शलभासन से रीढ़ की हड्डी होती है मजबूत, आयुष मंत्रालय ने बताई सही विधि और सावधानियाँ
सारांश
मुख्य बातें
शलभासन — जिसे अंग्रेजी में Locust Pose कहा जाता है — रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने वाले सर्वश्रेष्ठ योगासनों में गिना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पीठ की मांसपेशियों को सक्रिय करता है, शरीर का वजन नियंत्रित रखता है और पाचन तंत्र को भी लाभ पहुँचाता है। पेट के बल लेटकर किया जाने वाला यह आसन देखने में सरल लगता है, परंतु इसके अभ्यास के दौरान शरीर के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं।
शलभासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा
संस्कृत में 'शलभ' का अर्थ है टिड्डा (Grasshopper)। इस आसन में शरीर की मुद्रा उड़ान भरने को तैयार टिड्डे जैसी बन जाती है — छाती और पैर दोनों ज़मीन से ऊपर उठे हुए। यह बैक-स्ट्रेंथनिंग श्रेणी का एक प्रमुख आसन है जो रीढ़ के लचीलेपन और कोर की मज़बूती दोनों पर एक साथ काम करता है। गौरतलब है कि इसे अक्सर 'सुपरमैन पोज़' से तुलना की जाती है क्योंकि इसमें हाथ और पैर दोनों एक साथ ऊपर उठाए जाते हैं।
शलभासन करने की सही विधि
सबसे पहले किसी समतल स्थान पर पेट के बल लेट जाएँ। दोनों हाथों को आगे की ओर सीधा फैलाएँ, हथेलियाँ ऊपर की दिशा में रखें। पैर सीधे और एड़ियाँ आपस में मिली हुई हों। माथा या ठुड्डी ज़मीन को छूती रहे।
अब गहरी साँस लें और शरीर को स्थिर करें। साँस छोड़ते हुए दोनों पैरों और हाथों को एक साथ धीरे-धीरे ऊपर उठाएँ। घुटनों को न मोड़ें और पैर सीधे रखें। इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे हाथ, पैर और छाती को वापस ज़मीन पर लाएँ और कुछ देर विश्राम करें।
शलभासन के प्रमुख फायदे
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
रीढ़ की हड्डी की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं और लचीलापन बढ़ता है। कमर एवं पीठ के निचले हिस्से की माँसपेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे हल्के लोअर बैक दर्द में राहत मिल सकती है। पाचन तंत्र पर दबाव पड़ने से उसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है। इसके अतिरिक्त, साइटिका की हल्की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए भी यह उपयोगी हो सकता है — हालाँकि गंभीर दर्द या चोट की स्थिति में किसी योग विशेषज्ञ की सलाह लेना आवश्यक है।
किन्हें नहीं करना चाहिए यह आसन
शलभासन सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। गर्भावस्था के दौरान, हर्निया की स्थिति में, या पीठ अथवा गर्दन में किसी प्रकार की चोट या गंभीर दर्द होने पर इस आसन से परहेज़ करें। ऐसे लोगों को पहले चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।
विशेषज्ञ की सलाह
योग विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि शलभासन को खाली पेट, अधिमानतः सुबह के समय करना सबसे प्रभावी रहता है। शुरुआती अभ्यासकर्ता पहले एक-एक पैर उठाने से अभ्यास शुरू कर सकते हैं और धीरे-धीरे दोनों पैर एक साथ उठाने की ओर बढ़ सकते हैं। नियमित और सही तकनीक से किया गया यह आसन दीर्घकालिक रीढ़ स्वास्थ्य के लिए एक प्रभावी उपाय बन सकता है।