प्रियांक खड़गे का BJP पर पलटवार — पिता मल्लिकार्जुन का बचाव, चुनिंदा राजनीति का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह, सूचना प्रौद्योगिकी और परिवहन मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार, 27 अक्टूबर 2026 को अपने पिता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का खुलकर बचाव किया। पटना में रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष पर हमले तेज़ कर दिए हैं। प्रियांक ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि वह एक गैर-मुद्दे को तूल देकर चुनिंदा राजनीति कर रही है।
प्रियांक का BJP पर पलटवार
प्रियांक खड़गे ने BJP के राजनीतिक मर्यादा बनाए रखने के दावों पर सीधा सवाल उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को लेकर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर, तथा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उनकी माता सोनिया गांधी को लेकर अतीत में अभद्र टिप्पणियाँ की हैं। उनके अनुसार, जो दल वर्षों से कांग्रेस नेतृत्व पर निशाना साधता रहा हो, उसका आज मर्यादा की दुहाई देना विरोधाभासी है।
BJP का विरोध प्रदर्शन
इस बीच, कर्नाटक BJP ने सोमवार को बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री-विरोधी टिप्पणियों के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन आर. अशोक और विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। BJP के सांसदों, विधायकों और एमएलसी ने एकजुट होकर खड़गे की भाषा की निंदा की और जवाबदेही की माँग की।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह ऐसे समय में आया है जब देश में कई राज्यों में चुनावी सरगर्मी है और केंद्र-राज्य राजनीतिक तनाव चरम पर है। गौरतलब है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की पटना में की गई टिप्पणी को NDA ने 'प्रधानमंत्री के पद का अपमान' करार दिया। दूसरी ओर, कांग्रेस का तर्क है कि विपक्ष की आलोचना को दबाने के लिए इस विवाद को जान-बूझकर बढ़ाया जा रहा है।
राजनीतिक असर और आगे की दिशा
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयानबाज़ी के दौर राष्ट्रीय विमर्श को ठोस मुद्दों से भटकाते हैं। दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग अगले कुछ दिनों में और तेज़ होने की संभावना है, खासकर यदि अन्य राज्यों के कांग्रेस या NDA नेता इस विवाद में कूदते हैं। फिलहाल, कर्नाटक इस पूरे राजनीतिक संघर्ष का केंद्रबिंदु बना हुआ है।