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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद: एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव की असहमति वाला वीडियो वायरल

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कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद: एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव की असहमति वाला वीडियो वायरल

सारांश

कर्नाटक मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ गई हैं — पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव की निजी बातचीत का वीडियो वायरल हो गया है, जिसमें चयन मानदंडों पर सवाल उठाए गए हैं। पार्टी नेतृत्व मनाने में जुटा है, पर असंतोष थमने का नाम नहीं ले रहा।

मुख्य बातें

पाटिल और दिनेश गुंडू राव के बीच हुई निजी बातचीत का वीडियो 6 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
वीडियो में नेता मंत्रिमंडल चयन के मानदंडों पर खुलकर सवाल उठाते दिख रहे हैं।
गुंडू राव ने मंत्रिमंडल विस्तार को 'बंद अध्याय' बताया, लेकिन माना कि कई समुदायों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
एएचआईएनडीए समूह के विधायकों में भी चयन प्रक्रिया को लेकर असंतोष बना हुआ है।
महादेवप्पा कथित तौर पर नई दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मिलने गए हैं।
शिवकुमार , सुरजेवाला और बी.के.
हरिप्रसाद असंतुष्ट नेताओं को मनाने में जुटे हैं।

कर्नाटक में हाल ही में संपन्न मंत्रिमंडल विस्तार के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के भीतर उपजी नाराजगी को थामने के प्रयास 6 अगस्त को उस वक्त और कठिन हो गए, जब पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव के बीच हुई निजी बातचीत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आ गया। इस वीडियो में दोनों वरिष्ठ नेता मंत्रियों के चयन के मानदंडों पर खुलकर सवाल उठाते दिख रहे हैं, जो बेंगलुरु में सत्तारूढ़ दल के लिए नई असहजता का कारण बन गया है।

वायरल वीडियो में क्या है

एच.के. पाटिल के आवास पर हुई इस बातचीत में कथित तौर पर एक नेता यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि मंत्रिमंडल में चयन के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए, यह समझ से परे है। वीडियो में नेता कहते सुनाई देते हैं, "चयन किस मानदंड पर किया गया? मुझे नहीं पता कि कौन से मानक अपनाए गए। मैंने पहली बार ऐसा कुछ देखा है। नए मानदंड अपनाए गए हैं और मैं चयन के आधार को समझ नहीं पा रहा हूँ।" इस दौरान एच.के. पाटिल मुस्कुराते हुए नज़र आते हैं।

गुंडू राव की सफाई और 'बंद अध्याय' वाला बयान

पाटिल से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री दिनेश गुंडू राव ने विवाद को कमतर आँकने की कोशिश की और कहा कि मंत्रिमंडल विस्तार अब 'बंद अध्याय' है। उन्होंने कहा, "हम कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। विधायक के तौर पर हमारी प्राथमिकता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों का विकास करना जारी रहेगी।"

गुंडू राव ने बताया कि वे पाटिल से मिलने इसलिए गए क्योंकि वे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और एक दिन पहले बी.के. हरिप्रसाद सहित कई अन्य नेताओं की मौजूदगी के कारण विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नए मंत्रिमंडल में कई समुदायों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है और ब्राह्मण समुदाय द्वारा प्रतिनिधित्व की माँग करना गलत नहीं है।

पार्टी नेतृत्व पर दबाव और मनाने के प्रयास

यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है जब मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद मंत्रिमंडल में जगह नहीं पाने वाले नेताओं को मनाने में जुटे हुए हैं। गौरतलब है कि कर्नाटक के विभिन्न हिस्सों से विरोध, इस्तीफे और असंतोष की आवाजें लगातार सामने आ रही हैं।

इसके अलावा, एएचआईएनडीए (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) समूह से जुड़े विधायकों में भी चयन प्रक्रिया को लेकर नाराजगी बताई जा रही है।

महादेवप्पा का दिल्ली दौरा और सिद्धारमैया कनेक्शन

सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा 6 अगस्त को नई दिल्ली रवाना हुए और उनके पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने की संभावना बताई जा रही है। सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले महादेवप्पा पहले भी कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से सार्वजनिक रूप से अलग रुख अपना चुके हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि कुछ विधायकों का मानना है कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सुरजेवाला के साथ हुई चर्चाओं के दौरान सीमित संख्या में ही नामों की सिफारिश की, जिससे उनके गुट में नाराजगी पैदा हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब कांग्रेस के सामने पार्टी में एकजुटता बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

आगे क्या होगा

पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों और नेताओं से संवाद जारी रखे हुए है, लेकिन वायरल वीडियो और महादेवप्पा के दिल्ली दौरे ने संकेत दिया है कि यह विवाद जल्द थमने वाला नहीं है। कांग्रेस के लिए अगली परीक्षा यह होगी कि वह विभिन्न गुटों और समुदायों की नाराजगी को किस तरह संतुलित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें दो मज़बूत गुटों के बीच शक्ति-संतुलन कभी स्थिर नहीं रहा। सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच का यह अदृश्य तनाव मंत्रिमंडल विस्तार में फूट के रूप में सामने आया है। विभिन्न जाति-समुदायों की नाराजगी — ब्राह्मण से लेकर एएचआईएनडीए तक — यह दर्शाती है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। यदि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को जल्द नहीं थामता, तो यह 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस की एकजुटता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक कैबिनेट विस्तार विवाद में वायरल वीडियो में क्या है?
वायरल वीडियो में पूर्व मंत्री एच.के. पाटिल और दिनेश गुंडू राव मंत्रिमंडल चयन के मानदंडों पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। वीडियो में एक नेता कहते सुनाई देते हैं कि चयन किस आधार पर किया गया, यह उन्हें समझ नहीं आया और उन्होंने पहले कभी ऐसे मानदंड नहीं देखे।
दिनेश गुंडू राव ने मंत्रिमंडल विस्तार पर क्या कहा?
दिनेश गुंडू राव ने मंत्रिमंडल विस्तार को 'बंद अध्याय' बताया और कहा कि विधायक के रूप में उनकी प्राथमिकता अपने निर्वाचन क्षेत्र का विकास करना है। हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि नए मंत्रिमंडल में कई समुदायों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
एच.सी. महादेवप्पा दिल्ली क्यों गए?
सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री एच.सी. महादेवप्पा 6 अगस्त को नई दिल्ली रवाना हुए और उनके कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने की संभावना है। महादेवप्पा सिद्धारमैया के करीबी माने जाते हैं और पहले भी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से अलग रुख अपना चुके हैं।
कर्नाटक कांग्रेस में कौन-कौन से गुट नाराज हैं?
मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एएचआईएनडीए (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) समूह के विधायकों के साथ-साथ ब्राह्मण समुदाय से प्रतिनिधित्व की माँग भी सामने आई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया के गुट के कई समर्थकों को अंतिम सूची में जगह नहीं मिली, जिससे उनमें भी नाराजगी है।
कांग्रेस नेतृत्व असंतोष शांत करने के लिए क्या कर रहा है?
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और केपीसीसी अध्यक्ष बी.के. हरिप्रसाद असंतुष्ट नेताओं से संवाद कर उन्हें मनाने में जुटे हैं। पार्टी इस असंतोष को आंतरिक स्तर पर सुलझाने की कोशिश कर रही है, लेकिन वायरल वीडियो ने इस प्रक्रिया को और कठिन बना दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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