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कसौली जंगल की आग पर काबू: IAF के MI-17 हेलीकॉप्टरों ने रात में NVG से गिराए 93,000 लीटर पानी

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कसौली जंगल की आग पर काबू: IAF के MI-17 हेलीकॉप्टरों ने रात में NVG से गिराए 93,000 लीटर पानी

सारांश

कसौली की भीषण वनाग्नि से लड़ाई सिर्फ ज़मीनी नहीं थी — यह आसमान से भी लड़ी गई, और पहली बार रात के अंधेरे में भी। NVG से लैस MI-17 हेलीकॉप्टरों ने 93,000 लीटर पानी बरसाकर छावनी और वायु सेना स्टेशन को बचाया — भारतीय वायु सेना की एक ऐतिहासिक रात्रि अग्निशमन कार्रवाई।

मुख्य बातें

26 मई 2026 को कसौली की पश्चिमी ढलानों पर भड़की जंगल की आग 30 मई तक काबू में की गई।
IAF के MI-17 V5 हेलीकॉप्टरों ने बैम्बी बकेट से कुल 93,000 लीटर पानी गिराया।
पानी चंडीगढ़ की सुखना झील से भरा गया; प्रति चक्कर 2,000–2,500 लीटर की क्षमता।
पहली बार नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग कर रात में हवाई अग्निशमन किया गया।
कसौली छावनी , वायु सेना स्टेशन और आस-पास की बस्तियाँ खतरे से बचाई गईं।
भारतीय सेना , कसौली छावनी बोर्ड और नागरिक अग्निशमन सेवाओं ने ज़मीनी स्तर पर सहयोग किया।

कसौली की पश्चिमी ढलानों पर 26 मई को भड़की भीषण जंगल की आग को भारतीय वायु सेना (IAF), भारतीय सेना और हिमाचल प्रदेश प्रशासन के संयुक्त अभियान के तहत सफलतापूर्वक काबू में कर लिया गया है। इस ऑपरेशन में पहली बार रात में नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग करते हुए हवाई अग्निशमन कार्रवाई की गई, जो भारत में इस तरह की अपनी तरह की पहली घटना बताई जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

आग लगने की पहली सूचना 26 मई को दोपहर करीब 2:50 बजे जंगेसू पंचायत इलाके के पास मिली। तेज हवाओं के कारण आग तेज़ी से जंगल के बड़े हिस्से में फैल गई, जिससे कसौली छावनी के ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के साथ-साथ कसौली वायु सेना स्टेशन को भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। आस-पास की बस्तियों और ज़रूरी बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएँ गहरा गई थीं।

हवाई अग्निशमन अभियान

भारतीय वायु सेना ने 'बैम्बी बकेट' से लैस MI-17 V5 हेलीकॉप्टर तैनात किए। इन हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ की सुखना झील से प्रति चक्कर 2,000 से 2,500 लीटर पानी भरकर आग प्रभावित इलाकों पर गिराया। कई चक्करों के बाद कुल मिलाकर 93,000 लीटर पानी गिराया गया।

रात के ऑपरेशन के दौरान क्रू ने नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग किया, जिससे सूर्यास्त के बाद भी पानी गिराने का काम निर्बाध रूप से जारी रह सका। रक्षा मंत्रालय ने NVG से ली गई कॉकपिट की फुटेज भी साझा की, जिसमें धुएँ से ढकी पहाड़ियों पर आग की बड़ी-बड़ी लपटें और हेलीकॉप्टरों द्वारा पानी गिराने का दृश्य स्पष्ट दिखाई दे रहा था।

रक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया

रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में इस संयुक्त अभियान की जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, 'आग के खतरे और रात के ऑपरेशन से जुड़े जोखिमों के बावजूद अग्निशमन कार्य तब तक जारी रहा, जब तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पा लिया गया।' मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन से जमीन पर तैनात लोगों की जान और महत्वपूर्ण बुनियादी ढाँचे को बचाया जा सका।

संयुक्त ज़मीनी प्रयास

हवाई अभियान के साथ-साथ भारतीय सेना, कसौली छावनी बोर्ड और नागरिक अग्निशमन सेवाओं की ज़मीनी टीमें भी लगातार सक्रिय रहीं। इन सभी एजेंसियों के समन्वित प्रयास से ही इस बहु-दिवसीय अभियान में सफलता मिल सकी। गौरतलब है कि यह ऑपरेशन कई दिनों तक चला और इसमें नागरिक तथा सैन्य संसाधनों का एक साथ उपयोग किया गया।

आगे की स्थिति

अधिकारियों के अनुसार, आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य हो रही है। यह ऑपरेशन भविष्य में पहाड़ी इलाकों में रात्रि हवाई अग्निशमन अभियानों के लिए एक मिसाल बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में जंगल की आग की घटनाएँ बढ़ रही हैं, और इस तरह की क्षमता का विकास आगे भी काम आएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक है — NVG से रात में हवाई अग्निशमन का पहली बार उपयोग यह दर्शाता है कि सेना अब जंगल की आग को केवल नागरिक समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती मान रही है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह क्षमता केवल सैन्य प्रतिष्ठानों के खतरे में पड़ने पर ही सक्रिय होती है, या आम नागरिक बस्तियों के लिए भी समान तत्परता दिखाई जाएगी। उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में वनाग्नि की घटनाएँ हर साल बढ़ रही हैं, पर स्थायी पूर्व-चेतावनी और त्वरित-प्रतिक्रिया तंत्र अभी भी अधूरे हैं। एक बार का सफल ऑपरेशन नीतिगत खाई को नहीं भरता।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कसौली जंगल की आग कब और कहाँ लगी थी?
आग 26 मई 2026 को दोपहर करीब 2:50 बजे कसौली की पश्चिमी ढलानों पर जंगेसू पंचायत इलाके के पास लगी थी। तेज हवाओं के कारण यह तेज़ी से फैल गई और कई दिनों तक जलती रही।
IAF ने इस ऑपरेशन में कितना पानी गिराया?
MI-17 V5 हेलीकॉप्टरों ने चंडीगढ़ की सुखना झील से पानी भरकर कुल 93,000 लीटर पानी आग प्रभावित इलाकों पर गिराया। प्रत्येक चक्कर में 2,000 से 2,500 लीटर पानी ले जाया जाता था।
रात में NVG से हवाई अग्निशमन क्यों खास है?
यह भारत में पहली बार था जब नाइट विजन गॉगल्स (NVG) का उपयोग कर रात में हवाई अग्निशमन किया गया। इस तकनीक ने क्रू को सूर्यास्त के बाद भी पानी गिराने का काम जारी रखने में सक्षम बनाया, जिससे आग को और फैलने से रोका जा सका।
इस आग से कौन-से संवेदनशील ठिकाने खतरे में थे?
आग से कसौली छावनी के ऐतिहासिक और रणनीतिक क्षेत्रों तथा कसौली वायु सेना स्टेशन को गंभीर खतरा था। इसके अलावा आस-पास की बस्तियाँ और ज़रूरी बुनियादी ढाँचा भी संकट में था।
इस ऑपरेशन में कौन-कौन सी एजेंसियाँ शामिल थीं?
इस संयुक्त अभियान में भारतीय वायु सेना , भारतीय सेना , कसौली छावनी बोर्ड , हिमाचल प्रदेश प्रशासन और नागरिक अग्निशमन सेवाएँ शामिल थीं। सभी एजेंसियों के समन्वित प्रयास से ही आग पर काबू पाया जा सका।
राष्ट्र प्रेस
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