट 2' के गाने 'अल्लाह के बंदे' से राष्ट्रीय पहचान हासिल की थी। इसके बाद 'तेरी दीवानी', 'सैयां' और 'बम लहरी' जैसे गानों ने उन्हें हिंदी संगीत जगत में एक विशिष्ट स्थान दिलाया। उन्होंने 'मंगल पांडे: द राइज़िंग', 'कॉर्पोरेट', 'सलाम-ए-इश्क: अ ट्रिब्यूट टू लव' और 'बाहुबली' सीरीज़ जैसी चर्चित फ़िल्मों में भी अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा है।
आगे की दिशा
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मनोरंजन उद्योग में रचनात्मक आज़ादी की सीमाओं पर बहस तेज़ हो रही है। खेर की यह राय न केवल कलाकारों के लिए, बल्कि दर्शकों और आलोचकों के लिए भी विचार का विषय बनने की संभावना रखती है।