कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की BJP नेताओं को चेतावनी — भड़काऊ बयान जारी रहे तो होगी जेल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बुधवार, 4 नवंबर 2026 को बेंगलुरु में स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावाडी नारायणस्वामी कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के विरुद्ध भड़काऊ एवं आपत्तिजनक बयानबाज़ी नहीं रोकते, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जेल भी हो सकती है। खड़गे ने मीडिया से बातचीत में कहा कि दोनों BJP नेताओं के बयानों में 'तथ्यों, जानकारी और मुद्दों की समझ का अभाव' है।
क्या है पूरा विवाद
विवाद की जड़ में चलावाडी नारायणस्वामी का वह कथित बयान है जो उन्होंने कोलार में BJP की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता मिटाओ' पदयात्रा के दौरान दिया था। कथित तौर पर उन्होंने कहा था कि अगर कांग्रेस देश में अराजकता फैलाना जारी रखती है तो BJP कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यकर्ताओं के 'टुकड़े टुकड़े कर उन्हें अरब सागर में फेंक देंगे।' इस बयान की कांग्रेस ने तीखी निंदा करते हुए इसे राजनीतिक विरोधियों को दी गई सीधी धमकी करार दिया था।
हालाँकि बाद में नारायणस्वामी ने ऐसा कोई बयान देने से इनकार किया और कहा कि उनकी बातों को 'तोड़ मरोड़कर' पेश किया गया।
खड़गे की सीधी प्रतिक्रिया
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने नारायणस्वामी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने खड़गे के गृह क्षेत्र की यात्रा के दौरान उन्हें 'कुत्ता' कहा था। खड़गे ने कहा, "ऐसे व्यक्ति में क्या कोई समझ है?" उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, "हम किसी के साथ अन्याय नहीं करेंगे और बिना कारण किसी को जेल नहीं भेजेंगे। कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत की जाएगी। अगर ऐसे बयान जारी रहे तो भविष्य में उनके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं।"
आरक्षण विवाद पर विजयेंद्र को घेरा
बी.वाई. विजयेंद्र पर खड़गे ने आरक्षण मुद्दे और कर्नाटक लोक सेवा आयोग विवाद को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि क्या विजयेंद्र ने बयान देने से पहले अदालत का फैसला ठीक से पढ़ा था। खड़गे ने कहा, "यदि एससी एसटी आरक्षण बढ़ाना था तो प्रस्ताव राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष रखा जाना चाहिए था। पिछली BJP सरकार ने यह प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं की? अदालत ने भी इस पर टिप्पणी की है।"
गौरतलब है कि विजयेंद्र ने बाद में अपने शब्दों पर खेद जताते हुए कहा था कि यदि उनकी टिप्पणी से किसी की भावनाएँ आहत हुई हैं तो वह माफी माँगते हैं।
राजनीतिक संदर्भ
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी BJP के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर है। आरक्षण नीति, लोक सेवा आयोग नियुक्तियाँ और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के आरोपों को लेकर दोनों दलों के बीच वाक् युद्ध लगातार तेज़ हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राज्य में सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा करते हैं।
आगे क्या होगा
खड़गे ने साफ कर दिया है कि सरकार 'कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई' करेगी। यदि दोनों BJP नेता अपने बयानों पर कायम रहते हैं तो राज्य सरकार की ओर से औपचारिक कानूनी कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नज़रें अब इस बात पर टिकी हैं कि BJP नेतृत्व इस चेतावनी पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह विवाद और आगे बढ़ता है।