लोक गायक करनैल राणा की चेतावनी: आधुनिकता की आड़ में विकृत हो रही हिमाचली लोक संस्कृति
सारांश
मुख्य बातें
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक करनैल राणा ने शनिवार, 16 मई को चंडीगढ़ के सीएम कॉलेज में वर्ल्ड हिमाचली ऑर्गनाइजेशन द्वारा आयोजित पहले वार्षिक महोत्सव में भाग लिया और हिमाचली लोक संस्कृति के बढ़ते क्षरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आधुनिकता की आड़ में कुछ लोग मूल लोक परंपराओं को विकृत कर रहे हैं, जिससे इस समृद्ध विरासत के लुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।
महोत्सव में प्रवासी हिमाचलियों की भागीदारी
इस आयोजन में हिमाचल प्रदेश से बाहर रह रहे प्रवासियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता देखकर करनैल राणा ने संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'आज के समय में जब हमारी प्राचीन संस्कृति धीरे-धीरे विलुप्त होने की कगार पर है, तब हिमाचल से बाहर रह रहे लोगों में इसे सुरक्षित रखने की गहरी जिज्ञासा और उत्सुकता देखना वाकई दिल छू लेने वाली है।' उन्होंने वर्ल्ड हिमाचली ऑर्गनाइजेशन और सभी आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताया।
विशेष रूप से उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि महोत्सव में छोटे-छोटे बच्चों ने न केवल भाग लिया, बल्कि पहाड़ी बोली, लोक कला और पारंपरिक खान-पान से जुड़कर उत्साहपूर्वक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। यह नई पीढ़ी की सांस्कृतिक जागरूकता का सकारात्मक संकेत है।
लोक संगीत उद्योग की वर्तमान स्थिति पर चिंता
करनैल राणा ने हिमाचली लोक संगीत उद्योग की मौजूदा दशा पर बात करते हुए कहा, 'हमारे हिमाचल की लोक संगीत इंडस्ट्री की शुरुआत तो बहुत शानदार हुई थी। हालांकि मैं यह नहीं कहूंगा कि आज अच्छा काम नहीं हो रहा, लेकिन कड़वा सच यह है कि कुछ लोग आधुनिकता में हमारी मूल लोक संस्कृति को विकृत कर रहे हैं, जिससे इसके खत्म होने का डर भी है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों द्वारा सहेजी गई मौलिक धुनें ही हमारी असली धरोहर हैं, और इन्हें आज के गानों के साथ रीमिक्स बनाने की होड़ में नष्ट किया जा रहा है।
हिमाचली लोक संगीत की आत्मा: पहाड़ों का संघर्ष
लोक गायक ने हिमाचली लोक संगीत की विशिष्टता को समझाते हुए बताया, 'हिमाचली लोक संगीत असल में हमारे पहाड़ों के संघर्ष पर बना है। यही वजह है कि अगर हमारे यहां कोई नाचने-गाने वाला या उत्सव गीत है, तो उसमें भी विरह, अपनों से बिछड़ने का दर्द या उदासी का पुट जरूर नजर आएगा।' गौरतलब है कि हिमाचली लोक परंपरा सदियों से पहाड़ी जीवन की कठिनाइयों, प्रकृति और मानवीय भावनाओं का सजीव चित्रण करती रही है।
भाजपा सांसद सिकंदर कुमार की प्रतिक्रिया
हिमाचल प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद सिकंदर कुमार ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा, 'मैं वर्ल्ड हिमाचली ऑर्गनाइजेशन, उसके चेयरपर्सन, प्रेसिडेंट और पूरी टीम को इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के लिए बधाई देना चाहता हूं। हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए यह एक बहुत ही शानदार पहल है और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम लगातार होते रहने चाहिए, ताकि हमारी हिमाचली संस्कृति हमेशा जीवित रहे।' इस महोत्सव ने एक बार फिर रेखांकित किया कि प्रवासी समुदाय अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए सक्रिय प्रयास कर रहा है।