सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामला 2012: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक सरकार ने बनाई एसआईटी, 3 महीने में रिपोर्ट का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक सरकार ने 25 सितंबर 2026 को 2012 के सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामले की नए सिरे से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के 21 सितंबर 2026 के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें न्यायालय ने मामले की संपूर्ण पुनर्जांच का निर्देश दिया था। एसआईटी को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर संबंधित अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
अक्टूबर 2012 में मंगलुरु जिले के बेल्थंगडी तालुक की 17 वर्षीया सौजन्या, जो उजिरे के एसडीएम कॉलेज में द्वितीय वर्ष की प्री-यूनिवर्सिटी छात्रा थीं, कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थीं। परिवार ने 9 अक्टूबर 2012 को बेल्थंगडी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले ही दिन मन्नासांका के पास झाड़ियों में उनका शव बरामद हुआ, जिसके बाद दुष्कर्म और हत्या की धाराएँ जोड़ी गईं।
गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक में न्यायिक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। शुरुआत में बेल्थंगडी पुलिस ने जांच की, फिर मामला कर्नाटक सीआईडी और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया।
बरी होने और विवाद का सिलसिला
पुलिस ने संतोष राव को एकमात्र आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया और उनके विरुद्ध मुकदमा चलाया। हालाँकि, जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत ने संतोष राव को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस फैसले को सीबीआई ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी।
यह ऐसे समय में आया है जब पीड़िता के परिवार और सामाजिक संगठन वर्षों से न्याय की माँग करते रहे हैं। मामले की जांच में एजेंसियों के बदलाव और अभियोजन की विफलता ने व्यापक आलोचना को जन्म दिया।
सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश
21 सितंबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की नए सिरे से संपूर्ण जांच का निर्देश देते हुए कर्नाटक सरकार को एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले इस मामले की जांच में शामिल रहे किसी भी अधिकारी को नई एसआईटी में नहीं रखा जाए — यह निर्देश जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।
एसआईटी की संरचना
सरकारी आदेश के अनुसार, आईपीएस अधिकारी एन. शशिकुमार को नई एसआईटी का प्रमुख नियुक्त किया गया है। टीम में सीके सुधीर कुमार रेड्डी, निखिला जेम्स, लोकेश जगलासर और वेंकटेश प्रसन्ना को भी शामिल किया गया है। एसआईटी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जांच करेगी और तीन महीने के भीतर संबंधित अदालत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और नई एसआईटी के गठन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चौदह वर्ष पुराने इस मामले में ताज़ी जांच कोई नया तथ्य सामने ला पाएगी। सौजन्या के परिवार और न्याय की माँग करने वाले संगठनों के लिए यह एसआईटी उम्मीद की एक नई किरण है। एसआईटी की रिपोर्ट अदालत में दाखिल होने के बाद ही मामले की अगली कानूनी दिशा तय होगी।