केरल CM सतीशन के हस्तक्षेप से कोलकाता के वरिष्ठ पत्रकार राजगोपाल का पासपोर्ट संकट हल
सारांश
मुख्य बातें
वरिष्ठ पत्रकार और पूर्व संपादक आर. राजगोपाल का पासपोर्ट नवीनीकरण मामला केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सुलझ गया है। कोलकाता में रहने वाले राजगोपाल, जो मूलतः केरल के निवासी हैं, महीनों से प्रशासनिक अड़चन में फंसे थे और उनकी बेटी की शादी में संयुक्त राज्य अमेरिका जाने की योजना खतरे में पड़ गई थी। अब पासपोर्ट जारी हो जाने के बाद राजगोपाल ने मुख्यमंत्री और उनके कार्यालय के अधिकारियों को औपचारिक धन्यवाद-पत्र लिखा है।
क्या था पूरा मामला
आर. राजगोपाल ने पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन कोलकाता से आई पुलिस सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल होने के कारण प्रक्रिया ठप हो गई। उल्लेखनीय है कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला या कानूनी अयोग्यता दर्ज नहीं थी, फिर भी सत्यापन रिपोर्ट में अड़चन बनी रही।
इस देरी के चलते उनकी बेटी के विवाह समारोह में शामिल होने के लिए अमेरिका जाने की योजना अधर में लटक गई। विकल्प समाप्त होते देख राजगोपाल ने केरल सरकार से मदद की गुहार लगाई।
मुख्यमंत्री कार्यालय का हस्तक्षेप
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन के कार्यालय ने याचिका मिलते ही संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया कि मामले की शीघ्र जाँच की जाए और पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन पर कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस अंतर-राज्यीय पत्राचार के बाद मामला आगे बढ़ा और अंततः पासपोर्ट जारी कर दिया गया।
राजगोपाल ने क्या कहा
पासपोर्ट मिलने के बाद राजगोपाल ने लिखा, 'आपके कार्यालय द्वारा दी गई त्वरित कार्रवाई से मुझे आश्वस्त हुआ कि मामले की निष्पक्ष सुनवाई होगी और उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।' उन्होंने मुख्यमंत्री और उनकी टीम द्वारा दिखाई गई संवेदनशीलता के लिए आभार जताया।
राजगोपाल ने यह भी कहा कि इस अनुभव ने सार्वजनिक संस्थानों की जवाबदेही में उनके विश्वास को और मजबूत किया है। उनके अनुसार, 'किसी भी नागरिक को अप्रत्याशित प्रशासनिक बाधा का सामना करने पर यह जानकर बेहद राहत मिलती है कि मुख्यमंत्री कार्यालय सहानुभूतिपूर्वक सुनने और संवेदनशीलता से कार्रवाई करने के लिए तत्पर है।'
लोकतांत्रिक शासन पर संदेश
राजगोपाल ने आशा व्यक्त की कि सहायता चाहने वाले प्रत्येक केरलवासी को यही जवाबदेही मिलती रहेगी। उन्होंने कहा कि इस तरह के हस्तक्षेप लोकतांत्रिक शासन में जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं और इस बात की पुष्टि करते हैं कि सरकारें जनता की सेवा के लिए ही बनी हैं।
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि जब दो राज्यों के बीच प्रशासनिक समन्वय की कमी हो, तो राजनीतिक-स्तरीय हस्तक्षेप किस तरह नागरिकों को राहत दिला सकता है।