उष्ट्रासन: रीढ़ की लचक बढ़ाए, पेट की चर्बी घटाए — आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सही तरीका
सारांश
मुख्य बातें
उष्ट्रासन (Camel Pose) एक मध्यवर्ती पश्च-नमन योगासन है, जो रीढ़ को लचीला बनाने, पेट की चर्बी घटाने और आँखों की रोशनी बेहतर करने में सहायक माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उपयोगी बताया है।
उष्ट्रासन क्या है
'उष्ट्र' संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है 'ऊँट'। इसी से इस आसन का नाम पड़ा और अंग्रेजी में इसे 'Camel Pose' कहते हैं। यह आसन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को सक्रिय करता है और शरीर में ऊर्जा, लचीलापन तथा पाचन शक्ति में सुधार लाता है।
आयुष मंत्रालय के अनुसार प्रमुख लाभ
आयुष मंत्रालय के अनुसार उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ व गर्दन के दर्द में राहत देता है। इसके अभ्यास से पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद मिलती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। मंत्रालय के अनुसार यह आँखों की रोशनी बेहतर करने में भी सहायक है। साथ ही, यह हृदय-श्वसन तंत्र को बेहतर करता है और मानसिक शांति व एकाग्रता को बढ़ावा देता है।
उष्ट्रासन करने का सही तरीका
मंत्रालय द्वारा सुझाई गई विधि इस प्रकार है: सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें या घुटनों के बल खड़े हों और दोनों पैरों को कूल्हों की चौड़ाई के बराबर रखें। इसके बाद धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से एड़ियाँ पकड़ें। सिर को पीछे की ओर झुकाएँ और छाती को ऊपर की दिशा में उठाएँ। इस स्थिति में २०–३० सेकंड तक रहें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। अंत में धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौटें और विश्राम करें।
सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए
विशेषज्ञों के अनुसार उष्ट्रासन को खाली पेट करना चाहिए और अत्यधिक खिंचाव से बचना चाहिए। जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, हर्निया, उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या है अथवा जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो, उन्हें यह आसन चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन से पूरी तरह बचना चाहिए। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास शुरू करना चाहिए।
योग और समग्र स्वास्थ्य
उष्ट्रासन योग की उस प्राचीन परंपरा का हिस्सा है जो शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र में जोड़ती है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो गया है जब गतिहीन जीवनशैली और स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठने से पीठ दर्द और पाचन संबंधी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन से यह आसन दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।