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पूर्ण शलभासन से कमर दर्द में राहत, रीढ़ होती है मजबूत और रक्त प्रवाह बेहतर

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पूर्ण शलभासन से कमर दर्द में राहत, रीढ़ होती है मजबूत और रक्त प्रवाह बेहतर

सारांश

गतिहीन जीवनशैली से उपजे कमर दर्द का एक प्राचीन उत्तर — पूर्ण शलभासन। यह उन्नत योगासन पीठ की माँसपेशियाँ मज़बूत करता है, रक्त प्रवाह सुधारता है और पाचन भी बेहतर करता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग इसे रीढ़ के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानता है।

मुख्य बातें

पूर्ण शलभासन योग के सबसे उन्नत आसनों में से एक है, जो कमर दर्द और रीढ़ की अकड़न में राहत दिलाता है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के अनुसार यह आसन रीढ़ को मज़बूत बनाता है और पूरे शरीर को ऊर्जा देता है।
इस आसन से पीठ के निचले हिस्से में रक्त प्रवाह बेहतर होता है, जिससे दर्द, अकड़न और थकान में कमी आती है।
पेट पर दबाव के कारण यह कब्ज़ दूर करने और पाचन क्षमता बढ़ाने में भी सहायक है।
गंभीर कमर दर्द, साइटिका, उच्च रक्तचाप, हर्निया या पेप्टिक अल्सर से पीड़ित लोग यह आसन न करें।
प्रारंभिक अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में इस आसन का अभ्यास करना चाहिए।

पूर्ण शलभासन (फुल लोकस्ट पोज) योग के सबसे उन्नत और प्रभावशाली आसनों में गिना जाता है, जो कमर दर्द, रीढ़ की अकड़न और पाचन समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग के अनुसार, यह आसन रीढ़ की हड्डी को मज़बूत बनाने के साथ-साथ पूरे शरीर को ऊर्जा और ताक़त प्रदान करता है।

पूर्ण शलभासन का अर्थ और मुद्रा

संस्कृत में 'शलभ' का अर्थ 'टिड्डी' और 'पूर्ण' का अर्थ 'संपूर्ण' होता है। इस आसन की अंतिम स्थिति में साधक का शरीर उड़ान भरती हुई टिड्डी के समान दिखाई देता है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। यह आसन शलभासन (टिड्डी मुद्रा) की उन्नत स्थिति है, जो शरीर के संतुलन, लचीलेपन और आंतरिक अंगों की मज़बूती में सहायक है।

देखने में यह आसन कठिन प्रतीत होता है, लेकिन योग विशेषज्ञों के अनुसार नियमित अभ्यास से इसे सहजता से किया जा सकता है। प्रारंभिक अभ्यासकर्ताओं को किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही यह आसन करने की सलाह दी जाती है।

कमर दर्द और रीढ़ पर असर

इस आसन को करने से पीठ के निचले हिस्से की माँसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे वे मज़बूत होती हैं। साथ ही, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है और उसकी दृढ़ता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से पीठ और कमर के आसपास रक्त प्रवाह में सुधार होता है, जिससे दर्द, अकड़न और थकान में राहत मिलती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।

पाचन और आंतरिक अंगों पर लाभ

इस आसन के दौरान पेट पर पड़ने वाले दबाव के कारण यह कब्ज़ दूर करने में सहायक होता है और पाचन क्षमता को बेहतर बनाता है। योग शास्त्र में वर्णित यह आसन पीठ, कमर और पैरों की माँसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है, जो शरीर के समग्र संतुलन के लिए लाभकारी है।

किन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, गंभीर कमर दर्द, साइटिका, उच्च रक्तचाप, हर्निया या पेप्टिक अल्सर से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी पुरानी बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति इसे अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

अभ्यास का महत्व

योग विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्ण शलभासन का धैर्यपूर्वक और नियमित अभ्यास शरीर की समग्र शक्ति और ऊर्जा में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब गतिहीन जीवनशैली और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करने के कारण कमर दर्द एक व्यापक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

योग के दावों को प्रायः नैदानिक साक्ष्य के बिना प्रस्तुत किया जाता है — इस लेख में मोरारजी देसाई संस्थान के हवाले से की गई बात विश्वसनीयता देती है, लेकिन पाठकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि गंभीर रीढ़ की समस्याओं में योग चिकित्सक की देखरेख अनिवार्य है। व्यापक स्वास्थ्य कवरेज में अक्सर यह नहीं बताया जाता कि किन स्थितियों में आसन हानिकारक हो सकते हैं — यह लेख उस ज़रूरी सावधानी को शामिल करता है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्ण शलभासन क्या है और इसे क्यों करते हैं?
पूर्ण शलभासन शलभासन (टिड्डी मुद्रा) की उन्नत स्थिति है, जिसमें साधक का शरीर उड़ान भरती टिड्डी जैसा दिखता है। यह आसन रीढ़ को मज़बूत करने, कमर दर्द में राहत देने और पाचन सुधारने के लिए किया जाता है।
पूर्ण शलभासन से कमर दर्द में कैसे राहत मिलती है?
इस आसन से पीठ के निचले हिस्से की माँसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे वे मज़बूत होती हैं और कमर व पीठ में रक्त प्रवाह बेहतर होता है। इससे दर्द, अकड़न और थकान में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
पूर्ण शलभासन किन्हें नहीं करना चाहिए?
गंभीर कमर दर्द, साइटिका, उच्च रक्तचाप, हर्निया या पेप्टिक अल्सर से पीड़ित व्यक्तियों को यह आसन नहीं करना चाहिए। ऐसे लोग इसे अपनाने से पहले चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।
पूर्ण शलभासन के अन्य फायदे क्या हैं?
कमर दर्द के अलावा, यह आसन पेट पर दबाव डालकर कब्ज़ दूर करता है और पाचन क्षमता बढ़ाता है। साथ ही यह पीठ, कमर और पैरों की माँसपेशियों को एक साथ मज़बूत बनाता है।
क्या शुरुआती लोग पूर्ण शलभासन कर सकते हैं?
शुरुआती अभ्यासकर्ता यह आसन किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही करें, क्योंकि यह एक उन्नत आसन है। नियमित अभ्यास से धीरे-धीरे इसे सही ढंग से किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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