13 जुलाई 2026
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शिमला: जंगल की आग ने मेंटल हॉस्पिटल और ब्रिटिश कालीन कब्रिस्तान को घेरा, बालूगंज में दहशत

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शिमला: जंगल की आग ने मेंटल हॉस्पिटल और ब्रिटिश कालीन कब्रिस्तान को घेरा, बालूगंज में दहशत

सारांश

शिमला के बालूगंज में भड़की जंगल की आग ने मेंटल हॉस्पिटल और ब्रिटिश काल के कब्रिस्तान तक दस्तक दी — दमकल, वन विभाग और स्थानीय लोग घंटों से डटे हैं। कोई हताहत नहीं, पर नुकसान व्यापक है। यह घटना हिमाचल में गर्मियों में बढ़ती वनाग्नि की गंभीर प्रवृत्ति को एक बार फिर उजागर करती है।

मुख्य बातें

28 मई को शिमला के बालूगंज में जंगल की भीषण आग भड़की।
आग मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास केंद्र और ब्रिटिश काल के कब्रिस्तान तक पहुँची।
आग की सूचना सुबह 10:43 बजे मिली; आग अस्पताल से लगभग आधा किलोमीटर दूर से शुरू हुई।
आग 4-5 घंटों तक तेज़ी से फैलती रही; आईएसबीटी दिशा में भी फैलाव हुआ।
दमकल विभाग, वन विभाग और स्थानीय लोग मिलकर आग बुझाने में जुटे; अब तक कोई हताहत नहीं ।
प्रशासन ने आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त दमकल टीमें बुलाने की तैयारी की है।

शिमला के बालूगंज इलाके में 28 मई को जंगल की भीषण आग ने मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास केंद्र (मेंटल हॉस्पिटल) को अपने घेरे में ले लिया और ब्रिटिश काल के कब्रिस्तान तक पहुँच गई, जिससे आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। दमकल विभाग की कई टीमों, अस्पताल कर्मचारियों और वन विभाग के अमले ने मिलकर घंटों तक आग पर काबू पाने का प्रयास किया। अब तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

आग का फैलाव और मुख्य घटनाक्रम

बालूगंज फायर स्टेशन के लीडिंग फायरमैन रमेश शर्मा ने बताया कि उन्हें सुबह 10:43 बजे आग की सूचना मिली। उनके अनुसार, आग मानसिक अस्पताल से लगभग आधा किलोमीटर दूर से शुरू हुई और बाद में आईएसबीटी की दिशा में फैलने लगी। शर्मा ने कहा, 'हम सुबह से लगातार आग बुझाने का प्रयास कर रहे हैं।'

मेंटल हेल्थ एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर के कर्मचारी लाटू राणा ने बताया कि पिछले 4-5 घंटों से आग बहुत तेज़ी से फैल रही थी। उन्होंने कहा, 'दमकल कर्मी और हम सब मिलकर इसे बुझाने की कोशिश में जुटे हुए हैं।'

आसपास के इलाकों पर असर

स्थानीय निवासी नरेंद्र कुमार के अनुसार, मानसिक अस्पताल के निकट बने डॉग हाउस में भी आग फैल गई थी और पेड़ों के साथ-साथ गाँव के कुछ घरों के पास तक लपटें पहुँच गई थीं। अस्पताल परिसर और ब्रिटिश-युग के कब्रिस्तान को काफी नुकसान पहुँचा बताया जा रहा है। आग का क्षेत्रफल काफी बड़ा बताया जा रहा है।

राहत एवं बचाव कार्य

दमकल अधिकारियों के अनुसार, मौके पर कई टीमें तैनात हैं और आग को पूरी तरह नियंत्रित करने में समय लग सकता है। वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय लोग भी बचाव कार्य में सहयोग कर रहे हैं। प्रशासन ने स्थिति पर नज़र बनाए रखी है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त दमकल टीमें बुलाए जाने की संभावना है।

पृष्ठभूमि: शिमला में बढ़ती जंगल की आग

यह ऐसे समय में आया है जब शिमला में गर्मी और सूखे के मौसम में जंगल की आग की घटनाएँ आम होती जा रही हैं। वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे जंगल में आग लगाने या किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें। गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश के कई ज़िलों में मई-जून के महीनों में जंगल की आग की घटनाएँ हर वर्ष बढ़ती हैं, जो वन संपदा और आबादी दोनों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

ऐसी घटनाएँ हर मई-जून में सुर्खियाँ बनती रहेंगी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिमला के बालूगंज में आग कब और कहाँ से शुरू हुई?
आग 28 मई को सुबह 10:43 बजे रिपोर्ट की गई और मानसिक अस्पताल से लगभग आधा किलोमीटर दूर जंगल में शुरू हुई। यह बाद में आईएसबीटी की दिशा में फैलने लगी।
क्या मेंटल हॉस्पिटल के मरीज़ों या कर्मचारियों को कोई नुकसान हुआ?
अब तक किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। अस्पताल कर्मचारी और दमकल दल मिलकर आग बुझाने में जुटे रहे।
ब्रिटिश काल के कब्रिस्तान को कितना नुकसान हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार अस्पताल परिसर के साथ-साथ ब्रिटिश-युग के कब्रिस्तान को काफी नुकसान पहुँचा है। नुकसान का विस्तृत आकलन अभी जारी है।
आग बुझाने में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल हैं?
बालूगंज फायर स्टेशन की दमकल टीमें, वन विभाग के कर्मचारी, मेंटल हेल्थ सेंटर का स्टाफ और स्थानीय निवासी मिलकर आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन ने ज़रूरत पड़ने पर अतिरिक्त टीमें बुलाने की तैयारी रखी है।
शिमला में जंगल की आग इतनी बार क्यों लगती है?
शिमला और हिमाचल प्रदेश के अन्य इलाकों में गर्मी और सूखे के मौसम में जंगल की आग की घटनाएँ बढ़ती जा रही हैं। वन विभाग ने लोगों से जंगल में आग लगाने और लापरवाही से बचने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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