12 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

कसौली वनाग्नि पर 15 घंटे में काबू: सेना-वायुसेना के संयुक्त अभियान ने बचाए संवेदनशील वन

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
कसौली वनाग्नि पर 15 घंटे में काबू: सेना-वायुसेना के संयुक्त अभियान ने बचाए संवेदनशील वन

सारांश

26 मई को दोपहर भड़की कसौली वनाग्नि के खिलाफ सेना, वायुसेना और नागरिक प्रशासन ने 15 घंटे का संयुक्त मोर्चा खोला — जमीन पर फायरब्रेक, आसमान से बम्बी बकेट सॉर्टीज। संवेदनशील वन बचाए गए, कोई हताहत नहीं।

मुख्य बातें

26 मई 2026 को दोपहर 3 बजे कसौली की पश्चिमी ढलानों पर गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र में भीषण वनाग्नि भड़की।
भारतीय सेना की कसौली ब्रिगेड और भारतीय वायुसेना ने 15 घंटे से अधिक के संयुक्त अभियान से आग पर काबू पाया।
वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सुखना झील से पानी भरकर बम्बी बकेट सॉर्टीज के ज़रिए हवाई अग्निशमन किया।
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह (एवीएसएम, एसएम) ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर अभियान की समीक्षा की।
सभी तैनात कर्मी और उपकरण सुरक्षित; किसी नागरिक या राहतकर्मी के हताहत होने की सूचना नहीं।
शेष हॉटस्पॉट्स बुझाने और पुनः भड़कने से रोकने का अभियान अभी जारी है।

भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना ने 26-27 मई 2026 को कसौली की पश्चिमी ढलानों पर भड़की भीषण वनाग्नि पर 15 घंटे से अधिक के अथक संयुक्त अभियान के बाद सफलतापूर्वक काबू पा लिया। गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र में फैली इस आग को संवेदनशील वन क्षेत्रों तक पहुँचने से रोक दिया गया। अभियान में तैनात सभी कर्मी और उपकरण सुरक्षित हैं तथा किसी भी नागरिक या राहतकर्मी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

आग कैसे लगी और कैसे फैली

26 मई 2026 को दोपहर लगभग 3 बजे कसौली के पश्चिमी ढलानों पर आग भड़की। घने जंगल और दुर्गम पहाड़ी इलाके के कारण आग तेज़ी से फैलने लगी, जिससे गिल्बर्ट हिल और अपर मॉल सहित कई प्रमुख क्षेत्र इसकी चपेट में आ गए। यह ऐसे समय में हुआ जब उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में गर्मी के मौसम में वनाग्नि की घटनाएँ पहले से ही बढ़ी हुई थीं।

संयुक्त अभियान की रणनीति

कसौली ब्रिगेड ने आग लगने की सूचना मिलते ही तत्काल और समन्वित कार्रवाई शुरू की। जमीनी स्तर पर सेना के जवानों ने फायर टेंडरों और जल वाहनों की मदद से अग्निशमन किया। साथ ही फायरब्रेक तैयार कर संवेदनशील क्षेत्रों को अलग-थलग किया गया ताकि आग का फैलाव रोका जा सके।

हवाई मोर्चे पर भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सुखना झील से पानी भरकर 'बम्बी बकेट' सॉर्टीज के ज़रिए दुर्गम क्षेत्रों में हवाई अग्निशमन अभियान चलाया। कसौली और चंडीगढ़ प्रशासन के नागरिक अधिकारियों तथा स्थानीय एजेंसियों ने भी इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाई।

वरिष्ठ अधिकारी का दौरा

लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह (एवीएसएम, एसएम) ने स्वयं प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया और जारी अभियानों की समीक्षा करते हुए जमीनी स्थिति का आकलन किया। उनकी उपस्थिति ने अभियान को उच्च प्राथमिकता का संकेत दिया।

आम जनता और पर्यावरण पर असर

अधिकारियों के अनुसार, अभियान में तैनात सभी कर्मी और उपकरण सुरक्षित हैं। नागरिकों या राहतकर्मियों में किसी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है। आग को संवेदनशील वन क्षेत्रों तक फैलने से रोकना इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, क्योंकि कसौली के जंगल जैव विविधता की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

क्या होगा आगे

सेना के कर्मी अभी भी शेष हॉटस्पॉट्स को बुझाने में जुटे हैं ताकि आग दोबारा न भड़क सके। दुर्गम क्षेत्रों में हवाई अग्निशमन अभियान अभी भी जारी बताया जा रहा है। यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसमी वनाग्नि से निपटने के लिए दीर्घकालिक रोकथाम तंत्र की ज़रूरत को रेखांकित करती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह घटना एक बड़े सवाल की ओर भी इशारा करती है — पहाड़ी राज्यों में हर गर्मी के मौसम में वनाग्नि की पुनरावृत्ति क्यों होती है? सेना को बार-बार नागरिक विफलताओं की भरपाई करनी पड़ती है, जबकि वन विभाग के पास अग्निशमन के लिए पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षित जनशक्ति का अभाव बना रहता है। दीर्घकालिक रोकथाम — अर्ली वॉर्निंग सिस्टम, फायरब्रेक नेटवर्क, और स्थानीय समुदायों की भागीदारी — के बिना यह चक्र हर साल दोहराया जाता रहेगा।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कसौली में वनाग्नि कब और कहाँ लगी?
आग 26 मई 2026 को दोपहर लगभग 3 बजे कसौली की पश्चिमी ढलानों पर गिल्बर्ट ट्रेल और अपर मॉल क्षेत्र में भड़की। घने जंगल और दुर्गम इलाके के कारण यह तेज़ी से फैली।
भारतीय सेना और वायुसेना ने आग बुझाने के लिए क्या किया?
सेना की कसौली ब्रिगेड ने फायर टेंडरों, जल वाहनों और फायरब्रेक के ज़रिए जमीनी अग्निशमन किया। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने सुखना झील से पानी भरकर बम्बी बकेट सॉर्टीज के माध्यम से हवाई अग्निशमन अभियान चलाया।
क्या इस आग में कोई हताहत हुआ?
अधिकारियों के अनुसार, अभियान में तैनात सभी कर्मी और उपकरण सुरक्षित हैं। नागरिकों या राहतकर्मियों के बीच किसी प्रकार की जनहानि या चोट की सूचना नहीं है।
अभियान की निगरानी किसने की?
लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेन्द्र सिंह (एवीएसएम, एसएम) ने स्वयं प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर जारी अभियानों की समीक्षा की और जमीनी स्थिति का आकलन किया।
क्या आग पूरी तरह बुझ गई है?
प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों में आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है। हालाँकि, सेना के कर्मी अभी भी शेष हॉटस्पॉट्स बुझाने और दुर्गम क्षेत्रों में हवाई अग्निशमन अभियान जारी रखे हुए हैं ताकि आग दोबारा न भड़क सके।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले