रेवाड़ी के बावल में यूटीएल सोलर कंपनी में भीषण आग, 10 घंटे बाद भी दमकल की जद्दोजहद जारी
सारांश
मुख्य बातें
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल औद्योगिक क्षेत्र में स्थित यूटीएल सोलर कंपनी में बुधवार रात 11 बजे भीषण आग भड़क उठी, जो गुरुवार सुबह तक भी पूरी तरह काबू में नहीं आ सकी। दमकल विभाग की 12 गाड़ियाँ लगातार 10 घंटे से अधिक समय से आग बुझाने में जुटी हैं, जबकि काले धुएँ का गुबार आसमान में दूर तक दिखाई दे रहा था। अधिकारियों के अनुसार अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है।
मुख्य घटनाक्रम
दमकल विभाग को सूचना मिलते ही रेवाड़ी, कोसली, बावल और आसपास के इलाकों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियाँ तत्काल मौके पर बुलाई गईं। आग की भीषणता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रत्येक गाड़ी को अब तक 10 से 12 बार पानी के लिए रिफिल करना पड़ा। पूरी रात दमकल कर्मचारी बिना रुके आग बुझाने में लगे रहे।
आग क्यों बेकाबू हुई
दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यूटीएल सोलर सोलर बैटरी निर्माण से जुड़ी कंपनी है, जहाँ बड़ी मात्रा में बैटरियाँ, थिनर और अन्य ज्वलनशील पदार्थ रखे हुए थे। इन्हीं ज्वलनशील सामग्रियों के कारण आग तेज़ी से फैलती चली गई और उस पर काबू पाना अत्यंत कठिन हो गया। शुरुआती जाँच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालाँकि आधिकारिक पुष्टि आग पूरी तरह बुझने के बाद ही की जाएगी।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर लगातार तैनात रहीं। सुरक्षा के मद्देनज़र आसपास की अन्य फैक्ट्रियों और औद्योगिक इकाइयों को तत्काल सतर्क कर दिया गया, ताकि आग पड़ोसी कंपनियों तक न फैल सके। दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग बुझाने के साथ-साथ कंपनी के अंदर रखा तैयार माल भी बाहर निकलवाया गया और उसे सड़क पर सुरक्षित रखा गया।
आर्थिक नुकसान का आकलन बाकी
अधिकारियों के मुताबिक, कंपनी को हुए आर्थिक नुकसान का सटीक आकलन आग पूरी तरह बुझने के बाद किया जाएगा। फैक्ट्री में मौजूद मशीनों और तैयार माल का पूरा रिकॉर्ड कंपनी प्रबंधन के पास उपलब्ध है, जिसके आधार पर नुकसान की गणना होगी। गौरतलब है कि बावल औद्योगिक क्षेत्र हरियाणा के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में से एक है, और इस घटना ने यहाँ की अन्य इकाइयों को भी चिंता में डाल दिया है।
क्या होगा आगे
आग पर पूरी तरह काबू पाने के बाद फोरेंसिक और दमकल विभाग की संयुक्त टीम आग लगने के सटीक कारणों की जाँच करेगी। यह घटना औद्योगिक क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थों के भंडारण और अग्निशमन तैयारियों पर फिर से गंभीर सवाल खड़े करती है।