15 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कर्नाटक कैबिनेट ने शुभा हत्याकांड के दोषियों की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश की

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कर्नाटक कैबिनेट ने शुभा हत्याकांड के दोषियों की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश की

सारांश

दो दशक पुराना बेंगलुरु का रिंग रोड शुभा हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में है। कर्नाटक कैबिनेट ने दोषियों की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश राज्यपाल को भेजने का फैसला किया है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय दोनों की मुहर के बाद यह मामला अब राज्यपाल के अंतिम निर्णय पर टिका है।

मुख्य बातें

कर्नाटक कैबिनेट ने 15 अक्टूबर 2026 को शुभा शंकरनारायण और डी.
अरुण वर्मा की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश राज्यपाल को भेजने का फैसला किया।
दोनों दोषियों को 3 दिसंबर 2003 में बीवी गिरीश की हत्या के मामले में IPC धारा 302 और 120-बी के तहत आजीवन कारावास की सजा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने 14 जुलाई 2025 को याचिकाकर्ताओं को राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था।
दया याचिकाएँ संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत की गई थीं।
अब कर्नाटक के राज्यपाल अंतिम निर्णय लेंगे; राज्य द्वारा याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश के बाद आजीवन कारावास बहाल रहने की संभावना।

कर्नाटक कैबिनेट ने 15 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के चर्चित रिंग रोड शुभा हत्याकांड में दोषी ठहराए गए शुभा शंकरनारायण और डी. अरुण वर्मा की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश राज्यपाल को भेजने का निर्णय लिया है। राज्य के गृह, सूचना प्रौद्योगिकी एवं जैव प्रौद्योगिकी तथा ई-गवर्नेंस विभागों के प्रभारी मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को यह जानकारी दी। यह मामला 3 दिसंबर 2003 की उस हत्या से जुड़ा है, जिसने पूरे बेंगलुरु को हिलाकर रख दिया था।

हत्याकांड की पृष्ठभूमि

पीड़ित बीवी गिरीश, 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे जो इंटेल में कार्यरत थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, शुभा से सगाई के महज चार दिन बाद उन्हें बाहरी रिंग रोड क्षेत्र में विमान उतरते देखने के बहाने बुलाया गया। आरोप है कि वहाँ शुभा के साथियों ने उन पर धातु की छड़ से हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई।

जाँचकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शुभा ने अरुण वर्मा — जिनके साथ वह कथित तौर पर संबंध में थी — और दो अन्य आरोपियों वेंकटेश तथा दिनेश के साथ मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रची। यह मामला सुप्रीम कोर्ट संख्या 314/2004 के रूप में दर्ज है और बेंगलुरु की 17वीं फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई हुई थी।

न्यायालयों का फैसला

शुभा, अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया गया और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कर्नाटक उच्च न्यायालय ने इस दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा, जिसे बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी पुष्टि की।

दया याचिका और सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

दया याचिकाएँ संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत प्रस्तुत की गई थीं, जो राज्यपाल को क्षमादान, सजा में राहत, मोहलत या सजा में कमी देने का अधिकार देता है। 14 जुलाई 2025 के एक आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि याचिकाओं पर विचार और निर्णय होने तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए और उनकी सजा निलंबित रखी जाए। राज्यपाल कार्यालय ने बाद में इन याचिकाओं को राज्य सरकार के पास उसकी राय के लिए भेज दिया था।

कर्नाटक कैबिनेट का निर्णय

मंत्री खड़गे ने बताया कि कैबिनेट ने सभी पहलुओं पर विचार के बाद दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश करने का निर्णय लिया है। यह सिफारिश अब राज्यपाल को भेजी जाएगी, जिनके पास अनुच्छेद 161 के तहत अंतिम निर्णय का अधिकार होगा। गौरतलब है कि यह मामला दो दशकों से अधिक समय से न्यायिक प्रक्रिया में है और अब निर्णायक दौर में पहुँच गया है।

आगे क्या होगा

कैबिनेट की सिफारिश प्राप्त होने के बाद कर्नाटक के राज्यपाल दया याचिकाओं पर अंतिम फैसला लेंगे। यदि राज्यपाल भी याचिकाएँ खारिज करते हैं, तो दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बहाल रहेगी। यह निर्णय उन परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है जो दो दशकों से इस मामले में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अंतिम निर्णय राज्यपाल पर निर्भर है — और अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल का विवेकाधिकार असीमित नहीं है, जैसा कि कई पूर्व संवैधानिक पीठों ने रेखांकित किया है। पीड़ित परिवार के लिए यह प्रतीक्षा न्याय की सीमाओं और संवैधानिक प्रक्रिया की वास्तविकता दोनों को एक साथ सामने रखती है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रिंग रोड शुभा हत्याकांड क्या है?
यह बेंगलुरु का एक चर्चित हत्या मामला है जिसमें 3 दिसंबर 2003 को इंटेल में कार्यरत 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर बीवी गिरीश की हत्या की गई थी। सगाई के महज चार दिन बाद उनकी हत्या कथित तौर पर उनकी मंगेतर शुभा शंकरनारायण और उसके साथियों ने आउटर रिंग रोड पर साजिश रचकर की थी।
शुभा और अरुण वर्मा को क्या सजा मिली है?
शुभा शंकरनारायण, डी. अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया गया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कर्नाटक उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने इस सजा को बरकरार रखा है।
कर्नाटक कैबिनेट ने दया याचिकाओं पर क्या निर्णय लिया?
कर्नाटक कैबिनेट ने 15 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल को शुभा और अरुण वर्मा की दया याचिकाएँ खारिज करने की सिफारिश भेजने का निर्णय लिया। मंत्री प्रियांक खड़गे ने यह जानकारी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में क्या निर्देश दिया था?
14 जुलाई 2025 के आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं को राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दायर करने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया था। साथ ही यह भी निर्देश दिया था कि याचिकाओं पर विचार होने तक उन्हें गिरफ्तार न किया जाए और सजा निलंबित रखी जाए।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
कर्नाटक कैबिनेट की सिफारिश मिलने के बाद राज्यपाल संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत दया याचिकाओं पर अंतिम निर्णय लेंगे। यदि राज्यपाल भी याचिकाएँ खारिज करते हैं, तो दोनों दोषियों की आजीवन कारावास की सजा बहाल रहेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 5 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले