31 अक्टूबर 2026
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सौजन्या हत्याकांड: कर्नाटक एसआईटी ने 14 साल बाद धर्मस्थल में क्राइम सीन री-क्रिएट किया, मिट्टी के नमूने जब्त

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सौजन्या हत्याकांड: कर्नाटक एसआईटी ने 14 साल बाद धर्मस्थल में क्राइम सीन री-क्रिएट किया, मिट्टी के नमूने जब्त

सारांश

14 साल बाद न्याय की उम्मीद फिर जागी — सर्वोच्च न्यायालय के कड़े आदेश पर कर्नाटक एसआईटी ने धर्मस्थल में सौजन्या के अपराध स्थल को री-क्रिएट किया, फोरेंसिक टीम ने मिट्टी के नमूने जब्त किए। पीड़ित परिवार की लंबी लड़ाई अब एक नए मोड़ पर है।

मुख्य बातें

31 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक एसआईटी ने धर्मस्थल में सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामले के क्राइम सीन को री-क्रिएट किया।
जांच का नेतृत्व एसआईटी एसपी लोकेश बी.
जगलासर और एसीपी मनोज कुमार नाइक ने किया; एफएसएल और एसओसीओ विशेषज्ञ बेंगलुरु से बुलाए गए।
21 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व जांच में लापरवाही की आलोचना करते हुए 90 दिनों में नई जांच पूरी करने का आदेश दिया।
अक्टूबर 2012 में 17 वर्षीय सौजन्या की दुष्कर्म और हत्या हुई थी; संतोष राव को जून 2023 में सबूतों के अभाव में बरी किया गया।
सौजन्या की माँ कुसुमावती गौड़ा की सर्वोच्च न्यायालय में अपील के बाद यह नई जांच संभव हुई।
घटनास्थल से एकत्र मिट्टी के नमूने फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजे जाएँगे।

कर्नाटक की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने 31 अक्टूबर 2026 को धर्मस्थल के समीप सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामले के अपराध स्थल को री-क्रिएट किया और घटनास्थल से मिट्टी के नमूने एकत्र किए। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के 21 सितंबर 2026 के उस आदेश के तहत की गई, जिसमें न्यायालय ने पूर्व जांच एजेंसियों की लापरवाही की कड़ी आलोचना करते हुए नए सिरे से जांच का निर्देश दिया था। अक्टूबर 2012 में 17 वर्षीय छात्रा सौजन्या की दुष्कर्म और हत्या का यह मामला अब तक न्याय की प्रतीक्षा में है।

घटनास्थल पर क्या हुआ

एसआईटी की टीम ने उस वन क्षेत्र में पहुँचकर पूरे घटनाक्रम को री-क्रिएट किया, जहाँ से सौजन्या को बस से उतरने के बाद कथित तौर पर अगवा किया गया था और जहाँ बाद में नेत्रावती नदी के पास उसका शव मिला था। घटनास्थल को बैरिकेड और सुरक्षा टेप से पूरी तरह घेर दिया गया था और आम जनता का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा।

उस सड़क को भी बैरिकेड किया गया जो उस वन क्षेत्र से सटी है जहाँ से सौजन्या को कथित तौर पर अगवा किया गया था। अधिकारियों ने शव मिलने वाले स्थान की मिट्टी को भी संरक्षित किया है, जिसे फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

जांच दल और विशेषज्ञों की भागीदारी

जांच का नेतृत्व एसआईटी एसपी लोकेश बी. जगलासर और एसीपी मनोज कुमार नाइक ने किया। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) और क्राइम सीन ऑफिसर्स (एसओसीओ) टीम के विशेषज्ञ विशेष रूप से बेंगलुरु से इस जांच में सहयोग के लिए आए। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के इंजीनियर भी इस संयुक्त दल का हिस्सा रहे।

सौजन्या के रिश्तेदार पुरंदरा गौड़ा और तुकाराम गौड़ा भी निरीक्षण के दौरान मौजूद थे। पुरंदरा गौड़ा ने अपराध के बाद सबसे पहले सौजन्या का शव देखा था और वे इस मामले में शिकायतकर्ता भी हैं। धर्मस्थल पुलिस स्टेशन के कर्मियों को घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए तैनात किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2012 में धर्मस्थल के पास उजिरे की रहने वाली 17 वर्षीय प्री-यूनिवर्सिटी छात्रा सौजन्या लापता हो गई थी। बाद में नेत्रावती नदी के पास उसका शव मिला, जिस पर यौन उत्पीड़न और मारपीट के गंभीर निशान थे। प्रारंभिक जांच में संतोष राव को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सीबीआई की विशेष अदालत ने जून 2023 में पर्याप्त सबूतों के अभाव में उन्हें बरी कर दिया।

