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चक्रासन के फायदे और सही तरीका: रोज़ाना अभ्यास से कमर दर्द, तनाव और कब्ज में राहत

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चक्रासन के फायदे और सही तरीका: रोज़ाना अभ्यास से कमर दर्द, तनाव और कब्ज में राहत

सारांश

चक्रासन सिर्फ एक योगासन नहीं — यह रीढ़, मन और पाचन तंत्र को एक साथ साधने का प्राचीन नुस्खा है। आयुष मंत्रालय भी इसके फायदों को मान्यता देता है। बैठे रहने की आदत से जकड़ी पीठ के लिए रोज़ाना 5-10 मिनट का यह अभ्यास असरदार उपाय हो सकता है।

मुख्य बातें

चक्रासन में शरीर को पीछे मोड़कर पहिये जैसा आकार दिया जाता है, जिससे पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियाँ एक साथ सक्रिय होती हैं।
आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार इस आसन से कमर-रीढ़ की समस्याएँ, कब्ज, आँखों की कमज़ोरी और मानसिक तनाव में राहत मिलती है।
अभ्यास में मुद्रा को 10 से 20 सेकंड तक बनाए रखना और सामान्य रूप से साँस लेते रहना ज़रूरी है।
रोज़ाना 5 से 10 मिनट के अभ्यास से कमर दर्द को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
गंभीर कमर दर्द, उच्च रक्तचाप या हृदय रोग से पीड़ित व्यक्तियों को विशेषज्ञ की देखरेख में ही यह आसन करना चाहिए।

चक्रासन — योग की उस प्राचीन परंपरा का अभिन्न अंग है जो भारतीय संस्कृति में हज़ारों वर्षों से मन, शरीर और आत्मा को संतुलित रखने का माध्यम रही है। आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के अनुसार, इस आसन के नियमित अभ्यास से कमर-रीढ़ की समस्याएँ, कब्ज, आँखों की कमज़ोरी और मानसिक तनाव — सभी में उल्लेखनीय सुधार होता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिदिन 5 से 10 मिनट के अभ्यास से शरीर और मन दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है।

चक्रासन क्या है और इसका महत्व

संस्कृत में 'चक्र' का अर्थ है पहिया और 'आसन' का अर्थ है मुद्रा। इस आसन में शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिये जैसा वृत्ताकार आकार दिया जाता है, जिससे पीठ, हाथ, पैर और पेट की मांसपेशियों पर एक साथ काम होता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार यह आसन शरीर की लचीलापन बढ़ाने के साथ-साथ मुद्रा (posture) को भी दुरुस्त करता है।

यह ऐसे समय में विशेष प्रासंगिक हो गया है जब लंबे समय तक बैठकर काम करने वाले लोगों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। गौरतलब है कि बैठे रहने की वजह से रीढ़ में जकड़न और कमर दर्द की समस्या आज एक आम शिकायत बन चुकी है।

चक्रासन के स्वास्थ्य लाभ

आयुष मंत्रालय द्वारा समर्थित जानकारी के अनुसार, चक्रासन के प्रमुख फायदों में शामिल हैं:

रीढ़ और कमर की मज़बूती: यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और कमर दर्द को नियंत्रित करने में प्रभावी माना जाता है। आँखों की रोशनी: नियमित अभ्यास से आँखों की रक्त आपूर्ति बेहतर होती है, जिससे दृष्टि में सुधार के संकेत मिलते हैं। पाचन और कब्ज: पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और कब्ज से राहत मिलती है। मानसिक तनाव में कमी: यह आसन तंत्रिका तंत्र को शांत करता है, जिससे चिंता और तनाव कम होता है।

चक्रासन करने का सही तरीका

योग विशेषज्ञों द्वारा बताए गए सही अभ्यास-क्रम के अनुसार:

पहला चरण: पीठ के बल ज़मीन पर सीधे लेट जाएँ। दोनों घुटनों को मोड़ें और पैरों को कूल्हों के पास लाएँ, तलवे ज़मीन पर टिके रहें।

