मौसंबी की खेती से बदली जालना किसान की तकदीर, केंद्र सरकार की योजना से मिला ₹40 प्रति पौधे का अनुदान
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के जालना जिले के अंतरवाला गांव के किसान संताजी भोईटे ने केंद्र सरकार की कृषि सहायता योजना का लाभ उठाकर 600 मौसंबी के पौधे लगाए और अब यह फलबाग उन्हें नियमित आमदनी का जरिया बन चुका है। 17 अगस्त 2026 को सामने आई इस सफलता की कहानी उन हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव में लाभ से वंचित रह जाते हैं।
योजना से कैसे मिला लाभ
जब संताजी भोईटे को केंद्र सरकार की इस योजना की जानकारी हुई, तो उन्होंने जालना के प्रखंड विकास अधिकारी (गट विकास अधिकारी) के पास निर्धारित प्रारूप में आवेदन किया। आवेदन के साथ उन्होंने ग्रामसेवक के पास योजना के तहत काम की मांग से संबंधित पत्र, ग्राम पंचायत की ग्रामसभा के प्रस्ताव की प्रति, आधार कार्ड, बैंक पासबुक और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा किए। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें योजना का लाभ मिला और फलबाग लगाने का काम शुरू हुआ।
योजना के अंतर्गत गड्ढे खोदने से लेकर पौधरोपण, खाद डालने और निराई-गुड़ाई तक के कार्य किए गए। इसके साथ ही उन्हें ₹40 प्रति पौधे की दर से 600 पौधों के लिए कुल ₹24,000 का अनुदान भी प्राप्त हुआ, जिससे शुरुआती लागत में उल्लेखनीय कमी आई।
उत्पादन और आमदनी
भोईटे के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उनके फलबाग से प्रतिवर्ष लगभग 3 टन मौसंबी का उत्पादन हुआ, जिससे उन्हें अच्छी आय प्राप्त हुई। इस वर्ष उन्हें 5 से 6 टन उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन अत्यधिक बारिश और अज्ञात कीट के प्रकोप के कारण फलबाग को नुकसान पहुंचा।
इसके बावजूद भोईटे ने सूझबूझ दिखाते हुए बारिश से पहले ही मौसंबी की तुड़ाई कर ली और अपनी उपज की अच्छी कीमत हासिल की। उनका कहना है कि मौसम और कीटों की मार के बाद भी फलबाग से होने वाली आमदनी उनके लिए फायदेमंद साबित हो रही है।
किसान की प्रतिक्रिया और अपील
संताजी भोईटे ने कहा कि सरकारी सहायता के बिना इतने बड़े स्तर पर फलबाग तैयार करना उनके लिए संभव नहीं होता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार जताते हुए कहा कि किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं से उनकी जिंदगी बदली है।
उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की कि वे ऐसी योजनाओं की जानकारी लें और पात्रता के अनुसार उनका लाभ उठाएं। उनके अनुसार, सरकारी सहायता, मेहनत और सही फसल का चुनाव मिलकर किसानों की आय बढ़ाने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य पर चर्चा जारी है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों में फलबाग योजनाएं छोटे और सीमांत किसानों को पारंपरिक फसलों से परे जाकर बागवानी में स्थायी आय का विकल्प दे रही हैं। जालना जिले में मौसंबी की खेती का यह अनुभव दर्शाता है कि सही मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग से कृषि में दीर्घकालिक बदलाव संभव है।