सिद्दारमैया का वीडियो जारकीहोली सीडी कांड के सूत्रधारों की करतूत : कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को बदनाम करने वाले स्टिंग वीडियो के पीछे वही नेटवर्क है, जिसने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता और पूर्व मंत्री रमेश जारकीहोली से जुड़ा विवादित सीडी कांड रचा था। राजन्ना का यह बयान ऐसे समय आया जब सिद्दारमैया ने बेंगलुरु की एक अदालत में याचिका दायर कर मानहानिकारक ऑडियो और वीडियो क्लिप के प्रसारण पर रोक लगाने की माँग की है।
राजन्ना का मुख्य आरोप
मीडिया से बात करते हुए राजन्ना ने सीधे शब्दों में कहा, 'आप ही बताइए कि रमेश जारकीहोली की सीडी के पीछे कौन था? जिन लोगों ने उनकी सीडी बनवाई थी, उन्होंने ही सिद्दारमैया का मामला भी तैयार किया है।' हालाँकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया और यह भी स्वीकार किया कि उनके बयान से किसी की संलिप्तता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आता।
राजन्ना ने यह भी दावा किया कि जब वे सिद्दारमैया के पिछले मंत्रिमंडल में मंत्री थे, तब उनके खिलाफ भी स्टिंग ऑपरेशन की कोशिश हुई थी। उन्होंने कहा, 'मेरे खिलाफ भी ऐसी कोशिश हुई थी। वे मेरा स्टिंग ऑपरेशन करना चाहते थे। चूँकि वह सरकारी आवास था, इसलिए मुझे लगा कि सुरक्षाकर्मी और सीसीटीवी कैमरे होंगे, लेकिन बाद में पता चला कि वहाँ कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था।'
जारकीहोली सीडी कांड की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि 2021 में सामने आए उस सीडी विवाद में रमेश जारकीहोली का नाम जुड़ा था, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन BJP सरकार में मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अब राजन्ना के आरोपों के कारण उस पुराने प्रकरण को लेकर राजनीतिक अटकलें फिर से तेज हो गई हैं। राजन्ना ने कहा, 'राज्य में सीडी बनाने और जारी करने तथा स्टिंग ऑपरेशन चलाने की केवल एक ही फैक्ट्री है, लेकिन उसके साझेदार अलग-अलग हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब सिद्दारमैया, जो अब कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य हैं, पहले से ही MUDA भूमि आवंटन मामले में कानूनी घेरे में हैं। आलोचकों का कहना है कि यह ताजा वीडियो विवाद उन पर राजनीतिक दबाव और बढ़ा सकता है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार से जाँच की माँग
राजन्ना ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस पूरे मामले में स्पष्टीकरण देने और कड़ी जाँच सुनिश्चित करने की माँग की। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री के अधीन सभी जाँच एजेंसियाँ हैं। उन्हें लोगों के बीच की भ्रम की स्थिति को दूर करना चाहिए। इस पूरे मामले से राज्य की प्रतिष्ठा को गहरी चोट पहुँची है।' उन्होंने यह भी कहा, 'मुख्यमंत्री खुद एक असहाय व्यक्ति की तरह कैसे बात कर सकते हैं? यदि जाँच कराई जाए और सब कुछ सार्वजनिक किया जाए, तो यह स्टिंग माफिया यहीं रुक जाएगा।'
कांग्रेस के आंतरिक समीकरण और ढाई-ढाई साल की व्यवस्था
राजन्ना ने स्वीकार किया कि कांग्रेस हाईकमान ने उस व्यवस्था पर चर्चा की थी जिसके तहत दो मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल का कार्यकाल संभालेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि सिद्दारमैया और शिवकुमार इस व्यवस्था पर सहमत थे या नहीं, और इसी आधार पर सिद्दारमैया से पद छोड़ने के लिए कहा गया था — किसी आरोप की वजह से नहीं।
यह भी उल्लेखनीय है कि 2025 में राजन्ना और शिवकुमार के बीच मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। राजन्ना ने तब कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) अध्यक्ष पद की इच्छा जताई थी और यह भी माँग की थी कि सिद्दारमैया के उत्तराधिकारी के रूप में दलित समुदाय का नेता मुख्यमंत्री बने।
आगे क्या होगा
सिद्दारमैया की बेंगलुरु अदालत में दायर याचिका पर सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि वीडियो के प्रसार पर रोक लगाई जाती है या नहीं। राजन्ना ने मीडिया से भी अपील की कि वे ऐसे वीडियो बनाने वालों से उनके उद्देश्य के बारे में सवाल करें। कर्नाटक की राजनीति में यह विवाद कांग्रेस की आंतरिक एकता और राज्य सरकार की साख दोनों के लिए एक अहम परीक्षा साबित हो सकता है।