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शलभासन से लोअर बैक दर्द में राहत: नियमित अभ्यास के 5 प्रमुख फायदे

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शलभासन से लोअर बैक दर्द में राहत: नियमित अभ्यास के 5 प्रमुख फायदे

सारांश

कुर्सी पर घंटों बैठने से बढ़ते लोअर बैक दर्द का एक सुलभ जवाब है शलभासन। पीठ, जांघों, हिप्स और श्वसन तंत्र — सभी पर एक साथ काम करने वाला यह आसन उन लोगों के लिए ख़ास है जिनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि कम है।

मुख्य बातें

शलभासन (Locust Pose) पीठ, जांघों और हिप्स की मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है।
हल्के लोअर बैक दर्द और साइटिका में नियमित अभ्यास से राहत मिल सकती है।
गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में अभ्यास से पहले योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह अनिवार्य है।
आसन के दौरान सहज और स्वाभाविक श्वास बनाए रखना ज़रूरी है; साँस न रोकें।
वेट मैनेजमेंट के लिए शलभासन को संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ जोड़ना अधिक प्रभावी है।

आधुनिक जीवनशैली में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, स्मार्टफोन पर झुके रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी के चलते लोअर बैक दर्द और कमर की तकलीफें तेज़ी से बढ़ रही हैं। योग विशेषज्ञों के अनुसार, इन समस्याओं से निपटने में शलभासन (Locust Pose) एक प्रभावी और सुलभ आसन साबित हो सकता है, जो पीठ, जांघों और हिप्स की मांसपेशियों को एक साथ सक्रिय करता है।

शलभासन क्या है और यह कैसे काम करता है

शलभासन में पेट के बल लेटकर दोनों पैरों को ऊपर उठाया जाता है। इस प्रक्रिया में शरीर के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं — पीठ की मांसपेशियाँ, रीढ़ के आसपास के ऊतक और हिप्स की मांसपेशियाँ सभी सक्रिय होती हैं। यही कारण है कि इसे बैक स्ट्रेंथ बढ़ाने वाले योगासनों में प्रमुख स्थान दिया जाता है।

देखने में यह आसन सरल लग सकता है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा होता है। पेट के बल लेटकर शरीर को उठाने की यह क्रिया रीढ़ की हड्डी के इर्द-गिर्द की मांसपेशियों को संतुलित तरीके से मज़बूत करती है।

लोअर बैक दर्द और साइटिका में उपयोगिता

योग अभ्यासियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हल्के लोअर बैक दर्द या साइटिका जैसी समस्याओं में नियमित शलभासन अभ्यास राहत दे सकता है। पीठ की मांसपेशियाँ जब मज़बूत होती हैं, तो रीढ़ पर अनावश्यक दबाव कम होता है।

हालाँकि, गंभीर दर्द, चोट या किसी पुरानी बीमारी की स्थिति में इस आसन को स्वयं करने से पहले किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना अनिवार्य है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि बिना उचित मार्गदर्शन के किसी भी आसन का अभ्यास नुकसानदेह हो सकता है।

जांघों, हिप्स और निचले शरीर पर प्रभाव

शलभासन के दौरान पैरों को ऊपर उठाने की क्रिया से जांघों और हिप्स की मांसपेशियों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। नियमित अभ्यास से शरीर का निचला हिस्सा धीरे-धीरे मज़बूत होता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है जिनकी दिनचर्या में शारीरिक गतिविधि सीमित है।

श्वसन स्वास्थ्य पर असर

शलभासन में पेट के बल लेटकर छाती को उठाने की प्रक्रिया के दौरान साँस लेने की क्षमता पर भी ध्यान जाता है। नियमित योग अभ्यास समग्र रूप से श्वसन स्वास्थ्य को सहारा दे सकता है। इस आसन को करते समय साँस को रोकने के बजाय स्वाभाविक और सहज तरीके से साँस लेना ज़रूरी है — यह आसन की प्रभावशीलता के लिए महत्वपूर्ण है।

वेट मैनेजमेंट और समग्र स्वास्थ्य

शलभासन को वेट मैनेजमेंट में सहायक माना जाता है, हालाँकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि बेहतर परिणामों के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ जोड़ना आवश्यक है। अकेले किसी एक आसन पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में प्रासंगिक है जब शहरी भारत में सेडेंटरी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। योग को दैनिक दिनचर्या में शामिल करना एक सरल और किफायती स्वास्थ्य उपाय हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन स्वास्थ्य कवरेज अक्सर या तो अत्यधिक सरलीकृत 'टिप्स' तक सिमट जाती है या जटिल चिकित्सा भाषा में खो जाती है। ज़रूरी बात यह है कि शलभासन जैसे आसनों को 'रामबाण' की तरह पेश करना भ्रामक हो सकता है — साइटिका या क्रॉनिक बैक पेन के मामलों में बिना निदान के स्व-उपचार जोखिम भरा है। पाठकों को यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि योग पूरक उपाय है, विकल्प नहीं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शलभासन क्या है और इसे कैसे करते हैं?
शलभासन एक योगासन है जिसमें पेट के बल लेटकर दोनों पैरों को ऊपर उठाया जाता है। इस दौरान पीठ, हिप्स और जांघों की मांसपेशियाँ सक्रिय होती हैं और इसे 'Locust Pose' भी कहते हैं।
क्या शलभासन लोअर बैक दर्द में फायदेमंद है?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, हल्के लोअर बैक दर्द में नियमित शलभासन अभ्यास राहत दे सकता है क्योंकि यह रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को मज़बूत करता है। गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में पहले चिकित्सक से परामर्श लें।
साइटिका में शलभासन करना सुरक्षित है?
हल्की साइटिका में शलभासन उपयोगी हो सकता है, लेकिन किसी भी तंत्रिका-संबंधी समस्या में इसे स्वयं शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ या फिज़ियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना ज़रूरी है। गलत तरीके से अभ्यास दर्द बढ़ा सकता है।
शलभासन के दौरान साँस कैसे लें?
शलभासन के दौरान साँस को रोकना नहीं चाहिए — स्वाभाविक और सहज तरीके से साँस लेते रहना ज़रूरी है। साँस रोकने से मांसपेशियों पर अनावश्यक दबाव पड़ता है और आसन का लाभ कम हो जाता है।
क्या शलभासन वज़न घटाने में मदद करता है?
शलभासन वेट मैनेजमेंट में सहायक हो सकता है, लेकिन बेहतर परिणामों के लिए इसे संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि के साथ जोड़ना ज़रूरी है। अकेले इस आसन से वज़न घटाने की उम्मीद रखना उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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