गौरतलब है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 2024 में आगे की जांच की माँग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद सौजन्या की माँ कुसुमावती गौड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की। 21 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व के फैसलों को रद्द करते हुए कर्नाटक पुलिस, अपराध शाखा और सीबीआई की लापरवाही की कड़ी आलोचना की और नए सिरे से जांच का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय का हस्तक्षेप और एसआईटी गठन

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार कर्नाटक पुलिस को 90 दिनों की समयसीमा में एसआईटी जांच पूरी करनी है। न्यायालय ने पिछली जांच एजेंसियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में न्याय सुनिश्चित करना राज्य की जिम्मेदारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में जांच की गुणवत्ता और न्यायिक विलंब को लेकर देशभर में बहस तेज है। यह मामला न्याय व्यवस्था की धीमी गति का प्रतीक बन चुका है — घटना के 14 वर्ष बाद भी पीड़ित परिवार न्याय का इंतजार कर रहा है।

आगे की राह

एकत्र किए गए मिट्टी के नमूने और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे जाएँगे। एसआईटी को सर्वोच्च न्यायालय की निर्धारित समयसीमा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। पीड़ित परिवार और मानवाधिकार संगठन इस जांच की प्रगति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

कर्नाटक पुलिस और अपराध शाखा — तीन एजेंसियों की विफलता पर न्यायालय की आलोचना इस बात का संकेत है कि जांच तंत्र में संरचनात्मक खामियाँ हैं। अब जबकि फोरेंसिक टीम वर्षों पुराने अपराध स्थल से साक्ष्य जुटा रही है, असली सवाल यह है कि इतने लंबे समय बाद मिले नमूने न्यायिक कसौटी पर कितने खरे उतरेंगे। पीड़ित परिवार की यह लड़ाई केवल एक मामले की नहीं, बल्कि उस हर परिवार की आवाज़ है जो व्यवस्था के भरोसे न्याय की राह देखता रहता है।
RashtraPress
31 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामला क्या है?
अक्टूबर 2012 में कर्नाटक के धर्मस्थल के पास उजिरे की 17 वर्षीय प्री-यूनिवर्सिटी छात्रा सौजन्या लापता हो गई थी और बाद में नेत्रावती नदी के पास उसका शव मिला, जिस पर यौन उत्पीड़न और मारपीट के गंभीर निशान थे। यह मामला 14 वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया में है और अब सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर नई जांच हो रही है।
सर्वोच्च न्यायालय ने नई जांच का आदेश क्यों दिया?
21 सितंबर 2026 को सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक पुलिस, अपराध शाखा और सीबीआई की जांच में गंभीर लापरवाही पाई और पूर्व के फैसलों को रद्द करते हुए 90 दिनों में नई एसआईटी जांच का आदेश दिया। सौजन्या की माँ कुसुमावती गौड़ा ने कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा 2024 में याचिका खारिज होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी।
संतोष राव को बरी क्यों किया गया था?
सीबीआई की विशेष अदालत ने जून 2023 में संतोष राव को इस आधार पर बरी किया कि उन्हें अपराध से जोड़ने वाले पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं थे। हालाँकि उन्हें प्रारंभिक जांच में ही गिरफ्तार किया गया था।
31 अक्टूबर को क्राइम सीन री-क्रिएशन में क्या किया गया?
एसआईटी ने धर्मस्थल के वन क्षेत्र में घटनाक्रम को री-क्रिएट किया, मिट्टी के नमूने एकत्र किए और फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए। एफएसएल, एसओसीओ और पीडब्ल्यूडी इंजीनियरों की संयुक्त टीम ने एसआईटी की सहायता की और पूरे क्षेत्र को बैरिकेड कर आम जनता का प्रवेश प्रतिबंधित रखा गया।
इस मामले में आगे क्या होगा?
एकत्र किए गए फोरेंसिक नमूने प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजे जाएँगे और एसआईटी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 90 दिनों की समयसीमा में अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जांच की प्रगति पर पीड़ित परिवार और न्यायालय दोनों की नजर है।
राष्ट्र प्रेस
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