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मौसंबी की खेती से बदली जालना किसान की तकदीर, केंद्र सरकार की योजना से मिला ₹40 प्रति पौधे का अनुदान

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मौसंबी की खेती से बदली जालना किसान की तकदीर, केंद्र सरकार की योजना से मिला ₹40 प्रति पौधे का अनुदान

सारांश

जालना के एक किसान ने केंद्र सरकार की योजना से 600 मौसंबी के पौधे लगाए और अब सालाना 3 टन उत्पादन से स्थायी आमदनी पा रहे हैं। बारिश और कीट की मार के बावजूद समय पर तुड़ाई कर उन्होंने नुकसान को सीमित रखा — यह कहानी सरकारी योजनाओं के सही उपयोग की मिसाल है।

मुख्य बातें

जालना जिले के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे ने केंद्र सरकार की योजना के तहत 600 मौसंबी के पौधे लगाए।
योजना के अंतर्गत ₹40 प्रति पौधे की दर से ₹24,000 का अनुदान मिला, जिससे शुरुआती लागत घटी।
पिछले दो वर्षों में फलबाग से प्रतिवर्ष लगभग 3 टन मौसंबी का उत्पादन और अच्छी आमदनी।
इस वर्ष 5 से 6 टन उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अत्यधिक बारिश और अज्ञात कीट के प्रकोप से नुकसान हुआ।
बारिश से पहले समय पर तुड़ाई कर भोईटे ने उपज की अच्छी कीमत हासिल की।
भोईटे ने अन्य किसानों से सरकारी योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने की अपील की।

महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे ने केंद्र सरकार की कृषि सहायता योजना का लाभ उठाकर 600 मौसंबी के पौधे लगाए और अब यह फलबाग उन्हें नियमित आमदनी का जरिया बन चुका है। 17 अगस्त 2026 को सामने आई इस सफलता की कहानी उन हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित रह जाते हैं।

योजना से कैसे मिला लाभ

जब संताजी भोईटे को केंद्र सरकार की इस योजना की जानकारी हुई, तो उन्होंने जालना के प्रखंड विकास अधिकारी (गट विकास अधिकारी) के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया। आवेदन के साथ उन्होंने ग्रामसेवक के पास योजना के तहत काम की मांग से संबंधित पत्र, ग्राम पंचायत की ग्रामसभा के प्रस्ताव की प्रति, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा किए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला और फलबाग लगाने का काम शुरू हुआ।

योजना के अंतर्गत गड्ढे खोदने से लेकर पौधरोपण, खाद डालने और निराई-गुड़ाई तक के कार्य किए गए। इसके साथ ही उन्हें ₹40 प्रति पौधे की दर से 600 पौधों के लिए कुल ₹24,000 का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे शुरुआती लागत में उल्लेखनीय कमी आई।

उत्पादन और आमदनी

भोईटे के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उनके फलबाग से प्रतिवर्ष लगभग 3 टन मौसंबी का उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई। इस वर्ष उन्हें 5 से 6 टन उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अत्यधिक बारिश और अज्ञात कीट के प्रकोप के कारण फलबाग को नुकसान पहुंचा।

इसके बावजूद भोईटे ने सूझबूझ दिखाते हुए बारिश से पहले ही मौसंबी की तुड़ाई कर ली और अपनी उपज की अच्छी कीमत हासिल की। उनका कहना है कि मौसम और कीटों की मार के बाद भी फलबाग से होने वाली आमदनी उनके लिए फायदेमंद साबित हो रही है।

किसान की प्रतिक्रिया और अपील

संताजी भोईटे ने कहा कि सरकारी सहायता के बिना इतने बड़े स्तर पर फलबाग तैयार करना उनके लिए संभव नहीं होता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं से उनकी जिंदगी बदली है।

उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे ऐसी योजनाओं की जानकारी लें और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाएं। उनके अनुसार, सरकारी सहायता, मेहनत और सही फसल का चुनाव मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर चर्चा जारी है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फलबाग योजनाएं छोटे और सीमांत किसानों को पारंपरिक फसलों से परे जाकर बागवानी में स्थायी आय का विकल्प दे रही हैं। जालना जिले में मौसंबी की खेती का यह अनुभव दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से कृषि में दीर्घकालिक बदलाव संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक व्यक्तिगत कहानी है — नीति की समीक्षा नहीं। असली सवाल यह है कि जालना जैसे जिलों में ऐसी योजनाओं की पहुंच कितने किसानों तक है और आवेदन प्रक्रिया की जटिलता कितने पात्र किसानों को दरवाजे पर ही रोक देती है। अज्ञात कीट के प्रकोप का जिक्र यह भी रेखांकित करता है कि फसल बीमा और कीट प्रबंधन सहायता के बिना बागवानी योजनाएं अधूरी हैं। सरकारी सहायता तभी टिकाऊ होगी जब अनुदान के साथ-साथ तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था भी हो।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संताजी भोईटे ने किस सरकारी योजना का लाभ उठाया?
संताजी भोईटे ने केंद्र सरकार की एक कृषि सहायता योजना का लाभ उठाया, जिसके तहत उन्हें मौसंबी के 600 पौधे लगाने के लिए ₹40 प्रति पौधे की दर से अनुदान मिला। आवेदन जालना के प्रखंड विकास अधिकारी के पास निर्धारित दस्तावेजों के साथ किया गया था।
मौसंबी की खेती से संताजी भोईटे को कितनी आमदनी हो रही है?
पिछले दो वर्षों में उनके फलबाग से प्रतिवर्ष लगभग 3 टन मौसंबी का उत्पादन हुआ है, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई है। इस वर्ष 5 से 6 टन उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन बारिश और कीट के कारण नुकसान हुआ।
इस वर्ष फलबाग को नुकसान क्यों हुआ?
इस वर्ष अत्यधिक बारिश और अज्ञात कीट के प्रकोप के कारण जालना क्षेत्र के फलबागों को नुकसान पहुंचा। हालांकि संताजी भोईटे ने बारिश से पहले ही मौसंबी की तुड़ाई कर अपनी उपज की अच्छी कीमत हासिल कर ली।
इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को क्या करना होता है?
किसानों को संबंधित प्रखंड विकास अधिकारी के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होता है। साथ में ग्रामसेवक को काम की मांग का पत्र, ग्रामसभा प्रस्ताव की प्रति, आधार कार्ड और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज जमा करने होते हैं।
क्या अन्य किसान भी मौसंबी की खेती के लिए ऐसी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं?
हां, संताजी भोईटे ने स्वयं अन्य किसानों से ऐसी योजनाओं की जानकारी लेने और पात्रता के अनुसार आवेदन करने की अपील की है। उनके अनुसार सरकारी सहायता, मेहनत और सही फसल का चुनाव मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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