25 सितंबर 2026
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सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामला 2012: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक सरकार ने बनाई एसआईटी, 3 महीने में रिपोर्ट का निर्देश

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सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामला 2012: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कर्नाटक सरकार ने बनाई एसआईटी, 3 महीने में रिपोर्ट का निर्देश

सारांश

चौदह साल पुराने सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामले में न्याय की लड़ाई एक निर्णायक मोड़ पर आ गई है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर कर्नाटक सरकार ने एसआईटी गठित की है, जिसे तीन महीने में रिपोर्ट देनी है। संतोष राव के बरी होने के बाद यह जांच न्यायिक जवाबदेही की कसौटी बनेगी।

मुख्य बातें

कर्नाटक सरकार ने 25 सितंबर 2026 को 2012 के सौजन्या दुष्कर्म-हत्या मामले की पुनर्जांच के लिए एसआईटी का गठन किया।
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ के माध्यम से यह आदेश दिया था।
शशिकुमार एसआईटी के प्रमुख होंगे; पहले की जांच में शामिल अधिकारियों को टीम से बाहर रखा गया है।
एकमात्र आरोपी संतोष राव को जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में बरी किया था।
एसआईटी को तीन महीने के भीतर संबंधित अदालत में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

कर्नाटक सरकार ने 25 सितंबर 2026 को 2012 के सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामले की नए सिरे से जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। यह कदम सर्वोच्च न्यायालय के 21 सितंबर 2026 के उस आदेश के बाद उठाया गया है, जिसमें न्यायालय ने मामले की संपूर्ण पुनर्जांच का निर्देश दिया था। एसआईटी को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर संबंधित अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

मामले की पृष्ठभूमि

अक्टूबर 2012 में मंगलुरु जिले के बेल्थंगडी तालुक की 17 वर्षीया सौजन्या, जो उजिरे के एसडीएम कॉलेज में द्वितीय वर्ष की प्री-यूनिवर्सिटी छात्रा थीं, कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थीं। परिवार ने 9 अक्टूबर 2012 को बेल्थंगडी पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। अगले ही दिन मन्नासांका के पास झाड़ियों में उनका शव बरामद हुआ, जिसके बाद दुष्कर्म और हत्या की धाराएँ जोड़ी गईं।

गौरतलब है कि यह मामला कर्नाटक में न्यायिक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है। शुरुआत में बेल्थंगडी पुलिस ने जांच की, फिर मामला कर्नाटक सीआईडी और बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया।

बरी होने और विवाद का सिलसिला

पुलिस ने संतोष राव को एकमात्र आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया और उनके विरुद्ध मुकदमा चलाया। हालाँकि, जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत ने संतोष राव को यह कहते हुए बरी कर दिया कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। इस फैसले को सीबीआई ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी।

यह ऐसे समय में आया है जब पीड़िता के परिवार और सामाजिक संगठन वर्षों से न्याय की माँग करते रहे हैं। मामले की जांच में एजेंसियों के बदलाव और अभियोजन की विफलता ने व्यापक आलोचना को जन्म दिया।

सर्वोच्च न्यायालय का ऐतिहासिक आदेश

21 सितंबर 2026 को जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की नए सिरे से संपूर्ण जांच का निर्देश देते हुए कर्नाटक सरकार को एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले इस मामले की जांच में शामिल रहे किसी भी अधिकारी को नई एसआईटी में नहीं रखा जाए — यह निर्देश जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

एसआईटी की संरचना

सरकारी आदेश के अनुसार, आईपीएस अधिकारी एन. शशिकुमार को नई एसआईटी का प्रमुख नियुक्त किया गया है। टीम में सीके सुधीर कुमार रेड्डी, निखिला जेम्स, लोकेश जगलासर और वेंकटेश प्रसन्ना को भी शामिल किया गया है। एसआईटी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए जांच करेगी और तीन महीने के भीतर संबंधित अदालत में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और नई एसआईटी के गठन के बाद अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या चौदह वर्ष पुराने इस मामले में ताज़ी जांच कोई नया तथ्य सामने ला पाएगी। सौजन्या के परिवार और न्याय की माँग करने वाले संगठनों के लिए यह एसआईटी उम्मीद की एक नई किरण है। एसआईटी की रिपोर्ट अदालत में दाखिल होने के बाद ही मामले की अगली कानूनी दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

सीआईडी, सीबीआई — जांच करती रहीं, फिर भी अभियोजन अदालत में टिक नहीं पाया। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्देश कि पिछली जांच में शामिल कोई भी अधिकारी एसआईटी में नहीं होगा, स्पष्ट संदेश है कि पूर्व जांच विश्वसनीयता की कसौटी पर खरी नहीं उतरी। चौदह साल बाद भी न्याय का इंतजार यह प्रश्न उठाता है कि क्या जांच एजेंसियों के बदलाव मात्र से जवाबदेही सुनिश्चित होती है, या इसके लिए जांच की गुणवत्ता और अभियोजन की तैयारी में बुनियादी सुधार ज़रूरी है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सौजन्या दुष्कर्म और हत्या मामला क्या है?
यह अक्टूबर 2012 का मामला है जिसमें मंगलुरु जिले के बेल्थंगडी तालुक की 17 वर्षीया छात्रा सौजन्या कॉलेज से घर लौटते समय लापता हो गई थीं और अगले दिन उनका शव झाड़ियों में मिला था। इसके बाद मामले में दुष्कर्म और हत्या की धाराएँ जोड़ी गईं और संतोष राव को एकमात्र आरोपी बनाया गया।
कर्नाटक सरकार ने एसआईटी क्यों बनाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने 21 सितंबर 2026 को मामले की नए सिरे से संपूर्ण जांच का आदेश दिया, जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने 25 सितंबर 2026 को एसआईटी गठित की। जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा आरोपी संतोष राव को बरी किए जाने के बाद सीबीआई ने इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी।
नई एसआईटी में कौन-कौन शामिल हैं?
आईपीएस अधिकारी एन. शशिकुमार को एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है। टीम में सीके सुधीर कुमार रेड्डी, निखिला जेम्स, लोकेश जगलासर और वेंकटेश प्रसन्ना भी शामिल हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार पहले की जांच में शामिल किसी भी अधिकारी को इस टीम में नहीं रखा गया है।
एसआईटी को कितने समय में रिपोर्ट देनी होगी?
सरकारी आदेश के अनुसार एसआईटी को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर संबंधित अदालत में अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी।
संतोष राव को अदालत ने क्यों बरी किया था?
जून 2023 में सीबीआई की विशेष अदालत ने संतोष राव को इस आधार पर बरी किया कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत करने में असफल रहा। इसके बाद सीबीआई ने इस फैसले को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी और अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने ताज़ी जांच का आदेश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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