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कर्नाटक: सिद्दारमैया पर ₹75 करोड़ फंड में कुरुबा समुदाय को 60-70% देने का आरोप

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कर्नाटक: सिद्दारमैया पर ₹75 करोड़ फंड में कुरुबा समुदाय को 60-70% देने का आरोप

सारांश

कर्नाटक में एक धर्मगुरु ने दावा किया है कि पूर्व CM सिद्दारमैया ने पद छोड़ने से एक दिन पहले पिछड़े वर्गों के लिए जारी ₹75 करोड़ में से 60-70% केवल अपने कुरुबा समुदाय को दिया — यह आरोप सीधे उनकी अहिंदा राजनीति की विश्वसनीयता पर प्रहार करता है।

मुख्य बातें

प्रणवानंद स्वामीजी ने आरोप लगाया कि ₹75 करोड़ के कम्युनिटी सेंटर फंड का 60-70% केवल कुरुबा समुदाय को मिला।
171 संस्थाओं में से 89 कुरुबा समुदाय से जुड़ी थीं; मदिवाला को 8 , यादव को 2 , हेलावा व सविता को 1-1 अनुदान।
पिछड़े वर्गों के लिए रखे ₹138 करोड़ में से ₹78 करोड़ सिद्दारमैया के पद छोड़ने से एक दिन पहले जारी किए गए।
गदग में राकेश सिद्दारमैया ट्रस्ट को ₹50 लाख और सिद्दारमैया के गृह क्षेत्र टी.
नरसीपुरा तालुक में 13 केंद्रों को अनुदान देने का भी आरोप।
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने किसी भी असंतुलन को सुधारने का आश्वासन दिया।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर पिछड़े वर्गों के लिए आवंटित कम्युनिटी सेंटर फंड में जातीय पक्षपात का गंभीर आरोप लगा है। 'मोस्ट बैकवर्ड क्लास मठों के प्रमुखों के मंच' के अध्यक्ष प्रणवानंद स्वामीजी ने बेंगलुरु में गुरुवार को मीडिया के सामने दावा किया कि ₹75 करोड़ के इस फंड का 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल कुरुबा समुदाय से जुड़ी संस्थाओं को दिया गया, जबकि अन्य 104 पिछड़ी जातियाँ हाशिये पर रह गईं।

आरोप का मूल आधार

प्रणवानंद स्वामीजी के अनुसार उनके पास वित्त विभाग द्वारा जारी वह आदेश मौजूद है, जिसके तहत 171 संगठनों और संस्थानों को ₹75 करोड़ जारी किए गए। उनका आरोप है कि इनमें से 89 संस्थाएँ कुरुबा समुदाय से संबंधित हैं। तुलनात्मक रूप से मदिवाला समुदाय के केवल 8, यादव समुदाय के 2, और हेलावा व सविता समुदायों के एक-एक कम्युनिटी सेंटर को अनुदान मिला।

धर्मगुरु ने यह भी दावा किया कि पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए रखे गए ₹138 करोड़ में से ₹78 करोड़ सिद्दारमैया के मुख्यमंत्री पद छोड़ने से एक दिन पहले एकमुश्त जारी कर दिए गए।

सिद्दारमैया की अहिंदा राजनीति पर सवाल

प्रणवानंद स्वामीजी ने सिद्दारमैया की सामाजिक न्याय की छवि को सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा, 'पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने हमेशा समानता और सामाजिक न्याय की बात की है। वे खुद को अहिंदा समुदायों और खासकर दलितों का प्रतिनिधि बताते हैं। अगर ऐसा है तो यह फंड आवंटन अहिंदा के सिद्धांतों को कैसे दर्शाता है?'

गौरतलब है कि सिद्दारमैया कुरुबा समुदाय से आते हैं और अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित) गठबंधन उनकी राजनीति का केंद्रीय स्तंभ रहा है। आलोचकों का कहना है कि इस आवंटन से उस छवि पर सवालिया निशान लगता है।

सिद्दारमैया के गृह क्षेत्र और परिवार से जुड़े आरोप

स्वामीजी ने यह भी आरोप लगाया कि सिद्दारमैया के गृह क्षेत्र टी. नरसीपुरा तालुक में 13 कम्युनिटी सेंटरों को अनुदान दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि गदग में राकेश सिद्दारमैया ट्रस्ट को ₹50 लाख मंजूर किए गए। उल्लेखनीय है कि राकेश सिद्दारमैया, सिद्दारमैया के बड़े पुत्र थे, जिनका 30 जुलाई 2016 को बेल्जियम के ब्रुसेल्स में एंटवर्प यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में 39 वर्ष की आयु में मल्टीपल ऑर्गन फेलियर के कारण निधन हो गया था।

