कर्नाटक राज्यपाल सुधा यादव ने वंचित बच्चियों संग किया कन्या पूजन, स्कूल बैग-किताबें वितरित
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की राज्यपाल डॉ. सुधा यादव ने 18 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु के लोक भवन में आर्थिक रूप से कमज़ोर पृष्ठभूमि की बच्चियों के साथ पारंपरिक कन्या पूजन कर नवरात्रि महोत्सव मनाया। उन्होंने विशेष रूप से गांधीनगर के नागममनगर झुग्गी इलाके की बच्चियों को राजभवन परिसर में आमंत्रित किया और उनके साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों में पूरी श्रद्धा के साथ भाग लिया।
समारोह का आयोजन
रविवार को आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में राज्यपाल ने बच्चियों के माथे पर तिलक लगाया और नवरात्रि की परंपराओं के अनुसार समस्त रस्में निभाईं। उन्होंने बच्चियों में निहित दिव्य स्त्री शक्ति का सम्मान करते हुए पूजन की प्रत्येक विधि विधिवत पूरी की। अधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन पूर्णतः राज्यपाल की व्यक्तिगत इच्छा और पहल पर आधारित था।
बच्चियों के साथ आत्मीय पल
पूजन की औपचारिकताओं के बाद डॉ. यादव ने बच्चियों के साथ भोजन किया और बेहद अनौपचारिक माहौल में उनसे बातचीत की। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राज्यपाल स्वयं एक बच्ची की तरह उनके साथ घुल-मिल गईं, जिससे पूरे आयोजन में स्नेह और अपनेपन का वातावरण बन गया।
शिक्षा सामग्री का वितरण
उत्सव के दौरान राज्यपाल ने बच्चियों को स्कूल बैग, किताबें और अन्य स्टेशनरी सामग्री वितरित की। उन्होंने प्रत्येक बच्ची को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और शिक्षा को जीवन बदलने का सबसे सशक्त माध्यम बताया।
समावेशी कन्या पूजन का संदेश
अधिकारियों के अनुसार, झुग्गी-बस्ती की बच्चियों को लोक भवन आमंत्रित करने के पीछे राज्यपाल का उद्देश्य पारंपरिक 'कन्या पूजन' को अधिक समावेशी और सामाजिक दृष्टि से सार्थक बनाना था। यह ऐसे समय में आया है जब नवरात्रि पर्व पर समाज के सभी वर्गों को जोड़ने की पहल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। इस आयोजन ने उन बच्चियों को सामाजिक सहयोग और प्रोत्साहन देने के महत्व को भी रेखांकित किया, जिनकी संसाधनों तक पहुँच सीमित है।
आगे की दिशा
यह पहल राज्यपाल के बच्चों के सर्वांगीण कल्याण और शिक्षा के प्रति सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाती है। गौरतलब है कि वंचित वर्ग के बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक किंतु प्रेरणादायक आयोजन सामाजिक बदलाव की नींव रखने में सहायक माने जाते हैं।