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उष्ट्रासन: रीढ़ की लचक बढ़ाए, पेट की चर्बी घटाए — आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सही तरीका

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उष्ट्रासन: रीढ़ की लचक बढ़ाए, पेट की चर्बी घटाए — आयुष मंत्रालय ने बताए फायदे और सही तरीका

सारांश

उष्ट्रासन — ऊँट की मुद्रा वाला यह प्राचीन योगासन — रीढ़, पाचन और आँखों की रोशनी तीनों के लिए एक साथ काम करता है। आयुष मंत्रालय ने इसकी सही विधि और ज़रूरी सावधानियाँ साझा की हैं, जो इसे आज की गतिहीन जीवनशैली में और भी ज़रूरी बनाती हैं।

मुख्य बातें

उष्ट्रासन एक मध्यवर्ती पश्च-नमन योगासन है, जिसे अंग्रेजी में ' Camel Pose ' कहते हैं।
आयुष मंत्रालय के अनुसार यह आसन रीढ़ की लचक , पाचन शक्ति और आँखों की रोशनी बेहतर करता है।
अभ्यास की अवधि इस मुद्रा में २०–३० सेकंड, खाली पेट करना अनिवार्य है।
गर्भवती महिलाओं , हर्निया और उच्च/निम्न रक्तचाप के रोगियों को यह आसन चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए।
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए।

उष्ट्रासन (Camel Pose) एक मध्यवर्ती पश्च-नमन योगासन है, जो रीढ़ को लचीला बनाने, पेट की चर्बी घटाने और आँखों की रोशनी बेहतर करने में सहायक माना जाता है। भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस आसन को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए उपयोगी बताया है।

उष्ट्रासन क्या है

'उष्ट्र' संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है 'ऊँट'। इसी से इस आसन का नाम पड़ा और अंग्रेजी में इसे 'Camel Pose' कहते हैं। यह आसन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) को सक्रिय करता है और शरीर में ऊर्जा, लचीलापन तथा पाचन शक्ति में सुधार लाता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार प्रमुख लाभ

आयुष मंत्रालय के अनुसार उष्ट्रासन के नियमित अभ्यास से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:

यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और पीठ व गर्दन के दर्द में राहत देता है। इसके अभ्यास से पेट की अतिरिक्त चर्बी घटाने में मदद मिलती है और पाचन तंत्र मजबूत होता है। मंत्रालय के अनुसार यह आँखों की रोशनी बेहतर करने में भी सहायक है। साथ ही, यह हृदय-श्वसन तंत्र को बेहतर करता है और मानसिक शांति व एकाग्रता को बढ़ावा देता है।

उष्ट्रासन करने का सही तरीका

मंत्रालय द्वारा सुझाई गई विधि इस प्रकार है: सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें या घुटनों के बल खड़े हों और दोनों पैरों को कूल्हों की चौड़ाई के बराबर रखें। इसके बाद धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकते हुए दोनों हाथों से एड़ियाँ पकड़ें। सिर को पीछे की ओर झुकाएँ और छाती को ऊपर की दिशा में उठाएँ। इस स्थिति में २०–३० सेकंड तक रहें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। अंत में धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौटें और विश्राम करें।

सावधानियाँ और किसे नहीं करना चाहिए

विशेषज्ञों के अनुसार उष्ट्रासन को खाली पेट करना चाहिए और अत्यधिक खिंचाव से बचना चाहिए। जिन लोगों को गंभीर पीठ दर्द, हर्निया, उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या है अथवा जिनकी हाल ही में कोई सर्जरी हुई हो, उन्हें यह आसन चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन से पूरी तरह बचना चाहिए। शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही इसका अभ्यास शुरू करना चाहिए।

योग और समग्र स्वास्थ्य

उष्ट्रासन योग की उस प्राचीन परंपरा का हिस्सा है जो शरीर, मन और आत्मा को एकसूत्र में जोड़ती है। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो गया है जब गतिहीन जीवनशैली और स्क्रीन के सामने लंबे समय तक बैठने से पीठ दर्द और पाचन संबंधी समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। नियमित अभ्यास और सही मार्गदर्शन से यह आसन दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सराहनीय है। हालाँकि, 'आँखों की रोशनी बढ़ाने' जैसे दावे अभी तक बड़े क्लिनिकल परीक्षणों से पूरी तरह सिद्ध नहीं हुए हैं — इन्हें सहायक लाभ के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर सावधानियों को नज़रअंदाज़ कर देती है, जबकि गलत तरीके से किया गया यह आसन पीठ की चोट का कारण बन सकता है। जन स्वास्थ्य के नज़रिए से ज़रूरी है कि लाभों के साथ-साथ प्रशिक्षित मार्गदर्शन की अनिवार्यता को भी उतनी ही प्रमुखता दी जाए।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उष्ट्रासन क्या है और इसे कैमल पोज़ क्यों कहते हैं?
उष्ट्रासन एक पश्च-नमन योगासन है जिसमें शरीर की आकृति ऊँट जैसी बनती है, इसीलिए संस्कृत में 'उष्ट्र' (ऊँट) के नाम पर इसे उष्ट्रासन और अंग्रेजी में Camel Pose कहते हैं। यह अनाहत (हृदय) चक्र को सक्रिय करता है।
उष्ट्रासन के मुख्य स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार उष्ट्रासन रीढ़ को लचीला बनाता है, पेट की चर्बी घटाता है, पाचन तंत्र मजबूत करता है, पीठ-गर्दन के दर्द में राहत देता है और आँखों की रोशनी बेहतर करने में सहायक है। यह हृदय-श्वसन स्वास्थ्य और मानसिक एकाग्रता के लिए भी लाभकारी बताया गया है।
उष्ट्रासन करने का सही तरीका क्या है?
घुटनों के बल खड़े होकर पैरों को कूल्हों की चौड़ाई में रखें, धीरे-धीरे पीछे झुकते हुए दोनों हाथों से एड़ियाँ पकड़ें, सिर पीछे झुकाएँ और छाती ऊपर उठाएँ। इस स्थिति में २०–३० सेकंड रहें और सामान्य साँस लेते रहें, फिर धीरे-धीरे वापस आएँ।
किन लोगों को उष्ट्रासन नहीं करना चाहिए?
गर्भवती महिलाओं को यह आसन पूरी तरह से नहीं करना चाहिए। गंभीर पीठ दर्द, हर्निया, उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या वाले और हाल में सर्जरी करा चुके लोगों को चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
क्या शुरुआती लोग उष्ट्रासन खुद कर सकते हैं?
शुरुआती अभ्यासकर्ताओं को प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही उष्ट्रासन शुरू करना चाहिए। इसे हमेशा खाली पेट करें और अत्यधिक खिंचाव से बचें, ताकि चोट का जोखिम न रहे।
राष्ट्र प्रेस
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