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शशकासन: तनाव और कमर दर्द से राहत दिलाने वाला योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह

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शशकासन: तनाव और कमर दर्द से राहत दिलाने वाला योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह

सारांश

भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और कमर दर्द से जूझ रहे लोगों के लिए शशकासन एक सरल और प्रभावी उपाय है। आयुष मंत्रालय इसे रोज़ाना करने की सलाह देता है — यह रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने के साथ मन को भी शांत करता है।

मुख्य बातें

शशकासन संस्कृत शब्द 'शशक' (खरगोश) और 'आसन' से मिलकर बना है; इस मुद्रा में शरीर खरगोश जैसा दिखता है।
आयुष मंत्रालय इसे तनाव, चिंता, गुस्से और कमर दर्द के लिए रोज़ाना करने की सलाह देता है।
यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन, पाचन तंत्र और एड्रेनल ग्रंथि को नियंत्रित करने में सहायक है।
आसन की अवधि शुरुआत में 10 से 30 सेकंड और अभ्यास बढ़ने पर 10 से 15 मिनट तक की जा सकती है।
गंभीर पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, हर्निया या गर्दन/घुटने की चोट वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए।

शशकासन एक प्रभावी योगाभ्यास है जो कमर दर्द, मानसिक तनाव और चिंता से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय इस आसन को रोज़ाना करने की सलाह देता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बेहतर बनाने के साथ-साथ मन को भी शांत करता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और पीठ दर्द को देखते हुए यह आसन बच्चों और वयस्कों, दोनों के लिए उपयोगी बताया गया है।

शशकासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

शशकासन दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है — 'शशक' अर्थात खरगोश और 'आसन' अर्थात मुद्रा। इस अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति खरगोश जैसी बन जाती है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। यह आसन हठ योग की परंपरा का हिस्सा है और इसे शांत वातावरण में करना अधिक लाभकारी माना जाता है।

शशकासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को सुधारने और एड्रेनल ग्रंथि को नियंत्रित करने में भी सहायक है। मानसिक स्तर पर यह तनाव, चिंता और क्रोध को कम करने में प्रभावी पाया गया है।

गौरतलब है कि एड्रेनल ग्रंथि शरीर में तनाव हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करती है। इसका संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ापन, थकान और नींद की समस्या अनुभव कर सकता है — ऐसे में शशकासन का नियमित अभ्यास एक सहायक उपाय के रूप में उपयोगी हो सकता है।

शशकासन करने की सही विधि

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें — अर्थात पैरों को मोड़कर बैठें और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रखें। अब दोनों घुटनों को धीरे-धीरे एक-दूसरे से थोड़ा दूर करें, लेकिन ध्यान रखें कि दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिले रहें।

गहरी श्वास लेते हुए दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें। फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और ठुड्डी तथा माथे को जमीन से छुआने का प्रयास करें। भुजाओं को समानांतर और सीधा रखें, सामने की ओर देखें और सामान्य गति से श्वास लेते हुए 10 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें।

अभ्यास में निपुण होने के बाद इस आसन को 10 से 15 मिनट तक दोहराया जा सकता है। शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार समय सीमा तय करें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।

सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए यह आसन

हर योगासन की तरह शशकासन भी सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन व्यक्तियों को गंभीर पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, हर्निया या गर्दन अथवा घुटने में चोट हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नई योगाभ्यास दिनचर्या शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।

नियमित अभ्यास का महत्व

योग विशेषज्ञों के अनुसार, शशकासन का असली लाभ तभी मिलता है जब इसे नियमित रूप से और सही तकनीक से किया जाए। शांत वातावरण, प्रातःकाल का समय और खाली पेट अभ्यास इसे अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। आयुष मंत्रालय इसे समग्र स्वास्थ्य की दिशा में एक सरल किंतु कारगर कदम मानता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि केवल सरकारी समर्थन किसी भी आसन को सभी के लिए उपयुक्त नहीं बना देता। कमर दर्द के अनेक कारण हो सकते हैं — संरचनात्मक, तंत्रिका-संबंधी या जीवनशैली-जनित — और बिना व्यक्तिगत मूल्यांकन के किसी एक आसन को सार्वभौमिक उपाय बताना भ्रामक हो सकता है। स्वास्थ्य संवाद में यह संतुलन ज़रूरी है कि लाभ के साथ सावधानियाँ भी उतनी ही प्रमुखता से बताई जाएँ।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शशकासन क्या है और इसे यह नाम क्यों दिया गया है?
शशकासन एक योगासन है जिसमें शरीर की आकृति खरगोश जैसी बन जाती है। यह नाम संस्कृत के 'शशक' (खरगोश) और 'आसन' (मुद्रा) शब्दों से मिलकर बना है।
शशकासन के क्या-क्या फायदे हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार शशकासन तनाव, चिंता और क्रोध को कम करता है, रीढ़ की हड्डी में लचीलापन लाता है, पाचन तंत्र सुधारता है और एड्रेनल ग्रंथि को नियंत्रित करने में सहायक है। यह बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए लाभकारी बताया गया है।
शशकासन कैसे किया जाता है?
योग मैट पर वज्रासन में बैठें और रीढ़ सीधी रखें। गहरी श्वास लेते हुए आगे झुकें, माथा और हथेलियाँ जमीन पर टिकाएं, और 10 से 30 सेकंड इस स्थिति में रहें। अभ्यास बढ़ने पर इसे 10 से 15 मिनट तक दोहराया जा सकता है।
किन लोगों को शशकासन नहीं करना चाहिए?
गंभीर पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, हर्निया या गर्दन अथवा घुटने में चोट होने पर यह आसन नहीं करना चाहिए। कोई भी नया योगाभ्यास शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित है।
क्या आयुष मंत्रालय ने शशकासन को आधिकारिक रूप से अनुशंसित किया है?
हाँ, आयुष मंत्रालय शशकासन को रोज़ाना करने की सलाह देता है। मंत्रालय इसे समग्र स्वास्थ्य के लिए एक सरल और प्रभावी योगाभ्यास मानता है।
राष्ट्र प्रेस
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