कपिल मिश्रा का केजरीवाल पर तीखा वार: 'बापू जिंदा होते तो लाठी लेकर दिल्ली की सड़कों पर दौड़ा देते'
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सारांश
केजरीवाल के 'सत्याग्रह' के ऐलान पर भाजपा का पलटवार तीखा है — कपिल मिश्रा ने बापू का नाम लेकर उन्हें 'चोर और भ्रष्टाचारी' कहा। आबकारी नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच पर अविश्वास जताते हुए केजरीवाल ने कोर्ट बहिष्कार का फैसला किया है — यह टकराव अब सड़क से अदालत तक फैल चुका है।
Key Takeaways
- कपिल मिश्रा ने 28 अप्रैल को 'एक्स' पर केजरीवाल के सत्याग्रह को 'ड्रामा' बताते हुए तीखा हमला बोला।
- अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने राजघाट जाकर महात्मा गांधी का आशीर्वाद लेने की घोषणा की।
- केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश होने से इनकार किया।
- केजरीवाल ने न्याय की उम्मीद खत्म होने का दावा करते हुए आबकारी नीति मामले में कोर्ट कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया।
- भाजपा ने सत्याग्रह को राजनीतिक नाटक बताया, जबकि AAP इसे गांधीवादी प्रतिरोध का रूप दे रही है।
दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने 28 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर तीखा हमला बोला। मिश्रा ने केजरीवाल के 'सत्याग्रह' के ऐलान को 'ड्रामा' करार दिया और महात्मा गांधी के नाम का हवाला देते हुए उन पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर निशाना साधा।
क्या बोले कपिल मिश्रा
मिश्रा ने अपनी पोस्ट में लिखा,
Point of View
राजनीतिक संदेश अधिक लगता है — जब अदालत में स्थिति कमज़ोर हो, तो जनता की अदालत में जाना पुरानी राजनीतिक चाल है। दूसरी तरफ, भाजपा का बापू के नाम पर पलटवार भी चुनावी लाभ की दृष्टि से गणना किया गया प्रतीत होता है। असली सवाल यह है कि आबकारी नीति मामले में न्यायिक प्रक्रिया से मुँह मोड़ना केजरीवाल की विश्वसनीयता को मज़बूत करेगा या कमज़ोर — क्योंकि गांधी का सत्याग्रह सत्ता के विरुद्ध था, न्यायपालिका के विरुद्ध नहीं।
NationPress
28/04/2026
Frequently Asked Questions
कपिल मिश्रा ने केजरीवाल पर क्या आरोप लगाए?
कपिल मिश्रा ने 'एक्स' पर पोस्ट कर केजरीवाल को 'चोर और भ्रष्टाचारी' बताया और कहा कि बापू जीवित होते तो लाठी लेकर उन्हें दिल्ली की सड़कों पर दौड़ा देते। उन्होंने केजरीवाल के सत्याग्रह को महज़ 'ड्रामा' करार दिया।
केजरीवाल ने सत्याग्रह का रास्ता क्यों चुना?
अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच से निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है। इसी आधार पर उन्होंने अंतरात्मा की आवाज़ पर सत्याग्रह का मार्ग अपनाने और कोर्ट कार्यवाही का बहिष्कार करने का फैसला लिया।
केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को पत्र में क्या लिखा?
केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे पत्र में स्पष्ट किया कि वह न तो खुद और न ही अपने वकीलों के ज़रिए इस बेंच के सामने पेश होंगे। उन्होंने पत्र में कहा कि इंसाफ मिलने की उम्मीद अब पूरी तरह खत्म हो चुकी है।
यह विवाद किस मामले से जुड़ा है?
यह पूरा विवाद दिल्ली आबकारी नीति मामले से जुड़ा है, जिसमें केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया आरोपी हैं। इसी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।
राजघाट यात्रा का क्या उद्देश्य था?
केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने मंगलवार दोपहर 12 बजे राजघाट जाकर महात्मा गांधी का आशीर्वाद लेने की घोषणा की थी। इसे AAP ने सत्याग्रह की शुरुआत के प्रतीकात्मक कदम के रूप में प्रस्तुत किया।