सरकार की प्रतिक्रिया

इन आरोपों पर कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने गुरुवार को बेंगलुरु में कहा, 'हम किसी एक समुदाय की सरकार नहीं हैं। सभी समुदायों को न्याय मिलना चाहिए। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह सबके साथ निष्पक्षता सुनिश्चित करे।' उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी कुछ समुदायों को अधिक और दूसरों को कम फंड मिल सकता है, लेकिन भरोसा दिलाया कि यदि कोई असंतुलन है तो आने वाले वर्ष में जरूरी सुधार किए जाएंगे।

आगे क्या होगा

धर्मगुरु प्रणवानंद स्वामीजी ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी भी समुदाय को सरकारी सहायता मिलने पर आपत्ति नहीं है — उनकी माँग है कि पिछड़ी जातियों की 104 श्रेणियों — जिनमें एडिगा, कुंबारा, विश्वकर्मा, शिवसिम्पी, पिंजारा, उप्पारा, मदिवाला और वोक्कालिगा शामिल हैं — के बीच फंड का न्यायसंगत वितरण हो। यह मामला कर्नाटक में पिछड़ा वर्ग राजनीति और सामाजिक न्याय की बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह एक ऐसे नेता की विरासत को कमज़ोर करता है जो खुद को दलितों और पिछड़ों का सबसे बड़ा हिमायती बताते रहे हैं। गृह मंत्री खड़गे का 'सुधार का आश्वासन' इस बात का संकेत है कि सरकार भी किसी न किसी असंतुलन को स्वीकार कर रही है — लेकिन जवाबदेही का कोई ठोस ढाँचा अभी सामने नहीं आया है। कर्नाटक में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़े वर्गों के बीच यह दरार कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से महँगी पड़ सकती है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्दारमैया पर कम्युनिटी सेंटर फंड में क्या आरोप लगे हैं?
आरोप है कि सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री पद छोड़ने से एक दिन पहले पिछड़े वर्गों के लिए जारी ₹75 करोड़ के फंड का 60-70% हिस्सा अपने कुरुबा समुदाय से जुड़ी 89 संस्थाओं को दिया, जबकि 104 पिछड़ी जातियों के अन्य समुदायों को बहुत कम मिला।
यह फंड कब और कैसे जारी हुआ?
धर्मगुरु के अनुसार, पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए रखे ₹138 करोड़ में से ₹78 करोड़ सिद्दारमैया के पद छोड़ने से ठीक एक दिन पहले एकमुश्त जारी कर दिए गए। वित्त विभाग के आदेश के तहत 171 संगठनों को यह राशि वितरित की गई।
प्रणवानंद स्वामीजी कौन हैं और उन्होंने यह आरोप क्यों लगाए?
'मोस्ट बैकवर्ड क्लास मठों के प्रमुखों के मंच' के अध्यक्ष प्रणवानंद स्वामीजी पिछड़ी जातियों के धार्मिक-सामाजिक प्रतिनिधि हैं। उनका कहना है कि पिछड़ी जातियों की 104 श्रेणियों में से अधिकांश को नजरअंदाज किया गया, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है।
कर्नाटक सरकार ने इन आरोपों पर क्या कहा?
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि सरकार किसी एक समुदाय की नहीं है और सभी के साथ निष्पक्षता सुनिश्चित करना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने माना कि यदि कोई असंतुलन है तो आने वाले वर्ष में सुधार किए जाएंगे।
राकेश सिद्दारमैया ट्रस्ट को फंड मिलने का क्या मतलब है?
आरोप है कि गदग में राकेश सिद्दारमैया ट्रस्ट को ₹50 लाख मंजूर किए गए। राकेश सिद्दारमैया, पूर्व CM के बड़े पुत्र थे जिनका 30 जुलाई 2016 को बेल्जियम में निधन हो गया था। इस आरोप से फंड आवंटन में परिवारवाद की भी चर्चा छिड़ गई है।
राष्ट्र प्रेस
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