तनाव और गुस्से से मुक्ति के लिए अपनाएं शशांकासन
सारांश
Key Takeaways
- शशांकासन तनाव और गुस्से को कम करने में मदद करता है।
- यह शरीर को आराम और मन को शांति प्रदान करता है।
- इसका नियमित अभ्यास ऊर्जा को बढ़ाता है।
- यह आसन सभी उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आज की व्यस्त ज़िंदगी में हम अक्सर ज़िम्मेदारियों और चिंताओं में इतना खो जाते हैं कि अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी करने लगते हैं। इसका परिणाम तनाव, थकान और बेचैनी की समस्याओं के रूप में सामने आता है। इसलिए यह आवश्यक है कि हम अपने शरीर और मन को कुछ समय दें।
योग एक सरल और प्रभावी उपाय है जो हमें इस स्थिति से बाहर निकाल सकता है। योग के कई आसनों में से एक है शशांकासन, जो न केवल शरीर को आराम देता है बल्कि मन को भी शांति प्रदान करता है। नियमित रूप से इसे करने से तनाव कम होता है और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
'शशक' संस्कृत में खरगोश को कहते हैं और 'आसन' का अर्थ है 'मुद्रा'। जैसे खरगोश संकट के समय खुद को सिकोड़कर शांत हो जाता है, वैसे ही शशांकासन करने से अभ्यासकर्ता को भी आराम और शांति का अनुभव होता है।
आयुष मंत्रालय इसे रोजाना करने की सलाह देता है। यह आसन तनाव, चिंता और गुस्से को कम करने में सहायक है, साथ ही यह पीठ के निचले हिस्से, रीढ़ की हड्डी की लचीलापन और पाचन तंत्र को सुधारने में मदद करता है, जिससे यह सभी उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है।
इसे करना बहुत आसान है। सबसे पहले, योगा मैट पर व्रजासन में बैठें (पैर मोड़कर बैठें और रीढ़ की हड्डी सीधी रखें)। अब गहरी सांस लेते हुए हाथों को ऊपर उठाएं और धीरे-धीरे शरीर को नीचे की ओर झुकाएं। फिर माथे और हाथों की हथेलियों को जमीन पर रखें। अपनी सुविधा अनुसार इस स्थिति में बैठकर सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं। इस आसन को १० से १५ मिनट तक दोहराना फायदेमंद होता है।
गंभीर पीठ दर्द, उच्च रक्तचाप, हर्निया या गर्दन/घुटने में चोट होने पर इस आसन का अभ्यास न करें।