शशकासन: तनाव और कमर दर्द से राहत दिलाने वाला योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह
सारांश
मुख्य बातें
शशकासन एक प्रभावी योगाभ्यास है जो कमर दर्द, मानसिक तनाव और चिंता से राहत दिलाने में सहायक माना जाता है। आयुष मंत्रालय इस आसन को रोज़ाना करने की सलाह देता है, क्योंकि यह रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बेहतर बनाने के साथ-साथ मन को भी शांत करता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और पीठ दर्द को देखते हुए यह आसन बच्चों और वयस्कों, दोनों के लिए उपयोगी बताया गया है।
शशकासन क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा
शशकासन दो संस्कृत शब्दों से मिलकर बना है — 'शशक' अर्थात खरगोश और 'आसन' अर्थात मुद्रा। इस अभ्यास के दौरान शरीर की आकृति खरगोश जैसी बन जाती है, इसीलिए इसे यह नाम दिया गया है। यह आसन हठ योग की परंपरा का हिस्सा है और इसे शांत वातावरण में करना अधिक लाभकारी माना जाता है।
शशकासन के प्रमुख स्वास्थ्य लाभ
आयुष मंत्रालय के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से पीठ के निचले हिस्से और रीढ़ की हड्डी में लचीलापन आता है। साथ ही यह पाचन तंत्र को सुधारने और एड्रेनल ग्रंथि को नियंत्रित करने में भी सहायक है। मानसिक स्तर पर यह तनाव, चिंता और क्रोध को कम करने में प्रभावी पाया गया है।
गौरतलब है कि एड्रेनल ग्रंथि शरीर में तनाव हार्मोन के स्राव को नियंत्रित करती है। इसका संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति अत्यधिक चिड़चिड़ापन, थकान और नींद की समस्या अनुभव कर सकता है — ऐसे में शशकासन का नियमित अभ्यास एक सहायक उपाय के रूप में उपयोगी हो सकता है।
शशकासन करने की सही विधि
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले योग मैट पर वज्रासन की मुद्रा में बैठें — अर्थात पैरों को मोड़कर बैठें और रीढ़ की हड्डी बिल्कुल सीधी रखें। अब दोनों घुटनों को धीरे-धीरे एक-दूसरे से थोड़ा दूर करें, लेकिन ध्यान रखें कि दोनों पैरों के अंगूठे आपस में मिले रहें।
गहरी श्वास लेते हुए दोनों हथेलियों को घुटनों के बीच जमीन पर रखें। फिर धीरे-धीरे श्वास छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और ठुड्डी तथा माथे को जमीन से छुआने का प्रयास करें। भुजाओं को समानांतर और सीधा रखें, सामने की ओर देखें और सामान्य गति से श्वास लेते हुए 10 से 30 सेकंड तक इस स्थिति में बने रहें।
अभ्यास में निपुण होने के बाद इस आसन को 10 से 15 मिनट तक दोहराया जा सकता है। शुरुआत में अपनी क्षमता के अनुसार समय सीमा तय करें और धीरे-धीरे अवधि बढ़ाएं।
सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए यह आसन
हर योगासन की तरह शशकासन भी सभी के लिए उपयुक्त नहीं है। जिन व्यक्तियों को गंभीर पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, हर्निया या गर्दन अथवा घुटने में चोट हो, उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए। किसी भी नई योगाभ्यास दिनचर्या शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या चिकित्सक से परामर्श लेना उचित रहता है।
नियमित अभ्यास का महत्व
योग विशेषज्ञों के अनुसार, शशकासन का असली लाभ तभी मिलता है जब इसे नियमित रूप से और सही तकनीक से किया जाए। शांत वातावरण, प्रातःकाल का समय और खाली पेट अभ्यास इसे अधिक प्रभावशाली बनाते हैं। आयुष मंत्रालय इसे समग्र स्वास्थ्य की दिशा में एक सरल किंतु कारगर कदम मानता है।