दूसरा चरण: दोनों हाथों को सिर के पास ले जाएँ — हथेलियाँ ज़मीन पर और उँगलियाँ कंधों की दिशा में रखें।

तीसरा चरण: सांस लेते हुए हथेलियों और पैरों पर ज़ोर डालकर शरीर को ऊपर उठाएँ। सिर को आराम से पीछे की ओर लटकने दें।

चौथा चरण: इस मुद्रा में 10 से 20 सेकंड तक बने रहें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें। इसके बाद धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में वापस आएँ।

किन्हें सावधानी बरतनी चाहिए

योग विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि यह एक उन्नत स्तर का आसन है। जिन लोगों को पहले से गंभीर कमर दर्द, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या कलाई की चोट हो, उन्हें इसे किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही आज़माना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए इस आसन से परहेज़ की सलाह दी जाती है।

दिनचर्या में कैसे शामिल करें

विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह के समय खाली पेट इस आसन का अभ्यास सर्वाधिक फलदायी होता है। शुरुआत में 2 से 3 बार करें और धीरे-धीरे अभ्यास को बढ़ाएँ। नियमित रूप से यदि रोज़ाना 5 से 10 मिनट चक्रासन का अभ्यास किया जाए, तो कुछ ही हफ्तों में शरीर में ऊर्जा का स्तर बेहतर होने और मानसिक स्थिरता बढ़ने की संभावना रहती है।

योग की यह परंपरा आज वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त कर चुकी है — और चक्रासन जैसे आसनों की वैज्ञानिक पड़ताल जारी है, जो इसे महज़ आस्था नहीं, एक साक्ष्य-समर्थित स्वास्थ्य-साधना के रूप में स्थापित कर रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मोटापा, तनाव — तेज़ी से बढ़ रही हैं और आयुष मंत्रालय योग को मुख्यधारा स्वास्थ्य नीति में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि सरकारी समर्थन स्वागत योग्य है, पर जब तक इन दावों के पीछे सहकर्मी-समीक्षित (peer-reviewed) शोध नहीं आता, तब तक इन्हें 'आधिकारिक' की बजाय 'पारंपरिक ज्ञान' के रूप में प्रस्तुत करना अधिक ईमानदार होगा। योग का प्रसार ज़रूरी है — पर वैज्ञानिक प्रमाण के साथ, केवल मंत्रालय के समर्थन के भरोसे नहीं।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रासन क्या है और इसे क्यों करना चाहिए?
चक्रासन एक योगासन है जिसमें शरीर को पीछे की ओर मोड़कर पहिये जैसा आकार दिया जाता है। यह रीढ़, कमर, हाथ और पेट की मांसपेशियों को एक साथ मज़बूत करता है और शरीर की लचीलापन बढ़ाता है।
चक्रासन करने का सही तरीका क्या है?
पीठ के बल लेटकर घुटने मोड़ें और पैरों को कूल्हों के पास रखें। हाथों को सिर के पास हथेलियाँ नीचे रखकर रखें, फिर साँस लेते हुए शरीर ऊपर उठाएँ। 10 से 20 सेकंड इस मुद्रा में रहें और सामान्य रूप से साँस लेते रहें।
चक्रासन के क्या स्वास्थ्य लाभ हैं?
आयुष मंत्रालय के अनुसार, चक्रासन से कमर-रीढ़ की समस्याएँ, कब्ज और आँखों की कमज़ोरी में राहत मिलती है। इसके अलावा यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करने में भी सहायक है।
चक्रासन कितनी देर और कितनी बार करना चाहिए?
योग विशेषज्ञों के अनुसार, रोज़ाना 5 से 10 मिनट का अभ्यास पर्याप्त है। शुरुआत में 2 से 3 बार करें और धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएँ। सुबह खाली पेट इसे करना सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।
किन्हें चक्रासन नहीं करना चाहिए?
गंभीर कमर दर्द, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या कलाई की चोट से पीड़ित लोगों को यह आसन विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को इस आसन से परहेज़ करने की सलाह दी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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