सौजन्या हत्याकांड: कर्नाटक एसआईटी ने मंगलुरु में नए सिरे से जांच शुरू की, 3 माह में रिपोर्ट देनी होगी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने 1 अक्टूबर 2026 को मंगलुरु में 2012 के धर्मस्थल सामूहिक दुष्कर्म और सौजन्या हत्याकांड की आधिकारिक रूप से नए सिरे से जांच शुरू कर दी है। यह जांच सर्वोच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन में शुरू की गई है, जिसमें कर्नाटक सरकार को एसआईटी गठित कर मामले की पुनः जांच करने और तीन महीने के भीतर सक्षम अदालत में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया था।
मंगलुरु पहुंची एसआईटी टीम
एसआईटी के सदस्य इंटेलिजेंस एसपी निशा जेम्स और सीआईडी एसपी लोकेश जगलासर गुरुवार सुबह मंगलुरु पहुंचे और पुलिस कमिश्नर सी.एच. सुधीर कुमार रेड्डी से मुलाकात की। पुलिस कमिश्नर रेड्डी स्वयं भी एसआईटी के सदस्य हैं। तीनों अधिकारियों ने जांच की रणनीति और अगले कदमों पर विस्तार से चर्चा की। जांच को सुव्यवस्थित ढंग से चलाने के लिए एसआईटी का एक अलग कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा।
एसआईटी का गठन और संरचना
कर्नाटक सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद 24 सितंबर 2026 को पाँच सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। इस दल का नेतृत्व आईजीपी एन. शशिकुमार कर रहे हैं। टीम में मंगलुरु सिटी पुलिस कमिश्नर सी.एच. सुधीर कुमार रेड्डी, इंटेलिजेंस एसपी निशा जेम्स, सीआईडी एसपी लोकेश जगलासर और बेंगलुरु ग्रामीण एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना शामिल हैं। हालाँकि, एएसपी वेंकटेश प्रसन्ना ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर एसआईटी से हटाने की माँग की है। बताया जा रहा है कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और सौजन्या के परिजनों ने टीम में उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी।
सरकार की प्रतिक्रिया
राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार को स्पष्ट किया कि सरकार इस मामले में न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'एसआईटी का गठन नेक इरादे से किया गया था। हमारी कोई गलत मंशा नहीं है और न ही किसी को नुकसान पहुंचाने का इरादा है। हमारा उद्देश्य सच्चाई को सामने लाना और न्याय सुनिश्चित करना है।' खड़गे ने यह भी कहा कि सरकार टीम की संरचना को लेकर परिजनों और जनता द्वारा उठाई गई चिंताओं पर विचार करेगी और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के दायरे में ही कार्य करेगी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अक्टूबर 2012 का है, जब दक्षिण कन्नड़ जिले के धर्मस्थला क्षेत्र में 17 वर्षीय कॉलेज छात्रा सौजन्या के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना हुई थी। यह मामला तब से विवादास्पद बना हुआ है, क्योंकि राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के बावजूद न्याय नहीं मिल सका। गौरतलब है कि सीबीआई द्वारा नामित मुख्य आरोपी को अदालत ने बरी कर दिया था, जिसके बाद पीड़िता के परिजन और सामाजिक संगठन नए सिरे से जांच की माँग करते रहे। यह ऐसे समय में है जब कर्नाटक में यौन अपराधों के मामलों में जांच की गुणवत्ता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
आगे की राह
एसआईटी को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित तीन महीने की समयसीमा में जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट सक्षम अदालत को सौंपनी है। जांच की दिशा और दायरा तय करने के लिए टीम अगले कुछ दिनों में पुराने साक्ष्यों, गवाहों और घटनास्थल की समीक्षा करेगी। इस मामले के नतीजे पर पूरे कर्नाटक की नज़र है।